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20 साल बाद हरेली अमावस्या सोमवार को, सर्वार्थसिद्धि व पुनर्वसु नक्षत्र का संयोग भी

सन 2000 के बाद 2004 में भी बनी थी ऐसी स्थिति, लेकिन तब था अधिकमास

हरेली त्योहार पर प्रतियोगिता कराने की तैयारी में नगर निगम
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हरेली त्योहार (प्रतीकात्मक फोटो)

रायपुर. हिंदू पंचाग के अनुसार हर महीने एक अमावस्या आती है। सोमवार के दिन आने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहते हैं। सावन माह की अमावस्या को श्रावण अमावस्या या हरियाली अमावस्या के नाम से जाना जाता है।

महामाया मंदिर के पं. मनोज शुक्ला ने बताया, इस बार की अमावस्या में सर्वार्थसिद्धि योग, पुनर्वसु नक्षत्र के संयोग बन रहे हैं। यह संयोग सोलह साल बाद बना है। 16 साल बाद सावन महीना में सोमवती अमावस्या का संयोग बन रहा है। 20 साल पहले सन 2000 में सोमवती अमावस्या थी। इसके बाद 2004 में सावन महीने को पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) के रूप में मनाया गया था, यानी उस साल दो बार सावन महीना पड़ा था। दूसरे सावन महीने में सोमवती अमावस्या का संयोग बना था।

रात्रि 11 बजकर 4 मिनट तक

हरेली अमावस्या पर पूजन के लिए किसी विशेष मुहूर्त की आवश्यकता नहीं है। पूरे दिन पूजा की जा सकती है। अमावस्या तिथि 20 जुलाई को रात्रि 11 बजकर 4 मिनट तक रहेगी। इसके पूर्व हरेली पूजन होगा।

पुष्कर योग में होगी पूजा

पुष्कर योग में शिवपूजा करने से विवाह, धनधान्य, संतान और सेहत का सुख मिलता है और सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। सावन मास हरियाली का प्रतीक है। मां धरती इस समय पेड़ पौधो से हरी भरी रहती है। इसलिए इसे हरियाली अमावस्या कहा जाता है। हरियाली अमावस्या पर माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करने से उनकी कृपा बनी रहती है और वे अपने भक्ति की हर मनोकामनाएं पूरी करती है। शिवालयों सहित सभी मंदिरों में इस दिन विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। इसके लिए तैयारियां शुरु कर दी गई हैं।

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