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यूपी के स्वास्थ्य क्षेत्र में पिछले 9 वर्षों में एक अभूतपूर्व 'कायाकल्प' देखने को मिला है। 'एक जिला-एक मेडिकल कॉलेज' की नीति से अत्याधुनिक तकनीकों के समावेश तक, प्रदेश सरकार ने चिकित्सा ढांचे को पूरी तरह बदल दिया है।

उत्तर प्रदेश, जो कभी अपनी विशाल जनसंख्या और पिछड़ी स्वास्थ्य सेवाओं के बोझ तले दबा था, आज देश के स्वास्थ्य मॉडल के रूप में उभर रहा है। पिछले 9 वर्षों के दौरान राज्य सरकार ने 'सक्षम स्वास्थ्य, समृद्ध प्रदेश' के मंत्र के साथ स्वास्थ्य बजट में ऐतिहासिक वृद्धि की है। 2017 से पहले जहाँ प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था केवल कुछ बड़े शहरों तक सीमित थी, वहीं आज 'एक जिला-एक मेडिकल कॉलेज' की नीति ने चिकित्सा शिक्षा और उपचार का लोकतंत्रीकरण कर दिया है।

रोबोटिक सर्जरी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी आधुनिक तकनीकों के समावेश ने यूपी को वैश्विक पटल पर ला खड़ा किया है।

चिकित्सा शिक्षा का विस्तार और 'एक जिला-एक मेडिकल कॉलेज' का संकल्प 
​उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य की चिकित्सा शिक्षा नीति में आमूलचूल परिवर्तन करते हुए हर जिले को मेडिकल कॉलेज से जोड़ने का संकल्प लगभग पूरा कर लिया है। साल 2017 से पहले प्रदेश में केवल 12-13 सरकारी मेडिकल कॉलेज थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 81 तक पहुँच गई है। इनमें से कई संचालित हैं और कुछ निर्माण के अंतिम चरण में हैं।

इस विस्तार का सबसे बड़ा लाभ यह हुआ है कि एमबीबीएस सीटों में लगभग 125% की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे प्रदेश को हर साल हजारों नए डॉक्टर मिल रहे हैं। गोरखपुर और रायबरेली में एम्स (AIIMS) का पूर्ण संचालन शुरू होने से पूर्वांचल और अवध क्षेत्र के करोड़ों लोगों को अब इलाज के लिए दिल्ली नहीं भागना पड़ता।

आयुष्मान भारत योजना: कार्ड निर्माण और उपचार में यूपी का विश्व रिकॉर्ड 
​स्वास्थ्य बीमा के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश ने पूरे देश में अपनी बादशाहत कायम की है। अप्रैल 2026 तक की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश 5.6 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड जारी कर देश में शीर्ष स्थान पर है। सरकार ने हाल ही में 70 वर्ष से अधिक आयु के सभी बुजुर्गों के लिए अलग से कार्ड बनाने की प्रक्रिया शुरू की है, जिससे लगभग 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों को सीधा लाभ मिलेगा।

अब तक 91 लाख से अधिक मरीजों ने इस योजना के तहत निजी और सरकारी अस्पतालों में ₹5 लाख तक का मुफ्त और कैशलेस इलाज प्राप्त किया है, जो अपने आप में एक विश्व कीर्तिमान है।

राजधानी लखनऊ का 'मेडिकल कैपिटल' के रूप में उदय 
​लखनऊ अब उत्तर भारत का सबसे बड़ा मेडिकल हब बन चुका है, जहाँ ऐसी अत्याधुनिक तकनीकें उपलब्ध हैं जो पहले केवल विदेशों या बहुत महंगे निजी अस्पतालों में ही संभव थीं। राम मनोहर लोहिया संस्थान (RML) अब देश के उन चुनिंदा सरकारी अस्पतालों में शामिल है जहाँ रोबोटिक सर्जरी शुरू हो चुकी है, जिससे जटिल कैंसर और यूरोलॉजी ऑपरेशन 100% सटीकता के साथ हो रहे हैं।

इसी तरह, कल्याण सिंह कैंसर संस्थान में PET-CT स्कैन और उन्नत रेडियोलॉजी की सुविधाएं शुरू होने से कैंसर मरीजों को संजीवनी मिली है। एसजीपीजीआई और केजीएमयू जैसे संस्थानों में अंग प्रत्यारोपण और इमरजेंसी मेडिसिन की क्षमताओं को कई गुना बढ़ा दिया गया है।

स्वास्थ्य विभाग में रिकॉर्ड नियुक्तियां और मानव संसाधन की मजबूती 
​ढांचे के साथ-साथ सरकार ने डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की भारी कमी को दूर करने के लिए रिकॉर्ड भर्तियां की हैं। पिछले 9 सालों में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से लगभग 11,500 से अधिक विशेषज्ञ डॉक्टरों की स्थायी नियुक्ति की गई है। 'मिशन निरामया' के तहत नर्सिंग सेवाओं को अपग्रेड करते हुए 15,000 से अधिक स्टाफ नर्सों और हजारों लैब टेक्नीशियन की नियुक्तियां की गई हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 35,000 से अधिक कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्स (CHO) तैनात किए गए हैं, जो 'आयुष्मान आरोग्य मंदिर' के माध्यम से सीधे ग्राम स्तर पर प्राथमिक उपचार सुनिश्चित कर रहे हैं।

संक्रामक रोगों पर नियंत्रण और 'यूपी मॉडल' की वैश्विक पहचान 
उत्तर प्रदेश ने स्वास्थ्य क्षेत्र में अपनी सबसे बड़ी जीत जापानी इंसेफेलाइटिस (दिमागी बुखार) पर नियंत्रण पाकर दर्ज की है। गोरखपुर और बस्ती मंडल में दिमागी बुखार से होने वाली मौतों में 96% तक की ऐतिहासिक कमी आई है। सरकार के 'दस्तक अभियान' और सघन टीकाकरण की रणनीति की सराहना विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी वैश्विक स्तर पर की है। इसके अलावा, राज्य के सभी 75 जिलों में अब मुफ्त डायलिसिस और सीटी स्कैन की सुविधा उपलब्ध है, जिससे गरीब मरीजों का आर्थिक बोझ काफी कम हुआ है।

उपलब्धियों का संक्षिप्त सारांश:-

  • ​मेडिकल कॉलेज: 81 (2017 में मात्र 12 थे)।
  • ​आयुष्मान कार्ड: 5.60 करोड़ से अधिक (देश में नंबर-1)।
  • ​मानव संसाधन: 11,500+ विशेषज्ञ डॉक्टर और 35,000+ CHO नियुक्त।
  • ​तकनीकी नवाचार: रोबोटिक सर्जरी (RML), AI क्लिनिक (GIMS), PET-CT स्कैन (KSSSCI)।
  • ​इंसेफेलाइटिस नियंत्रण: मौतों के आंकड़ों में 96% की भारी गिरावट।
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