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जहां रहती थी गंदगी, वहां बसा दी हरी-भरी किसान हवेली

बहादुरगढ़ के बाईपास पर चल रहे किसान आंदोलन के दौरान मोगा जिले के किसानों ने प्रकृति प्रेम का अनुकरणीय उदाहरण पेश किया है। किसान हवेली में घास से लेकर पौधे समेत हरियाली की तमाम व्यवस्था की गई है।

जहां रहती थी गंदगी, वहां बसा दी हरी-भरी किसान हवेली
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बाईपास पर बनाई गई किसान हवेली में बैठे पंजाब के किसान

हरिभूमि न्यूज. बहादुरगढ़

हमारे आसपास कई ऐसे लोग हैं, जो प्रकृति से बेहद प्रेम करते हैं। हालांकि कई ऐसे लोग हैं, जो हमारी प्रकृति को रोज काफी नुकसान पहुंचाते हैं। शहर के बाईपास पर चल रहे किसान आंदोलन के दौरान मोगा जिले के किसानों ने प्रकृति प्रेम का अनुकरणीय उदाहरण पेश किया है। गंदगी को हटाकर वहां हरी-भरी किसान हवेली बना दी गई है। जिसमें घास से लेकर पौधे समेत हरियाली की तमाम व्यवस्था की गई है। यहां से गुजरने वाले लोग भी इन किसानों के इस प्रयास की सराहना करने से खुद को रोक नहीं पाते।

हर आदमी को कुछ खास चीजों से लगाव होता है, जिनसे उसे खुशी मिलती है। पंजाब के मोगा जिले के गांव घोलिया के सरपंच गुरसेवक बिट्टू को भी प्रकृति से बेहद लगाव है। उनके गांव के अन्य किसान भी प्रकृति प्रेमी हैं। ये लोग 30 नवंबर को बहादुरगढ़ के बाईपास पर पहुंचे थे। एक दिसंबर से ही इनके द्वारा यहां लंगर सेवा चलाई जा रही है। यहां गांव के करीब 25 लोग रह रहे हैं। इन लोगों ने बाईपास की ग्रीन बेल्ट में फैली गंदगी को साफ किया।

करीब डेढ़ सौ लोगों के ठहरने की व्यवस्था

वहां एक बड़ा टैंट, 5 बड़े टैंट और 3 छोटे टैंट लगाए। यहां पर करीब डेढ़ सौ लोगों के ठहरने की व्यवस्था तैयार की गई। इसे किसान हवेली का नाम दिया गया। इस हवेली में पूरा गार्डन बना दिया है। नई-नई किस्म के पौधे लगाए गए। इनके अनुसार किसान एक ऐसा शख्स है, जिसकी आज भी प्रकृति और परंपराओं से जुगलबंदी कायम है। यहां पर स्थित सभी लोग एक दूसरे के काम में मदद करवाते है। सफाई के बाद यहां पार्क विकसित किया गया, गमले व पौधे लगाए गए। टॉयलेट के साथ ही सेप्टिक टैंक के अलावा दो बाथरूम भी बनाए गए। यहां पानी से लेकर दूध का टैंकर भी मौजूद है।

गंदगी अच्छी नहीं लगती थी

हम यहां 30 नवंबर को आए थे, अगले दिन से यहां लंगर चला रहे हैं। सामने गंदगी थी, अच्छा नही लगा। हमनें सफाई कर हरी-भरी हवेली बना दी। किसानों का इसके माध्यम से सरकार को साफ संदेश है कि पीछे नही हटेंगे, यहीं रहेंगे, लड़ाई लड़ेंगे और जीत के जाएंगे। राजा को अपनी प्रजा का भी ध्यान रखना चाहिए। लोगों को अपना हक चाहिए, दिनों की गिनती नही करते।

- गुरसेवक बिट्टू, सरपंच घोलिया पंजाब



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