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Haryana में मनोनीत आईएएस मामले में कानूनी पेंच, कैट का नोटिस

अब जब राज्य सरकार(State government) ने इसके लिए लिखित परीक्षा का प्रावधान रख दिया है, तो मामले को कैट में चुनौती दे दी गई है। जिसमें 14 जुलाई के लिए नोटिस भी जारी कर दिया गया है।

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मुख्यमंत्री मनोहर लाल (फाइल)

योगेंद्र शर्मा : चंडीगढ़

प्रदेश में आईएएस मनोनीत (नोमिनेट) करने का मामला (matter) एक बार फिर से पचड़े में फंसता हुआ नजर आ रहा है। वैसे, मनोहरलाल सरकार (Manohar Lal Government) पार्ट वन में भी इसकी प्रक्रिया की शुरुआत हुई थी, साथ ही दो प्रभावशाली लोगों से जुडे़ सदस्यों के नाम भी सामने आए थे। लेकिन राज्य की मनोहरलाल सरकार ने फूंक फूंककर कदम उठाते हुए उस समय मामले को टाल दिया था। हालांकि पूर्व की कांग्रेस हुड्डा सरकार के दौरान जरूर दो लोगों की ताजपोशी हो गई थी। जिसके बाद में सत्ता परिवर्तन हुआ राज्य में आईएएस नोमिनेट (मनोनीत) करने का मामला टलता ही रहा है। अब जब राज्य सरकार ने इसके लिए लिखित परीक्षा का प्रावधान रख दिया है, तो मामले को कैट में चुनौती दे दी गई है। जिसमें 14 जुलाई के लिए नोटिस भी जारी कर दिया गया है।

मामले में केंद्रीय प्रशासनिक प्राधिकरण चंडीगढ़ (सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल) की ओर से सदस्यों संजीव कौशिक और अजंता दालियान ने पूरे मामले में तुरंत सुनवाई करते हुए 14 जुलाई के लिए नोटिस जारी किया हुआ है। कुल मिलाकर आईएएस नोमिनेशन का मामला एक बार फिर लटकता हुआ नजर आ रहा है।

भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय के अस्सिटेंट प्रोफेसर अनिल बल्हारा ने भी पूरे मामले को हाई कोर्ट में चुनौती दी है। जिन्होंने यूनिवर्सिटी प्रोफेसरों को लेकर न्याय की गुहार की है। इस मामले में छह जुलाई को सुनवाई होनी तय है। कुल मिलाकर इस बार भी मामला लटकता हुआ नजर आ रहा है। नोमिनेशन मामले में भी राज्य की मनोहरलाल सरकार परीक्षा के माध्यम से चयन की पक्षधर थी ताकि पिछली सरकार की तरह से किसी भी तरह से कोई उंगली नहीं उठ सके। लेकिन अब परीक्षा को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं क्योंकि आईएएस के लिए कोई भी परीक्षा कराने का अधिकार यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन के पास ही सुरक्षित है। कमीशन की ओऱ से चयन के लिए एक व्यवस्था पहले से बनाई हुई है, इस मामले में दो आयोगों को परीक्षा कराए जाने को चुनौती देते हुए सवाल खड़े किए जा रहे हैं। यहां पर यह भी याद दिला दें कि हरियाणा में इस समय पांच पदों पर आईएएस मनोनीत किए जा सकते हैं, उम्मीद लगाए बैठे लोगों में निराशा हो रही है।

मनोहर सरकार पार्ट वन में लटका था मामला

आईएएस मनोनीत करने के मामले में मनोहर सरकार पार्ट वन में भी पचड़ा पड़ा था। जिसमें पार्ट वन सरकार के कदावर मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता की डाक्टर बेटी और एक दिग्गज आईएएस अफसर की पत्नी को मनोनीत करने को लेकर खींचतान के बीच में मामला लटक गया था।

पूर्व में हुड्डा शासनकाल में दो अधिकारी हुए थे मनोनीत

पूर्व की कांग्रेस सरकार हुड्डा के शासनकाल के दौरान आईएएस नोमिनेट करने की प्रक्रिया के तहत ही दो लोगों को मनोनीत किया गया था। जिसके बाद से अभी तक एक दशक बीत जाने के बाद खींचतान व पचड़ेबाजी के कारण नियुक्ति नहीं हो पा रही है।

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