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सीएम योगी के 9 वर्षों में यूपी की 'आधी आबादी' की तस्वीर बदल गई है। सुरक्षा के इंतजामों, पुलिस भर्ती में रिकॉर्ड भागीदारी और आर्थिक स्वावलंबन की योजनाओं ने प्रदेश की महिलाओं को सशक्त बनाया है।

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार के पिछले 9 वर्षों का कार्यकाल महिला सशक्तिकरण के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हुआ है। 'सुरक्षा, स्वावलंबन और सम्मान' के त्रिसूत्रीय मंत्र पर चलते हुए सरकार ने सड़क से लेकर सदन तक और गांव की चौपाल से लेकर खेल के मैदान तक महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की है।

इन 9 सालों में न केवल पुलिस बल में महिलाओं की संख्या चार गुना बढ़ी है, बल्कि साढ़े चार लाख से अधिक बेटियों के हाथ पीले करने से लेकर लाखों महिलाओं को 'लखपति दीदी' बनाने तक का सफर तय किया गया है। मिशन शक्ति जैसे अभियानों ने जहां बेटियों को निडर बनाया है, वहीं कन्या सुमंगला और सामूहिक विवाह जैसी योजनाओं ने गरीब परिवारों के आर्थिक बोझ को कम किया है।

आज उत्तर प्रदेश की बेटियां न केवल प्रशासनिक सेवाओं में बल्कि अंतरराष्ट्रीय खेल स्पर्धाओं में भी प्रदेश का मान बढ़ा रही हैं, जिन्हें सरकार ने राजपत्रित पदों पर सीधी नियुक्तियां देकर सम्मानित किया है।

मिशन शक्ति: सुरक्षा और आत्मरक्षा का नया सुरक्षा कवच 
योगी सरकार ने 2020 में 'मिशन शक्ति' का आगाज़ किया था, जो आज अपने पांचवें चरण में है। इस अभियान के तहत प्रदेश के सभी 1531 थानों में 'महिला हेल्प डेस्क' स्थापित की गई है, जहाँ केवल महिला पुलिसकर्मी ही तैनात रहती हैं ताकि पीड़ित महिलाएं बिना झिझक अपनी बात कह सकें।

साल 2026 की नई पहल के अनुसार, माध्यमिक स्कूलों में 'शक्ति मंच' का गठन किया गया है, जहाँ छात्राओं को आत्मरक्षा का विशेष प्रशिक्षण और स्वास्थ्य जागरूकता दी जा रही है। इसके साथ ही 'सेफ सिटी प्रोजेक्ट' के जरिए लखनऊ समेत 17 नगर निगमों को सीसीटीवी और पिंक बूथों से लैस कर पूरी तरह सुरक्षित बनाया गया है।

यूपी पुलिस में रिकॉर्ड भर्ती और 20% आरक्षण का लाभ 
पिछले 9 वर्षों में उत्तर प्रदेश पुलिस का चेहरा पूरी तरह बदल चुका है। 2017 से पहले जहां पुलिस विभाग में महिला कर्मियों की संख्या मात्र 10,000 के करीब थी, वह अब बढ़कर 40,000 के पार पहुँच गई है। सरकार ने हालिया भर्तियों में महिलाओं के लिए 20% सीटें आरक्षित की हैं, जिससे पुलिस बल में बेटियों की भागीदारी निरंतर बढ़ रही है।

इसके अलावा, प्रदेश में पहली बार तीन विशेष महिला पीएसी (PAC) बटालियन की स्थापना लखनऊ, बदायूं और गोरखपुर में की गई है। महिला पुलिसकर्मियों को 'पिंक पेट्रोल' के तहत दोपहिया और चार पहिया वाहन उपलब्ध कराए गए हैं ताकि वे प्रभावी ढंग से गश्त कर सकें।

लखपति दीदी योजना: आर्थिक स्वावलंबन की नई इबारत 
ग्रामीण महिलाओं को उद्यमी बनाने के उद्देश्य से 'लखपति दीदी' योजना ने प्रदेश में कमाल का प्रदर्शन किया है। अब तक यूपी में 17.09 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं, जिनकी व्यक्तिगत वार्षिक आय 1 लाख रुपये से अधिक है।

सरकार का लक्ष्य 2026-27 तक इस आंकड़े को 28.92 लाख तक पहुँचाने का है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं अब स्थानीय उत्पादों का निर्माण और व्यापार कर रही हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उनका योगदान कई गुना बढ़ गया है।

मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना: जन्म से स्नातक तक का साथ 
बेटियों की शिक्षा और उनके बेहतर भविष्य के लिए मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना एक सुरक्षा चक्र की तरह काम कर रही है। अब तक 17.82 लाख से अधिक बेटियां इस योजना का लाभ ले चुकी हैं। सरकार ने इस योजना की कुल राशि को बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया है, जो बेटी के जन्म, टीकाकरण, पहली कक्षा में प्रवेश, नौवीं कक्षा में प्रवेश और फिर स्नातक में प्रवेश करने जैसे विभिन्न चरणों में सीधे बैंक खाते में प्रदान की जाती है। इसने समाज में बेटियों के प्रति सोच बदलने और लिंगानुपात में सुधार लाने में बड़ी भूमिका निभाई है।

मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना: 4.50 लाख बेटियों के हाथ हुए पीले 
गरीब परिवारों के लिए बेटी का विवाह अब आर्थिक बोझ नहीं रह गया है। पिछले 9 वर्षों में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के माध्यम से 4.50 लाख से अधिक बेटियों का विवाह पूरी भव्यता के साथ संपन्न कराया गया है। सरकार प्रति जोड़े पर 51,000 रुपये खर्च करती है, जिसमें से 35,000 रुपये सीधे बेटी के बैंक खाते में भेजे जाते हैं, 10,000 रुपये की विवाह सामग्री दी जाती है और 6,000 रुपये आयोजन के लिए होते हैं।

यह योजना सर्वधर्म समभाव का प्रतीक बनी है, जहाँ सभी धर्मों के जोड़ों का विवाह उनके रीति-रिवाजों के अनुसार कराया जाता है।

आंगनबाड़ी और आशा बहुओं का सम्मान व नई नियुक्तियां 
जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य और पोषण की जिम्मेदारी संभालने वाली आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं के लिए योगी सरकार ने विशेष कदम उठाए हैं। अप्रैल 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, 3 लाख से अधिक कार्यकर्ताओं के मानदेय में बड़ी वृद्धि की गई है। हाल ही में 18,440 नवनियुक्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को नियुक्ति पत्र दिए गए हैं और 65,000 से अधिक अन्य पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है।

डिजिटल सशक्तिकरण के तहत इन्हें 69,800 से अधिक स्मार्टफोन और 2 लाख से ज्यादा ग्रोथ मॉनिटरिंग डिवाइस वितरित किए गए हैं ताकि वे बच्चों के विकास का डेटा ऑनलाइन अपडेट कर सकें।

स्वास्थ्य विभाग में नियुक्तियां और नर्सिंग ऑफिसर भर्ती 
स्वास्थ्य क्षेत्र में महिलाओं को रोजगार देने के मामले में उत्तर प्रदेश ने नई मिसाल पेश की है। मार्च 2026 में हुई 1,228 नर्सिंग अधिकारियों की भर्ती में 90% यानी 1,097 पदों पर महिलाओं ने सफलता हासिल की है। सरकार ने बंद पड़े 35 ANM ट्रेनिंग सेंटरों को दोबारा शुरू किया है और प्रदेश के विभिन्न जनपदों में 35 नए नर्सिंग कॉलेज बनाए जा रहे हैं। साथ ही, 3 लाख से अधिक आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को आयुष्मान भारत योजना के तहत 5 लाख रुपये का मुफ्त स्वास्थ्य बीमा कवर भी दिया गया है।

बैंकिंग सखी और डिजिटल इंडिया से जुड़ी महिलाएं 
गांव की बैंकिंग को महिलाओं के हाथ में सौंपते हुए सरकार ने 39,779 से अधिक 'बीके सखी' की नियुक्ति की है। ये महिलाएं गांवों में घर-घर जाकर वित्तीय लेनदेन और बैंकिंग सेवाएं दे रही हैं, जिससे वे न केवल आत्मनिर्भर बनी हैं बल्कि ग्रामीण बुजुर्गों और महिलाओं को बैंक जाने की समस्या से निजात मिली है।

इसके अलावा, 'डिजी शक्ति' योजना के तहत प्रदेश की लाखों छात्राओं को मुफ्त स्मार्टफोन और टैबलेट बांटे गए हैं ताकि वे ऑनलाइन शिक्षा और सरकारी योजनाओं का लाभ ले सकें।

