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CM Yogi Hints Changing Akbarpur Name: मुख्यमंत्री ने कहा कि शहर का नाम ऐसा है कि बार-बार बोलने में भी सोचना पड़ता है। इसका नाम लेने से मुंह का स्वाद खराब हो जाता है। निश्चिंत रहें, ये सभी चीजें बदल जाएंगी।

CM Yogi Hints Changing Akbarpur Name: उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कानपुर देहात के अकबरपुर कस्बे का नाम बदलने का संकेत दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहर का नाम ऐसा है कि बार-बार बोलने में भी सोचना पड़ता है। इसका नाम लेने से मुंह का स्वाद खराब हो जाता है। निश्चिंत रहें, ये सभी चीजें बदल जाएंगी। हमें अपने देश से उपनिवेशवाद के सभी अवशेषों को खत्म करना होगा और अपनी विरासत का सम्मान करना होगा।
 
दरअसल, सीएम योगी आदित्यनाथ प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के 'पंच प्रण' (पांच प्रतिज्ञा) के प्रति अपनी निष्ठा जता रहे थे, जिसमें भारत से गुलामी के अवशेषों को हटाना और दूसरों के बीच विरासत का सम्मान करना शामिल है। 

क्या है अकबरपुर का इतिहास?
मान्यता है कि अकबरपुर का प्राचीन नाम गुड़ईखेड़ा था। गुड़ईखेड़ा का मतलब गुणीजन के डेरे से है। कहा जाता है कि यहां पहले संगीत और अन्य कलाओं में निपुण लोग रहते थे। इसी कारण इस क्षेत्र का नाम गुड़ईखेड़ा पड़ा था। लेकिन मुगल शासन में इस क्षेत्र का नाम बदला गया। मुगल शासक अकबर के कार्यकाल में रिसालदार कुंवर सिंह ने क्षेत्र को शाहपुर अकबरपुर का नाम दिया। कुछ समय बाद नाम में फिर बदलाव हुआ। शाहपुर को हटाकर केवल अकबरपुर नाम कर दिया गया, जो मुगल शासक अकबर के नाम पर था। 

क्या हो सकता है नया नाम?
अकबरपुर का नाम बदलने की मांग पुरानी है। कई बार ज्ञापन भी दिए जा चुके हैं। अकबरपुर का नाम बदलकर अमरपुर या महाराणा प्रताप नगर किए जाने की मांग चल रही है। 

क्या है अकबरपुर लोकसभा सीट का इतिहास?
अकबरपुर लोकसभा सीट 2009 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई है। इसे कानपुर नगर और कानपुर देहात की विधानसभा सीटों को जोड़कर बनाया गया है। इसमें अकबरपुर-रनियां, बिठूर, कल्याणपुर, महाराजपुर विधानसभा सीटें आती हैं। 2009 से पहले तक इसका नाम घाटमपुर लोकसभा सीट था। इस सीट पर 13 मई को मतदान होना है। 

Yogi Adityanath
Yogi Adityanath

और किन जिलों के नाम बदलने की चल रही मांग?
अकबरपुर के अलावा राज्य के कई जिलों के नाम बदलने पर विचार चल रहा है, जिनमें अलीगढ़, आजमगढ़, शाहजहांपुर, गाजियाबाद, फिरोजाबाद, फर्रुखाबाद और मुरादाबाद शामिल हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2017 में सत्ता संभालने के बाद गुलामी के निशानों को मिटाने के मिशन पर काम शुरू किया था। इस कड़ी में राज्य में कई सड़कों, पार्कों, चौराहों और इमारतों का नाम पूर्व प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सम्मान में रखा गया है।

इसके अलावा प्रतिष्ठित मुगलसराय रेलवे स्टेशन, जो देश का चौथा सबसे व्यस्त जंक्शन है, का नाम बदलकर दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन कर दिया गया।

कुंभ से पहले इलाहाबाद का बदला नाम
2019 कुंभ मेले से ठीक पहले राज्य सरकार ने इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज कर दिया, जो शहर की ऐतिहासिक पहचान को पुनः प्राप्त करने में निहित एक कदम था। संतों का तर्क है कि इस ऐतिहासिक स्थान का मूल नाम प्रयागराज था, जिसे मुगलों ने बदलकर 'इलाहाबाद' कर दिया। इसी तरह फैजाबाद का नाम बदलकर अयोध्या कर दिया गया, और झांसी रेलवे स्टेशन का नाम भी रानी लक्ष्मी बाई के नाम पर रखा गया।

हाल ही में अलीगढ़ के नगर निकायों ने एक प्रस्ताव पारित कर शहर का नाम बदलकर हरिगढ़ करने की मांग की, जबकि फिरोजाबाद का नाम बदलकर चंद्र नगर करने का प्रस्ताव रखा गया। ऐसा ही एक प्रस्ताव मैनपुरी में भी रखा गया था, जहां जिले का नाम बदलकर मायापुरी करने की मांग की गई थी। 

माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री गुलाब देवी ने मांग की है कि उनके गृह जिले संभल का नाम बदलकर पृथ्वीराज नगर या कल्कि नगर किया जाए। बीजेपी के पूर्व विधायक देवमणि द्विवेदी ने सुल्तानपुर जिले का नाम बदलकर कुशभवनपुर करने की मांग की है। इस नगर की स्थापना भगवान राम के पुत्र कुश ने की थी। सहारनपुर की देवबंद विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक ब्रजेश सिंह ने भी देवबंद का नाम बदलकर देववृंद करने की मांग की है। 

देवबंद को इस्लामिक मदरसा दारुल उलूम के लिए जाना जाता है, लेकिन दावा किया जाता है कि प्राचीन हिंदू धर्मग्रंथों में इस जगह को देववृंद कहा गया है। इसी तरह गाजीपुर की मोहम्मदाबाद सीट से बीजेपी की पूर्व विधायक अलका राय ने गाजीपुर का नाम बदलकर गाधिपुरी या विश्वामित्रनगर करने की मांग की है। 

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