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उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछले 9 वर्षों में गन्ना किसानों को ₹3 लाख करोड़ तक का रिकॉर्ड भुगतान कर कृषि क्षेत्र में नया इतिहास रचा है।

​उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने पिछले 9 वर्षों के दौरान कृषि और किसान कल्याण के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। सरकार की नीतियों ने न केवल गन्ना किसानों को बकाये की मुक्ति दिलाई, बल्कि पारंपरिक खेती से हटकर सब्जी और मोटे अनाज उगाने वाले किसानों को भी वैश्विक बाजार से जोड़ा है।

₹36,000 करोड़ की कर्जमाफी से शुरू हुआ यह सफर आज मुफ्त बिजली, रिकॉर्ड एमएसपी खरीद और एथेनॉल इकोनॉमी के जरिए किसानों की आय को दोगुना करने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। यह रिपोर्ट यूपी के कृषि क्षेत्र में आए उन बुनियादी बदलावों का विस्तृत खाका पेश करती है।

​गन्ना किसानों के लिए ऐतिहासिक उपलब्धियां: भुगतान और सम्मान

​पिछले 9 वर्षों में उत्तर प्रदेश सरकार ने गन्ना किसानों को लगभग ₹2.50 लाख करोड़ से ₹3 लाख करोड़ के बीच का कुल भुगतान सुनिश्चित किया है, जो देश के किसी भी राज्य द्वारा किया गया अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है।

  • बकाया मुक्ति: पेराई सत्र शुरू होने से पहले पिछले बकाये को निपटाने की सख्त नीति से किसानों की आर्थिक सुरक्षा बढ़ी है।
  • SAP में वृद्धि: 2017 से अब तक गन्ने के राज्य परामर्शित मूल्य में लगभग ₹85 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है। हालिया 2025-26 सत्र के लिए अगेती प्रजाति का मूल्य ₹400 प्रति क्विंटल पहुँचाया गया है।

​चीनी मिलों का कायाकल्प: नई मिलें और आधुनिकीकरण

​सरकार ने केवल पुरानी मिलों को ही नहीं संभाला, बल्कि नए कारखाने भी स्थापित किए:-

  • नई शुरुआत: गोरखपुर की पिपराइच और बस्ती की मुंडेरवा जैसी 5 नई अत्याधुनिक चीनी मिलें शुरू की गईं, जो सल्फर-मुक्त चीनी और बिजली का उत्पादन भी कर रही हैं।
  • पुनरुद्धार: सीतापुर की कमलापुर जो 17 साल से बंद था और बागपत की रमाला जैसी करीब 7 बंद पड़ी मिलों को दोबारा जीवित किया गया।
  • एथेनॉल इकोनॉमी: यूपी आज देश का सबसे बड़ा एथेनॉल उत्पादक है। 100 से अधिक मिलों में एथेनॉल प्लांट लगने से मिलों की नकदी स्थिति सुधरी है और भुगतान समय पर हो रहा है।

​अन्नदाता के लिए बड़े सुधार: कर्जमाफी से लेकर मुफ्त बिजली तक

​सरकार ने खेती की लागत कम करने और किसानों को सीधा आर्थिक लाभ पहुँचाने के लिए कई बड़े निर्णय लिए:

  • सम्मान निधि और ऋण माफी: ₹36,000 करोड़ की ऋण माफी के साथ-साथ यूपी पीएम-किसान निधि के क्रियान्वयन में नंबर-1 है। 2.62 करोड़ किसानों को सीधे डीबीटी (DBT) के जरिए किश्तें मिल रही हैं।
  • मुफ्त सिंचाई: निजी नलकूपों के लिए 100% मुफ्त बिजली देने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। साथ ही बाणसागर और सरयू नहर जैसी दशकों से अधूरी परियोजनाओं को पूरा कर लाखों हेक्टेयर नई भूमि तक पानी पहुँचाया गया।

​मंडी सुधार और पारदर्शी खरीद व्यवस्था

​बिचौलियों का अंत करने के लिए सरकार ने खरीद प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाया है:-

  • ​ई-पॉप (e-PoS) मशीनें: गेहूं और धान की खरीद के लिए ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य किया गया, जिससे पैसा सीधे किसान के खाते में पहुँचा।
  • मंडी आधुनिकीकरण: दलहन और तिलहन की खरीद के लिए नए केंद्र बने और मंडियों के बुनियादी ढांचे को स्मार्ट बनाया गया।

​सब्जी किसानों के लिए तकनीक और सब्सिडी का कवच

​पारंपरिक फसलों के अलावा सब्जी उत्पादकों को भी विशेष प्रोत्साहन दिया गया है:

  • उत्कृष्टता केंद्र: इंडो-इजरायल तकनीक पर आधारित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से किसानों को हाइब्रिड बीज और पौधे मिल रहे हैं।
  • भारी अनुदान: पॉली हाउस और नेट हाउस (संरक्षित खेती) के लिए 50% से 80% तक सब्सिडी दी जा रही है। सूक्ष्म सिंचाई के लिए भी ₹2,200 करोड़ का भारी-भरकम बजट रखा गया है।
  • कोल्ड चेन: आलू और सब्जियों के लिए कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं का विस्तार किया गया है ताकि फसल खराब न हो।

​'श्री अन्न' (मोटे अनाज) का पुनरुद्धार और वैश्विक ब्रांडिंग

​प्रधानमंत्री के आह्वान पर यूपी ने मोटे अनाज की खेती को एक आंदोलन का रूप दिया है:

  • मिलेट्स पुनरुद्धार कार्यक्रम: बाजरा, ज्वार और मक्का की एमएसपी पर रिकॉर्ड खरीद की जा रही है। किसानों को मुफ्त 'बीज मिनीकिट' दिए जा रहे हैं।
  • निश्चित बाजार: मोटे अनाज को मिड-डे मील और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) राशन में शामिल किया गया है, जिससे किसानों को सीधा बाजार मिला है।
  • ब्रांडिंग: 'श्री अन्न' के रूप में ब्रांडिंग और किसान पाठशालाओं के माध्यम से बुंदेलखंड जैसे शुष्क क्षेत्रों को मिलेट्स हब के रूप में विकसित किया जा रहा है।

​खेती में तकनीक और जैविक खेती का नया कॉरिडोर

​आधुनिक खेती के लिए सरकार मशीनीकरण और प्राकृतिक तरीकों पर जोर दे रही है:

  • नमो ड्रोन दीदी: खेती में ड्रोन तकनीक और कृषि यंत्रों पर बड़ी सब्सिडी दी जा रही है।
  • गंगा कॉरिडोर: गंगा के किनारों पर 5 किलोमीटर के दायरे में जैविक और प्राकृतिक खेती का कॉरिडोर विकसित किया गया है, जिससे रसायनों का खर्च कम हुआ है और उत्पादों की कीमत बढ़ी है।
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