खेल के मैदान में बेटियों का डंका और राजपत्रित पदों पर नियुक्तियां 
खेलों में प्रदेश का नाम रोशन करने वाली बेटियों के लिए योगी सरकार ने 'सीधी भर्ती' की ऐतिहासिक नीति अपनाई है। अंतरराष्ट्रीय पदक जीतने वाली खिलाड़ियों, जैसे क्रिकेटर दीप्ति शर्मा और एथलीट पारुल चौधरी को यूपी पुलिस में डिप्टी एसपी (DSP) जैसे उच्च पदों पर नियुक्त किया गया है।

पदक विजेताओं के लिए पुरस्कार राशि को भी रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ाया गया है, जिसमें ओलंपिक स्वर्ण विजेता को 6 करोड़, रजत विजेता को 4 करोड़ और कांस्य विजेता को 2 करोड़ रुपये दिए जा रहे हैं। मेरठ में निर्माणाधीन मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय में महिला खिलाड़ियों के लिए विशेष सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं।

निराश्रित महिला पेंशन और सामाजिक सुरक्षा का दायरा 
समाज के अंतिम पायदान पर खड़ी महिलाओं के लिए भी सरकार ने पूरी संवेदनशीलता दिखाई है। वर्तमान में प्रदेश की लगभग 32 लाख निराश्रित महिलाओं को सम्मानजनक पेंशन राशि सीधे उनके डीबीटी के माध्यम से खातों में मिल रही है।

'महिला बीट अधिकारी' की तैनाती ने ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा का वातावरण तैयार किया है। इसके अलावा, प्रदेश के हर जिले में 'पिंक बूथ' और महिला हेल्प डेस्क की वजह से सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं के प्रति अपराधों में कमी आई है।

उचित दर की दुकानों का प्रबंधन और राशन वितरण में भागीदारी 
योगी सरकार ने ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक और प्रशासनिक रूप से सशक्त बनाने के लिए एक बड़ा नीतिगत निर्णय लिया है। अब प्रदेश में रिक्त होने वाली राशन की दुकानों का आवंटन प्राथमिकता के आधार पर महिला स्वयं सहायता समूहों को किया जा रहा है।

इससे न केवल राशन वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता आई है, बल्कि हजारों महिलाओं को सीधे रोजगार और गांव के प्रशासनिक निर्णयों में भागीदारी मिली है। वर्तमान में हजारों कोटे की दुकानें महिला समूहों द्वारा सफलतापूर्वक संचालित की जा रही हैं।

संपत्ति पर मालिकाना हक: आवास और स्वामित्व योजना का लाभ 
महिलाओं को वास्तविक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार ने संपत्ति के अधिकारों में उनकी हिस्सेदारी तय की है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उत्तर प्रदेश में आवंटित अधिकांश मकान या तो महिलाओं के नाम पर हैं या संयुक्त रूप से पंजीकृत हैं।

इसी तरह, 'स्वामित्व योजना' के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में घर का मालिकाना हक मिलने से महिलाओं का सामाजिक सम्मान बढ़ा है। रजिस्ट्री में स्टाम्प शुल्क में विशेष छूट देकर महिलाओं को संपत्ति का मालिक बनने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे उनकी आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित हुई है।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम: विधायी और राजनीतिक सशक्तिकरण की नई शुरुआत 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा पारित 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने धरातल पर उतारने के लिए पूरी प्रतिबद्धता दिखाई है। इस ऐतिहासिक संशोधन विधेयक के माध्यम से लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

उत्तर प्रदेश जैसे सबसे बड़ी विधानसभा वाले राज्य में इस कानून के लागू होने से भविष्य में 130 से अधिक महिला विधायक सदन में पहुंचकर प्रदेश की नीति-निर्धारण में मुख्य भूमिका निभाएंगी।

योगी सरकार ने इस विधेयक का स्वागत करते हुए इसे प्रदेश की 'आधी आबादी' के राजनीतिक स्वावलंबन के लिए मील का पत्थर बताया है। यह कानून न केवल शासन में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ाएगा, बल्कि भविष्य के नेतृत्व के लिए लाखों बेटियों को राजनीति के क्षेत्र में आने के लिए प्रेरित भी करेगा।

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