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छत्तीसगढ़ : 'बालको' को हाईकोर्ट का झटका, लीज लेने के बाद भी चोटिया माइंस से कोयला उत्खनन क्यों नहीं?

आरटीआई एक्टिविस्ट वीरेंद्र पांडे ने बिलासपुर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर मांग की है कि बालको चोटिया से कोयला उत्खनन करे, ताकि केंद्र और राज्य सरकार को प्रीमियम व रॉयल्टी प्राप्त हो। पढ़िए पूरी खबर-

छत्तीसगढ़ : बालको को हाईकोर्ट का झटका, लीज लेने के बाद भी चोटिया माइंस से कोयला उत्खनन क्यों नहीं?
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कोरबा। जिले की चोटिया कोल माइंस से कोयला उत्खनन का कार्य बालको प्रबंधन ने कुछ वर्ष पूर्व लिया। इस माइंस को प्राप्त करने के लिए बालको प्रबंधन ने अधिकतम प्रीमियम राशि की बोली के कारण लीज पर प्राप्त किया था। कुछ दिन तक तो बालको प्रबंधन ने इस कोल माइंस से कोयला निकाला, लेकिन बाद में उसे बंद कर दिया। अब बालको प्रबंधन कोल इंडिया से कोयला खरीद रहा है। आरटीआई एक्टिविस्ट वीरेंद्र पांडे ने बिलासपुर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर मांग की है कि बालको चोटिया से कोयला उत्खनन करे, ताकि केंद्र और राज्य सरकार को प्रीमियम व रॉयल्टी प्राप्त हो।

हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र, राज्य सरकार और बालको प्रबंधन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। गौरतलब है कि बालको प्रबंधन ने भाजपा की केंद्र सरकार द्वारा कोयला खदानों की नीलामी के समय चोटिया कोल ब्लॉक को हाईएस्ट प्रीमियम पर प्राप्त किया था। प्रकाश स्पंज आयरन चांपा से खदान का आधिपत्य भी ले लिया गया। कोयले का उत्खनन शुरू भी करा दिया गया। कुछ ट्रांसपोर्टर्स को काम दे दिया गया। सब कुछ ठीक चलता रहा बालको ने कोरोना के समय से कोयले का उत्खनन बंद कर दिया। जिन ट्रांसपोर्टर्स ने बालको प्रबंधन के आश्वासन अथवा लिखित में दिए गए अधिकार पर भरोसा किया उनकी आर्थिक रूप से कमर टूट गई। बड़ी मात्रा में खरीदी गई ट्रकें खड़ी हो गईं। बालको प्रबंधन ने ऐसे ट्रांसपोर्टर्स को उनका वाजिब भुगतान भी नहीं किया। बालको प्रबंधन की यह मनमानी क्या केंद्र और राज्य सरकार की जानकारी में नही है? बहरहाल, मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। अब हाईकोर्ट को पेश किए जाने वाले जवाब से आगे तय होगा कि अदालत इस पूरे मामले पर क्या रूख अख्तियार करती है?

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