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खाद-बीज की कमी पर विपक्ष का स्थगन, सरकार को घेरने की कोशिश

राज्य विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन विपक्षी भाजपा ने प्रदेश में खाद बीज की कमी के मद्दे पर स्थगन प्रस्ताव लाकर सरकार को घेरने की कोशिश की। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक समेत विपक्ष के कई विधायकों ने स्थगन के पक्ष में अपनी बात रखी। इस चर्चा में सत्ता पक्ष के सदस्यों ने शामिल होकर विपक्ष के आरोप का जवाब दिया।

खाद-बीज की कमी पर विपक्ष का स्थगन, सरकार को घेरने की कोशिश
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खाद (प्रतीकात्मक फोटो) 

राज्य विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन विपक्षी भाजपा ने प्रदेश में खाद बीज की कमी के मद्दे पर स्थगन प्रस्ताव लाकर सरकार को घेरने की कोशिश की। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक समेत विपक्ष के कई विधायकों ने स्थगन के पक्ष में अपनी बात रखी। इस चर्चा में सत्ता पक्ष के सदस्यों ने शामिल होकर विपक्ष के आरोप का जवाब दिया।

धान की बरबादी,मिलिंग में देरी-कौशिक

स्थगन प्रस्ताव में चर्चा करते हुए नेता प्रतिपक्ष धरमलाल काैशिक ने कहा है कि प्रदेश में धान खरीदी से संबंधित कई समस्याएं है। किसान से लेकर सोसायटी व राजस्व नुकसान जैसे गंभीर मामले उत्पन्न हो रहे हैं। विधानसभा सत्र के दौरान कई बार चर्चा होने के बावजूद भी इन समस्याओं का निराकरण नहीं होना विधानसभा की आवमानना भी है।

धान की बर्बादी समय पर कस्टम मिलिंग नही होना समय पर धान का उठाव नही होना, धान खरीदी केन्द्र या सोसायटियों में धान का रखरखाव सही तरीके से नही होना जैसी बहुत सी समस्या है जो समाधान तो दूर इसके लिये पहल तक नहीं की गई हैं।

पिछले साल का तीन लाख टन धान जाम

श्री काैशिक ने कहा है कि खरीफ वर्ष 2019-20 में कस्टम मिलिंग कार्य की धीमी गति व धान के उठाव कार्य में देरी के कारण समर्थन मूल्य पर खरीदे गए धान में से करीब 3 लाख मीट्रिक टन धान अब भी उपार्जन केन्द्रों में जाम है। वही खरीफ वर्ष 2020-21 में लगभग 15 लाख मिट्रिक टन धान समिति व सग्रहण केन्द्रों में शेष है जो सरकारी रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के 28 जिलों में से 24 जिलों में धान का उठाव अब तक नहीं हुआ।

स्थगन प्रस्ताव में रखी गई ये बात

विधानसभा में विपक्ष के कई सदस्यों द्वारा पेश किए गए स्थगन प्रस्ताव में कहा गया है कि प्रदेश के किसानों की समस्याओं का समाधान करने के लिए पूर्व शासनकाल से अनेक प्रकार की मुहिम चलाई गई। लेकिन वर्तमान में समस्याएं दूर होने के बजाय और बढ़ती जा रही है। इसका मुख्य कारण सरकार की आर्थिक तंगी और भ्रष्टाचार है। किसानों को राहत देने के नाम पर सरकारी योजना भ्रष्टाचार से लिप्त होती जा रही है। बजट की भी तंगी है जिससे समस्या कम होने का नाम नहीं ले रही है जो अत्यंत गंभीर विषय है।

रमन बोले- किसान लगातार सड़क पर

पूर्व मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह ने स्थगन पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि खाद-बीज की कमी को लेकर किसान लगातार सड़क पर आकर आंदोलन कर रहे हैं। आप फसल चक्र परिवर्तन की बात कर रहे हैं। अगर ऐसी मंशा है तो धान का रकबा कम करना चाहिए। प्रदेश में सोयाबीन के बीज भी मांग के अनुरूप उपलब्ध नहीं हैं। खाद-बीज की ऐसी अभूतपूर्व किल्लत 20 साल में पहली बार आई है।

कृषि मंत्री सोए हैं- बृजमोहन

भाजपा सदस्य बृजमोहन अग्रवाल ने चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि स्थगन प्रस्ताव पर कृषि मंत्री का जवाब सुनकर लगा कि वे आंख मूंद कर सोए हुए हैं। पांच लाख किसान सड़क पर उतरकर खाद-बीज की मांग कर रहे हैं लेकिन कोई उनकी बात सुनने वाला नहीं है। उनका ज्ञापन लेने को भी कोई तैयार नहीं है।


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