Car tips: क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी कार का इंडिकेटर ऑन करते ही ‘टिक-टिक’ की आवाज क्यों आने लगती है? यह एक छोटी सी लेकिन बेहद जरूरी फीचर है, जिसे हम रोज सुनते हैं, मगर इसके पीछे की वजह पर कम ही ध्यान देते हैं। आज की हाई-टेक कारों में भी यह आवाज जानबूझकर रखी जाती है—और इसके पीछे ठोस कारण हैं।
ड्राइवर को अलर्ट रखने का आसान तरीका
इंडिकेटर की ‘टिक-टिक’ दरअसल एक ऑडिबल अलर्ट है, जो ड्राइवर को याद दिलाता है कि इंडिकेटर अभी चालू है। अक्सर लोग टर्न लेने या लेन बदलने के बाद इसे बंद करना भूल जाते हैं। ऐसी स्थिति में यह आवाज लगातार चेतावनी देती रहती है, जिससे सड़क पर कन्फ्यूजन और दुर्घटना का खतरा कम होता है।
पहले कैसे बनती थी यह आवाज?
पुरानी कारों में यह आवाज ‘फ्लैशर रिले’ नाम के मैकेनिकल पार्ट से आती थी। इसमें एक धातु की पट्टी करंट के कारण बार-बार गर्म और ठंडी होकर मुड़ती थी, जिससे लाइट ऑन-ऑफ होती और ‘टिक-टिक’ की आवाज पैदा होती थी।
अब क्यों आती है यह आवाज?
आधुनिक कारों में अब मैकेनिकल रिले की जगह इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और माइक्रोचिप्स आ गए हैं, जो बिना आवाज के काम करते हैं। फिर भी कंपनियां स्पीकर्स के जरिए कृत्रिम ‘टिक-टिक’ साउंड देती हैं, ताकि ड्राइवर को परिचित फीडबैक मिलता रहे और वह सतर्क बना रहे।
सेफ्टी से भी जुड़ा है कनेक्शन
यह आवाज सिर्फ याद दिलाने के लिए नहीं, बल्कि सेफ्टी का संकेत भी है। अगर इंडिकेटर सही से काम कर रहा है तो ‘टिक-टिक’ नियमित रहती है। वहीं, अगर आवाज तेज या असामान्य हो जाए, तो यह किसी खराबी—जैसे बल्ब फ्यूज या वायरिंग समस्या—का संकेत हो सकता है।
इलेक्ट्रिक कारों में भी क्यों जरूरी?
भले ही आज इलेक्ट्रिक कारें बेहद शांत चलती हों, लेकिन यह साउंड उनमें भी रखा जाता है। इसका कारण साफ है—ड्राइवर की जागरूकता और सड़क सुरक्षा। कुछ प्रीमियम कारों में इसका टोन बदला जा सकता है, लेकिन इसे पूरी तरह बंद करने का विकल्प शायद ही मिलता है।
कुल मिलाकर, यह ‘टिक-टिक’ सिर्फ एक आवाज नहीं, बल्कि आपकी ड्राइविंग सेफ्टी का अहम हिस्सा है।
(मंजू कुमारी)









