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'दृश्यम' की तर्ज पर आर्मी के जवान की हत्या: दो भाइयों ने ही मारा, लेकिन लाश गायब! पशोपेश में पुलिस

असल ज़िन्दगी में हुआ आर्मी के जवान का क़त्ल, हत्यारे खुद बोल रहे हैं, हां... हमने हत्या की है, लेकिन फिर भी पुलिस हाथ मलती बैठी है। केवल गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कर जांच कर रही पुलिस के हाथ अब तक क्यों हैं खाली.... क्या हुआ आर्मी के जवान के साथ! पढ़िए मुंगेली से सैयद वाजिद की ये एक्सक्लूसिव रिपोर्ट...

दृश्यम की तर्ज पर आर्मी के जवान की हत्या: दो भाइयों ने ही मारा, लेकिन लाश गायब! पशोपेश में पुलिस
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मुंगेली। मुंगेली जिले के पथरिया थाना क्षेत्र में 6 महीने से लापता आर्मी के एक जवान की कहानी फिल्म 'दृश्यम' की भांति पुलिस के लिए पहेली बन गई है। दोवेश नेताम जम्मू कश्मीर में राष्ट्रीय रायफल्स की 47 वीं बटालियन का जवान था। छुट्टी में घर आया हुआ आर्मी का जवान जिस दिन उसे ड्यूटी पर लौटना था, उसी दिन से रहस्यमय तरीके लापता से था। आर्मी के कर्नल ने भी कई मर्तबा मुंगेली पुलिस को जवान के संबंध में पत्र लिख कर जवान की पतासाजी करने को कहा। जिस पर जांच करते हुए धीरे धीरे पुलिस हत्यारों तक जा तो पहुंची, लेकिन मामला इस वज़ह से उलझ गया क्योंकि आरोपियों की निशानदेही के बाद भी आर्मी जवान की लाश उस जगह से बरामद ही नहीं हुई, जहाँ कथित तौर पर उसे मारकर दफना दिया गया था।

दरअसल ये पूरा मामला मुंगेली जिले के पथरिया थाना क्षेत्र में आने वाले बगबुड़वा गांव का है। आर्मी के जवान के बारे में ग्रामीण बताते हैं कि अपनी किसी शारीरिक कमजोरी की वजह से वह हमेशा उखड़ा-उखड़ा सा रहता था। घरवालों के साथ भी उसका व्यवहार अच्छा नहीं था। वह जब भी छुट्टी में घ आता तो अक्सर शराब के नशे में भाइयों के साथ भी मारपीट करता था। वारदात के दिन भी कुछ ऐसा ही हुआ था और तभी दोनों भाइयों ने फसाद की जड़ को ही मिटाने की ठान ली। उधर अब हत्या करना कबूलने वाले दोनो भाइयों का कहना है कि जवान को मारने के बाद उन्होंने लाश को पहले तो खेत में दफना दिया था। लेकिन पुलिस के बढ़ते प्रेशर और पकड़े जाने के भय से एक दिन उन्होंने वापस कब्र को खोदकर भाई की अस्थियों को शिवनाथ नदी में बहा दिया। यहीं से सारा मामला फंस गया। आर्मी के जवान की हत्या की ये कहानी अभिनेता अजय देवगन की फिल्म 'दृश्यम' की उल्झाकर रख देने वाली पटकथा से काफी हद तक मिलती- जुलती है। जिसमें हत्यारा सिर्फ इसलिए बच जाता है क्योंकि पुलिस के हाथ लापता बालक की लाश नहीं लगती है।

इस हत्या की गुत्थी भी इतनी बुरी तरह से उलझी हुई है की पुलिस भी समझ नहीं पा रही। जुर्म कबूल करते भाइयों को कैसे गिरफ्तार करे।

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