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IIT इंदौर ने Environmental Economics और Sustainable Engineering में देश का पहला BTech प्रोग्राम लॉन्च किया है। जानें एडमिशन प्रोसेस, सीटें और करियर स्कोप।

इंदौर। भारत में पहली बार IIT स्तर पर ऐसा BTech कोर्स शुरू होने जा रहा है, जो सीधे जलवायु परिवर्तन और ग्रीन इकॉनमी से जुड़ा है। IIT इंदौर ने Environmental Economics और Sustainable Engineering में नया प्रोग्राम लॉन्च किया है।

इसे देश के सभी आईआईटी में अपनी तरह का पहला अंडरग्रेजुएट कोर्स माना जा रहा है। इसका उद्देश्य जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए विशेषज्ञ तैयार करना है। यह कार्यक्रम जुलाई 2026 से शुरू होगा। इसमें 30 छात्रों को जेईई एडवांस के माध्यम से चयनित किया जाएगा।

यह कोर्स खास तौर पर उन छात्रों के लिए फायदेमंद होगा जो Climate Change, Sustainability और Policy Making में करियर बनाना चाहते हैं।

क्लाइमेट साइंस और इकोनॉमिक्स का संगम 
इस कोर्स की सबसे खास बात इसका इंटरडिसिप्लिनरी स्वरूप है। इसमें क्लाइमेट साइंस और पर्यावरण अर्थशास्त्र को एक साथ जोड़ा गया है। आमतौर पर ये विषय अलग-अलग पढ़ाए जाते हैं, लेकिन यहां इन्हें एकीकृत किया गया है। छात्रों को तकनीकी और आर्थिक दोनों दृष्टिकोण से प्रशिक्षित किया जाएगा।

इससे वे नीतिगत फैसलों में भी योगदान दे सकेंगे। कोर्स का डिजाइन इस तरह तैयार किया गया है कि सिद्धांत और व्यवहार दोनों पर समान जोर हो। यह छात्रों को वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए सक्षम बनाएगा।

तीन प्रमुख क्षेत्रों पर आधारित होगा पाठ्यक्रम 
इस प्रोग्राम को तीन मुख्य हिस्सों में विभाजित किया गया है। पहला भाग पर्यावरण अर्थशास्त्र और नीति से संबंधित होगा। दूसरा ऊर्जा प्रणाली और बैटरी टेक्नोलॉजी पर केंद्रित रहेगा। तीसरा जल संसाधन और जलवायु प्रणाली से जुड़ा होगा। इन सभी क्षेत्रों को आपस में जोड़कर पढ़ाया जाएगा।

इससे छात्रों को व्यापक और व्यावहारिक समझ विकसित करने में मदद मिलेगी। कोर्स में थ्योरी के साथ प्रोजेक्ट आधारित सीखने पर भी जोर रहेगा।

इंडस्ट्री सहयोग व प्रैक्टिकल अनुभव पर फोकस 
इस कोर्स में केवल कक्षा आधारित पढ़ाई ही नहीं होगी, बल्कि व्यावहारिक अनुभव भी दिया जाएगा। छात्रों को इंडस्ट्री से जुड़ने के अवसर मिलेंगे। इंटर्नशिप के जरिए वे वास्तविक प्रोजेक्ट्स पर काम कर सकेंगे। इनमें रिन्यूएबल एनर्जी, मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्र शामिल होंगे।

डेटा आधारित निर्णय, सिस्टम मॉडलिंग और पर्यावरण निगरानी जैसे कौशल भी सिखाए जाएंगे। इससे छात्र शुरुआत से ही प्रोफेशनल माहौल के लिए तैयार होंगे। उद्योग और शिक्षा के बीच तालमेल इस कोर्स की बड़ी खासियत है।

भविष्य की जरूरतों के अनुसार तैयार किया कोर्स 
आईआईटी इंदौर के निदेशक के अनुसार, यह कोर्स समय की जरूरत को ध्यान में रखकर बनाया गया है। जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए विशेषज्ञों की मांग बढ़ रही है। यह प्रोग्राम ऐसे पेशेवर तैयार करेगा जो विज्ञान और नीति के बीच की दूरी को कम कर सकें।

कोर्स को अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की मदद से विकसित किया गया है। इससे इसकी गुणवत्ता और उपयोगिता और बढ़ जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारत में ग्रीन जॉब्स को बढ़ावा देगी। यह कोर्स छात्रों के लिए नए करियर अवसर भी खोल सकता है।

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