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दिव्यांग भत्ता पाने के लिए अपने ही दफ्तरों के चक्कर लगा रहा दिव्यांग कर्मचारी, नहीं हो रही सुनवाई

सुरजभान ने जिला उपायुक्त को दी गई शिकायत में आरोप लगाया है कि उसके दफ्तर के कुछ कर्मचारी जान-बुझकर उसे दिव्यांग भत्ता नहीं दे रहे हैं साथ ही सुरजभान ने अपने दफ्तर के कुछ अधिकारियों पर दिव्यांग भत्ता देने के नाम पर रिश्वत मांगने का भी आरोप लगाया है।

दिव्यांग भत्ता पाने के लिए अपने ही दफ्तरों के चक्कर लगा रहा दिव्यांग कर्मचारी, नहीं हो रही सुनवाई
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दिव्यांग कर्मचारी सुरजभान। 

हरिभूमि न्यूज, हांसी

सरकार द्वारा दिव्यांग कर्मचारियों को दिए जाने वाले दिव्यांग भत्ते के लिए एक सरकारी कर्मचारी अपने ही विभाग के दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर है लेकिन दिव्यांग की कहीं भी सुनवाई नहीं हो पा रही है।

मिनी बाल भवन में रिकॉर्ड कीपर के पद पर तैनात दिव्यांग सुरजभान द्वारा शिकायत किए जाने के बाद भी विभाग के अधिकारी उसे गुमराह करते रहे कि उनको सितंबर 2020 से वेतन के साथ जोड़कर दिव्यांग भत्ता दिया जा रहा है। जब इस बारे सुरजभान को शक हुआ तो उसने सैलरी स्टेटमेंट निकलवाई तो पता लगा कि उसके बैंक अकाउंट में केवल उसकी सैलरी ही आ रही है। इसके बाद सुरजभान ने इस बारे जिला उपायुक्त को शिकायत भेजी है। सुरजभान ने जिला उपायुक्त को दी गई शिकायत में आरोप लगाया है कि उसके दफ्तर के कुछ कर्मचारी जान-बुझकर उसे दिव्यांग भत्ता नहीं दे रहे हैं साथ ही सुरजभान ने अपने दफ्तर के कुछ अधिकारियों पर दिव्यांग भत्ता देने के नाम पर रिश्वत मांगने का भी आरोप लगाया है।

ढाणा खुर्द निवासी सुरजभान ने बताया कि वह पिछले 22 साल मिनी बाल भवन हांसी में बतौर रिकॉर्ड कीपर के पद पर तैनात है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार की ओर से वर्ष 2016 में दिव्यांग कर्मचारियों के लिए 2500 से लेकर 5200 रुपये तक दिव्यांग भत्ता देने की घोषणा की थी। घोषणा के बाद सुरजभान ने अपना रिकार्ड कार्यालय में जमा करवा दिया था। परंतु इसके बावजूद भी उसे दिव्यांग भत्ता नहीं दिया गया। इसके लिए वह बार-बार अधिकारियों से गुहार लगाता रहा। दिव्यांग भत्ते के लिए सुरजभान उपायुक्त से लेकर चंडीगढ़ उच्च अधिकारियों तक गुहार लगा चुका है। उसने बताया कि इससे पूर्व जब जिला उपायुक्त को शिकायत दी गई थी तो सितंबर 2020 में अधिकारियों ने बताया की आपको वेतन के साथ जोड़ कर दिव्यांग भत्ता दिया जा रहा है। परंतु सुरजभान ने जब अपनी सैलरी व बैंक की स्टैटमेंट निकलवाई तो पता चला कि केवल रिकार्ड में ही उसे दिव्यांग भत्ता दिया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि अब तक उसके खाते में 23647 रुपए सैलरी के तौर पर आ रहे थे और दिव्यांग भत्ता जारी करने के बाद भी उसके अकाउंट में यही राशि आ रही है। सुरजभान ने आरोप लगाया है कि उसे झूठा वेतन विवरण देकर धोखा देने का प्रयास किया गया है। उसने बताया कि दिव्यांग भत्ता जुड़वाने के नाम पर उससे रिश्वत देने की मांग की गई थी। लेकिन उसके द्वारा रिश्वत नहीं दिए जाने के कारण उसे दिव्यांग भत्ता नहीं दिया जा रहा है। अब सुरजभान ने इस बारे जिला उपायुक्त को पुनः पत्र लिखकर इस मामले में कार्रवाई किए जाने की मांग की है।

वहीं इस संदर्भ में डीसीडब्ल्यूओ विनोद कुमार से संपर्क किया गया तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

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