उत्तर प्रदेश के नोएडा में हाल ही में हुई हिंसा को लेकर पुलिस ने एक सनसनीखेज खुलासा किया है। नोएडा पुलिस के अनुसार, इस हिंसा की पटकथा स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि सरहद पार पाकिस्तान में लिखी गई थी।
जांच में सामने आया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' के जरिए लोगों की भावनाओं को भड़काने और शहर का माहौल खराब करने के लिए पाकिस्तानी हैंडलर्स का इस्तेमाल किया गया।
पुलिस की तकनीकी जांच में दो सोशल मीडिया हैंडल की पहचान की गई है, जिन्होंने 13 अप्रैल 2026 को नोएडा हिंसा के दौरान भ्रामक और नफरत भरे पोस्ट साझा किए थे।
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नोएडा पुलिस का दावा है कि ये दोनों अकाउंट पाकिस्तान से ऑपरेट किए जा रहे थे। इन पोस्ट्स का एकमात्र मकसद लोगों के बीच भय पैदा करना, अफवाहें फैलाना और कानून-व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त करना था। इन भ्रामक सूचनाओं के कारण ही गौतमबुद्धनगर के कई इलाकों में आक्रोश फैल गया और स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि इन हैंडल्स को संचालित करने वाले लोग बेहद शातिर थे। वे अपनी लोकेशन और आईपी एड्रेस छिपाने के लिए VPN का इस्तेमाल कर रहे थे।
हालांकि, नोएडा पुलिस की साइबर सेल और तकनीकी विशेषज्ञों ने कड़ी मशक्कत के बाद उनकी वास्तविक लोकेशन को ट्रैक किया, जो पाकिस्तान में पाई गई। पुलिस का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब इन खातों द्वारा भारत में हिंसा भड़काने की कोशिश की गई है; इससे पहले भी ये संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त पाए गए थे।
पाकिस्तानी हैंडलर्स द्वारा किए गए इन पोस्ट्स का असर जमीन पर भी देखने को मिला। 13 अप्रैल को अचानक उग्र भीड़ सड़कों पर उतर आई। भीड़ ने न केवल पुलिस पर पथराव किया, बल्कि सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को भी निशाना बनाया। हिंसा के दौरान कई वाहनों में तोड़फोड़ की गई और आगजनी की घटनाएं सामने आईं।
पुलिस ने स्थिति को संभालने के लिए बल प्रयोग किया, लेकिन तब तक काफी नुकसान हो चुका था। इस मामले को लेकर नोएडा के थाना सेक्टर-20 में गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
रिपोर्ट में एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। आरोप है कि कुछ असामाजिक तत्वों ने मध्य प्रदेश की एक पुरानी घटना को नोएडा में चल रहे श्रम विरोध प्रदर्शनों से जोड़कर वायरल कर दिया।










