मिडिल-ईस्ट में जारी महायुद्ध के बीच कूटनीति की सबसे बड़ी हलचल पाकिस्तान और ईरान के बीच देखने को मिल रही है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर एक हाई-लेवल डेलिगेशन के साथ अचानक ईरान की राजधानी तेहरान पहुंच गए हैं।
यह दौरा उस वक्त हो रहा है जब इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई करीब 21 घंटे की मैराथन बातचीत बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई थी। आसिम मुनीर के साथ पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी भी इस डेलिगेशन का हिस्सा हैं। माना जा रहा है कि मुनीर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक विशेष और 'अंतिम' शांति प्रस्ताव लेकर तेहरान पहुँचे हैं।
मध्यस्थ की भूमिका में पाकिस्तान: 21 घंटे की चर्चा का अगला पड़ाव
इस्लामाबाद में हाल ही में वाशिंगटन और तेहरान के बीच दशकों की सबसे हाई-लेवल बातचीत हुई थी। हालांकि, उस चर्चा में कोई आधिकारिक समझौता नहीं हो पाया, लेकिन बातचीत के दरवाजे पूरी तरह बंद भी नहीं हुए।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाक़ाई ने पुष्टि की है कि रविवार को ईरानी डेलिगेशन के तेहरान लौटने के बाद से ही पाकिस्तान के जरिए लगातार संदेशों का आदान-प्रदान हो रहा है। आसिम मुनीर की इस यात्रा का मुख्य मकसद दोनों पक्षों के बीच कड़वाहट को कम करना और बातचीत के अगले दौर के लिए जमीन तैयार करना है।
ट्रंप के मिले-जुले संकेत: "अगले दो दिनों में कुछ बड़ा हो सकता है"
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरे घटनाक्रम पर बेहद सस्पेंस भरा बयान दिया है। उन्होंने फॉक्स न्यूज़ को दिए एक इंटरव्यू में कहा, "अगले दो दिनों में कुछ बड़ा हो सकता है, बातचीत के लिए पाकिस्तान लौटने की पूरी संभावना है।"
ट्रंप ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर की भूमिका की जमकर तारीफ की और उन्हें इस बातचीत को मुमकिन बनाने के लिए 'शानदार' बताया। ट्रंप ने यहाँ तक संकेत दिया कि यह युद्ध अपने अंत के बहुत करीब हो सकता है। हालांकि, कूटनीतिक हलचल के बीच पेंटागन ने मिडिल-ईस्ट में 10 हजार अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती कर दबाव भी बरकरार रखा है।
ईरान की 'रेड लाइन्स': "दबाव में नहीं होगा कोई समझौता"
तेहरान पहुँचने पर ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया, लेकिन साथ ही अपनी शर्तों को भी दोहराया। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह कुछ 'रेड लाइन्स' से पीछे नहीं हटेगा।
इस्माइल बाक़ाई ने कड़े शब्दों में कहा कि यूरेनियम संवर्धन का अधिकार निर्विवाद है और परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग का अधिकार दबाव या युद्ध के जरिए छीना नहीं जा सकता। ईरान ने संकेत दिया है कि वह संवर्धन के 'स्तर' और 'प्रकार' पर चर्चा के लिए तैयार हो सकता है, लेकिन पूरी तरह सरेंडर करना उसे मंजूर नहीं है।
मिशन का लक्ष्य: क्या मान जाएगा ईरान?आसिम मुनीर का यह दौरा केवल एक औपचारिक मुलाकात नहीं, बल्कि एक 'संकट मोचक' की भूमिका है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करे और मिसाइल परीक्षणों पर रोक लगाए। वहीं, ईरान की मांग है कि उस पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हटाए जाएं और युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा दिया जाए।
रिपोर्ट के मुताबिक, मुनीर यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या कोई ऐसा 'मिडल ग्राउंड' संभव है जो दोनों पक्षों को मंजूर हो।
अगर आसिम मुनीर का यह 'मैसेंजर मिशन' सफल होता है, तो मिडिल-ईस्ट में जल्द ही सीजफायर देखने को मिल सकता है।
लेकिन यदि ईरान ने ट्रंप की कड़ी शर्तों को मानने से इनकार कर दिया, तो क्षेत्र में तनाव एक नए और घातक स्तर पर पहुँच सकता है। पूरी दुनिया की नजरें अब तेहरान से आने वाले अगले 48 घंटों के बयानों पर टिकी हैं।










