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बागेश्वर धाम जन सेवा समिति को केंद्र सरकार से एफसीआरए मंजूरी मिल गई है, जिससे अब संस्था विदेशों से भी दान स्वीकार कर सकेगी। इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संस्था का दायरा बढ़ने की संभावना है। सामाजिक व धार्मिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

छतरपुर। बागेश्वर धाम से जुड़ी संस्था को केंद्र सरकार से एक महत्वपूर्ण अनुमति मिल गई है। गृह मंत्रालय ने विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) के तहत इसे मंजूरी प्रदान की है। इस फैसले के बाद बागेश्वर धाम जन सेवा समिति अब विदेशों से भी आर्थिक सहयोग ले सकेगी। अब तक संस्था केवल देश के भीतर से ही दान स्वीकार कर पाती थी। नई अनुमति मिलने के बाद इसका दायरा अंतरराष्ट्रीय स्तर तक बढ़ जाएगा। विदेशों में रहने वाले भक्त भी अब आधिकारिक रूप से योगदान कर सकेंगे। इससे संस्था की गतिविधियों और योजनाओं के विस्तार की संभावनाएं मजबूत होंगी।

क्या होता है एफसीआरए कानून?
एफसीआरए एक ऐसा कानून है जो विदेशी फंड के उपयोग को नियंत्रित करता है। इसके तहत किसी भी संस्था को विदेश से धन लेने के लिए पंजीकरण अनिवार्य होता है। बिना इस अनुमति के विदेशी चंदा लेना अवैध माना जाता है। सरकार यह सुनिश्चित करती है कि फंड का उपयोग पारदर्शी तरीके से हो। बागेश्वर धाम जन सेवा समिति को इसी कानून के तहत रजिस्ट्रेशन मिला है। यह पंजीकरण संस्था को विभिन्न सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों के लिए धन लेने की अनुमति देता है। इससे संस्था की कार्यप्रणाली और फंडिंग अब अधिक व्यवस्थित हो सकेगी।

तेजी से बढ़ रही संस्था की लोकप्रियता  
बागेश्वर धाम के प्रमुख पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री हाल के वर्षों में काफी चर्चा में रहे हैं। उनके कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं और उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। देश ही नहीं, विदेशों में भी उनके अनुयायियों की संख्या बढ़ रही है। ऐसे में विदेशी फंडिंग की अनुमति संस्था के लिए एक बड़ा अवसर मानी जा रही है। इससे संस्था अपनी गतिविधियों को और व्यापक स्तर पर संचालित कर सकेगी। सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रमों को विस्तार देने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही नए प्रोजेक्ट शुरू करने की राह भी आसान होगी।

कुल 38 संस्थाओं को  मिली है मंजूरी
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, 15 अप्रैल तक कुल 38 संस्थाओं को एफसीआरए पंजीकरण दिया गया है। इनमें बागेश्वर धाम जन सेवा समिति भी शामिल है। यह सभी संस्थाएं अब विदेश से दान प्राप्त करने के लिए अधिकृत हो गई हैं। मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित इस संस्था को कई श्रेणियों में पंजीकृत किया गया है। इनमें सांस्कृतिक, सामाजिक, शैक्षिक, आर्थिक और धार्मिक गतिविधियां शामिल हैं। इस मंजूरी के बाद संस्था के संसाधनों में बढ़ोतरी होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे क्षेत्रीय विकास कार्यों को भी गति मिल सकती है।

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