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विश्व टीबी दिवस : टीबी से बचने के लिए समाज में जागरूकता जरूरी, इन लक्षणों की न करें अनदेखी

छाती व श्वास रोग विभागाध्यक्ष डॉ. केबी गुप्ता ने बताया कि लम्बे बुखार को टायफायड मानकर अनदेखी ना करें और तुरंत बलगम टेस्ट व एक्सरे करवाएं क्योंकि यह टीबी हो सकती है।

विश्व टीबी दिवस :  टीबी से बचने के लिए समाज में जागरूकता जरूरी, इन लक्षणों की न करें अनदेखी
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हरिभूिम न्यूज : रोहतक

विश्व टीबी दिवस पर पीजीआईएमएस के छाती व श्वास रोग विभागाध्यक्ष डॉ. केबी गुप्ता ने टीबी से बचने के उपाय बताए। उनका कहना है कि समाज जागरूक हो जाए तो टीबी को पूरी तरह काबू किया जा सकता है। यह दिन टीबी करने वाले किटाणु की खोज दिवस के रूप मे मनाया जताा है। जिसके बाद 24 मार्च 1882 से टीबी का उपचार संभव हो सका।

उन्होंने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार करीब 4 हजार मौत प्रतिदिन विश्व में होती हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष की थीम घड़ी रखी गई है। सभी देशों ने निर्णय लिया है कि 2035 तक विश्व से टीबी खत्म करेंगे। डॉ. गुप्ता ने बताया कि कुछ खास समाज के वर्ग जैसे बच्चे, एचआईवी और टीबी से ग्रस्त लोग, शुगर के मरीज, धू्रमपान करने वाले मरीज, सल्म एरिया के लोगों पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके पीछे उद्देश्य है कि टीबी के हर मरीज की जांच और उसका इलाज हो।

छाती व श्वास रोग विभागाध्यक्ष डॉ. केबी गुप्ता ने बताया कि लम्बे बुखार को टायफायड मानकर अनदेखी ना करें और तुरंत बलगम टेस्ट व एक्सरे करवाएं क्योंकि यह टीबी हो सकती है। बीमारी यह फेफड़ों को प्रभावित करती है लेकिन शरीर के किसी भी अंग में हो सकती है। बीमारी संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छिकंने व थूकने से फैलती है। टीबी की बीमारी होने पर अधूरी दवाइयां और अधूरा इलाज बीमारी को लाइलाज कर देता है।

रोग के लक्षण

> लगातार दो सप्ताह से अधिक खंासी के साथ बलगम आना

> बुखार शाम को बढ़ जाना (दो सप्ताह से ऊपर)

> बलगम के साथ खून आना

> कमजोरी और थकावट महसूस होना

> भूख कम लगना

> वजन में लगातार गिरावट होना

ऐसे करें बचाव

> टीबी के रोगी लगातार व पूरा इलाज लें।

> भीड़-भाड़ से बचें, अपने आसपास का वातावरण स्वच्छ रखें

> रोगी जहां-तहां न थूकें, इससे यह बीमारी फैलती है

> खांसते व छीकतें समय रोगी रुमाल से मुंह व नाक को ढककर रखें

> रोगी को धूम्रपान, मदिरा व नशीली वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए

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