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यूपी में पिछले 9 वर्षों में कृषि और सहकारिता क्षेत्र का पूरी तरह कायाकल्प हो चुका है। गन्ने के ₹3 लाख करोड़ के रिकॉर्ड भुगतान, नलकूपों के लिए मुफ्त बिजली और सहकारी समितियों के डिजिटल होने से प्रदेश के 2.62 करोड़ किसानों के जीवन में समृद्धि आई है।

उत्तर प्रदेश में पिछले 9 वर्षों का कार्यकाल प्रदेश के किसानों के लिए बदलाव और आर्थिक सशक्तिकरण का दौर रहा है। साल 2017 से लेकर 2026 तक, राज्य सरकार ने पारंपरिक खेती से लेकर आधुनिक सहकारिता ढांचे तक, हर स्तर पर बड़े सुधार लागू किए हैं।

गन्ने के रिकॉर्ड भुगतान से लेकर मोटे अनाज को वैश्विक पहचान दिलाने और सहकारी समितियों को डिजिटल बनाकर भ्रष्टाचार मुक्त करने तक, उत्तर प्रदेश आज देश के कृषि मानचित्र पर एक आदर्श राज्य बनकर उभरा है। सरकार की 'सहकार से समृद्धि' और 'अन्नदाता की आय दोगुनी' करने की नीतियों ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा प्रदान की है।

​पिछले 9 वर्षों में गन्ना किसानों के लिए सबसे बड़ी राहत उनके बकाया भुगतान और गन्ना मूल्य में वृद्धि के रूप में आई है। योगी सरकार ने अपने अब तक के कार्यकाल में गन्ना किसानों को लगभग ₹2.50 लाख करोड़ से ₹3 लाख करोड़ के बीच का ऐतिहासिक भुगतान सुनिश्चित किया है।

गन्ने के राज्य परामर्शित मूल्य में समय-समय पर बढ़ोतरी करते हुए इसे ₹400 प्रति क्विंटल तक पहुँचाया गया है। इसके अलावा, राज्य को देश का सबसे बड़ा एथेनॉल उत्पादक बनाकर चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति में सुधार किया गया, जिसका सीधा लाभ किसानों को समय पर भुगतान के रूप में मिल रहा है।

​चीनी उत्पादन में उत्तर प्रदेश की धाक जमाने के लिए बंद पड़ी मिलों को दोबारा शुरू करना सरकार की प्राथमिकता रही। पिछले 9 सालों में मुंडेरवा और पिपराइच जैसी आधुनिक तकनीक वाली नई चीनी मिलें स्थापित की गईं। इसके साथ ही, लगभग आधा दर्जन ऐसी मिलों को फिर से शुरू किया गया जो दशकों से बंद पड़ी थीं।

सरकार ने 42 से अधिक मिलों की पेराई क्षमता का विस्तार किया और 122 मिलों के संचालन को सुचारु बनाया, जिससे किसानों को अपना गन्ना बेचने के लिए भटकना न पड़े।

​सहकारिता विभाग के ढांचे में पिछले 9 वर्षों में आमूलचूल परिवर्तन आया है। विभाग अब केवल खाद-बीज वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण विकास का केंद्र बन गया है। प्रदेश की 5,686 प्राथमिक कृषि ऋण समितियों के कंप्यूटरीकरण की प्रक्रिया तेज की गई है।

इन समितियों को अब 'बहुउद्देशीय पैक्स' (B-PACS) के रूप में विकसित कर वहां जन औषधि केंद्र, कॉमन सर्विस सेंटर और एलपीजी वितरण जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। हालिया सदस्यता अभियान के जरिए 10 लाख से अधिक नए सदस्यों को जोड़कर सहकारिता को एक जन-आंदोलन का रूप दिया गया है।

​पारंपरिक फसलों के साथ-साथ सरकार ने मोटे अनाज जैसे बाजरा, ज्वार और मक्का की खेती को बढ़ावा देने के लिए 'मिलेट्स पुनरुद्धार कार्यक्रम' चलाया। पहली बार मोटे अनाज की बड़े पैमाने पर सरकारी खरीद सुनिश्चित की गई और इसे सरकारी राशन व मिड-डे मील का हिस्सा बनाया गया।

सब्जी किसानों के लिए इंडो-इजरायल तकनीक आधारित उत्कृष्टता केंद्र बनाए गए और ड्रिप सिंचाई पर भारी सब्सिडी देकर उनकी लागत कम की गई। आलू किसानों के लिए विशेष एमएसपी घोषित करना सरकार के संवेदनशील दृष्टिकोण को दर्शाता है।

​किसानों की लागत कम करने की दिशा में सबसे बड़ा कदम निजी नलकूपों के लिए 100% मुफ्त बिजली की घोषणा रही है। इसके साथ ही, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के जरिए प्रदेश के 2.62 करोड़ किसानों को सीधे बैंक खातों में आर्थिक मदद पहुँचाई जा रही है।

भंडारण की समस्या को खत्म करने के लिए सहकारी क्षेत्र में 'विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना' के तहत गांव-गांव गोदामों का निर्माण कराया जा रहा है, ताकि किसान अपनी उपज का सही मूल्य मिलने तक उसे सुरक्षित रख सके।

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