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आशुतोष ब्रह्मचारी ने उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक पर अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए ब्राह्मणों के अपमान का आरोप लगाया है।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक एक नए विवाद में घिर गए हैं। विवाद की जड़ प्रयागराज के माघ मेले के दौरान शंकराचार्य अवि मुक्तेश्ववरानन्द का वह धरना है, जिसने काफी सुर्खियां बटोरी थीं। आशुतोष ब्रह्मचारी ने अब सीधे तौर पर डिप्टी सीएम के खिलाफ लखनऊ के थाने में शिकायत दर्ज कराई है।

आरोप बेहद गंभीर हैं- आशुतोष ब्रह्मचारी का दावा है कि जब शंकराचार्य का धरना खत्म होने वाला था, तब ब्रजेश पाठक ने पर्दे के पीछे से खेल किया। उन्होंने कथित तौर पर शंकराचार्य के सहयोगी को फोन कर निर्देश दिया कि धरना अभी खत्म न किया जाए, बल्कि उनके प्रयागराज पहुँचने तक इसे जारी रखा जाए।

​शंकराचार्य के सहयोगी को फोन: क्या था डिप्टी सीएम का मकसद? 
आशुतोष ब्रह्मचारी ने अपनी शिकायत में विस्तार से बताया है कि ब्रजेश पाठक ने शंकराचार्य के बेहद करीबी और सहयोगी को फोन किया था। आरोप है कि डिप्टी सीएम अपनी "सियासी चमक" बिखेरने के लिए इस धरने का इस्तेमाल करना चाहते थे।

आशुतोष ब्रह्मचारी का कहना है कि जब मामला सुलझने की कगार पर था, तब पाठक ने फोन कर कहा कि धरना तब तक न हटाया जाए जब तक वे खुद मौके पर पहुँच कर "क्रेडिट" न ले लें। इसी एक फोन कॉल ने माघ मेले के शांत माहौल को विवादों में बदल दिया।

​प्रयागराज पहुंचने का इंतज़ार और बढ़ गया विवाद 
शिकायत के अनुसार, ब्रजेश पाठक चाहते थे कि वे प्रयागराज पहुँचें और उनकी मौजूदगी में धरना समाप्त हो, ताकि वे खुद को संतों के सबसे बड़े हितैषी के रूप में पेश कर सकें। आशुतोष ब्रह्मचारी ने इसे संतों की मर्यादा और धर्म के साथ खिलवाड़ बताया है।

उनका आरोप है कि निजी राजनैतिक स्वार्थ के लिए एक पवित्र आयोजन और शंकराचार्य जैसे उच्च पद की गरिमा को दांव पर लगाया गया। ब्रह्मचारी ने मांग की है कि इस फोन कॉल की जांच हो और डिप्टी सीएम के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

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