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अब गुड़-गोबर भी हुआ कीमती, जैविक खाद के रूप में बिकेगा 60 रुपए में 10 किलो

कर दिया न सब गुड़ गोबर...बीते जमाने की ये कहावत किसी भी तरह की गड़बड़ी के लिए इस्तेमाल की जाती थी, लेकिन अब बदले हुए जमाने में यही गुड़ और गोबर को मिलाकर बेहतरीन किस्म की जैविक खाद बनाई जाएगी और इसे सुपर कम्पोस्ट खाद के ब्रांड नेम के साथ बेचा जाएगा। गुड़ गोबर भी अब कीमती होने वाला है। खास बात ये है कि छत्तीसगढ़ के किसानों को यह खाद 6 रुपए किलो यानी 60 रुपए में 10 किलो की दर पर मिलेगी।

अब गुड़-गोबर भी हुआ कीमती, जैविक खाद के रूप में बिकेगा 60 रुपए में 10 किलो
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रायपुर. कर दिया न सब गुड़ गोबर...बीते जमाने की ये कहावत किसी भी तरह की गड़बड़ी के लिए इस्तेमाल की जाती थी, लेकिन अब बदले हुए जमाने में यही गुड़ और गोबर को मिलाकर बेहतरीन किस्म की जैविक खाद बनाई जाएगी और इसे सुपर कम्पोस्ट खाद के ब्रांड नेम के साथ बेचा जाएगा। गुड़ गोबर भी अब कीमती होने वाला है। खास बात ये है कि छत्तीसगढ़ के किसानों को यह खाद 6 रुपए किलो यानी 60 रुपए में 10 किलो की दर पर मिलेगी।

राज्य सरकार की गोधन न्याय योजना के तहत प्रदेशभर के पशुपालक किसान गोबर बेच कर राशि जमा कर रहे हैं। सरकार 2 रुपए किलो के रेट पर गोबर खरीद रही है। इस गोबर से वर्मी कम्पोस्ट खाद बनाई जा रही है। किसान इसका उपयोग अपनी खेती के लिए कर रहे हैं। इसकी वजह से राज्य में जैविक खेती को बढ़ावा मिल रहा है। गोठानों में वर्मी कंम्पोस्ट खाद तैयार करने के साथ अब राष्ट्रीय जैविक खेती केंद्र द्वारा विकसित कम लागत उत्पादन तकनीक, वेस्ट डिकम्पोजर का उपयोग करते हुए 40-45 दिनों में जैविक खाद (आर्गेनिक मेन्योर) तैयार कर इसे सुपर कम्पोस्ट ब्रांड के रूप में बेचा जाएगा।

जानकारों का मानना है कि इसका उपयोग आधार खाद के रूप में करने से भूमि की भौतिक अवस्था में सुधार व उर्वरा शक्ति में वृद्धि के साथ फसल उत्पादन भी बढ़ेगा। इस पूरी कवायद का उद्देश्य है कि गोठानों में उपलब्ध गोबर से वर्मी कम्पोस्ट के अतिरिक्त कम लागत उत्पादन तकनीक से जैविक खाद तैयार करना है।

ये है गुड़ गोबर खाद बनाने का फार्मूला

जैविक खाद तैयार करने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया तय की गई है। इसके तहत डिकम्पोजर घोल तैयार करने की विधि के तहत गोबर को शीघ्र डिकम्पोज करने के लिए वेस्ट डिकम्पोजर एवं गुड़ की जरूरत होती है। 200 लीटर पानी में 2 किलो गुड़, 20 ग्राम डिकम्पोजर मिलाकर घोल तैयार किया जाता है। इस घोल को 3 से 7 दिन रखा जाता है। निर्मित घोल से बार-बार वेस्ट डिकम्पोजर बनाने के लिए घोल में से 20 लीटर को पुन: 2 किलो गुड़ के साथ 200 लीटर पानी मिलाकर घोल की मात्रा बढ़ाई जा सकती है। प्रक्रिया के तहत डिकम्पोजर घोल का उपयोग कैसे करना है, ये भी बताया गया है। पूरी प्रक्रिया के दौरान 40 से 45 दिनों में जैविक खाद तैयार हो जाती है।

गोठानों में बनेगी जैविक खाद

सरकार के कृषि एवं जैव प्रौद्योगिकी विभाग की पहल पर प्रदेश के सभी गोठानों में इस प्रक्रिया का पालन कर जैविक खाद बनाई जाएगी। इसे सुपर कम्पोस्ट ब्रांड नेम के साथ किसानों को 6 रुपए किलो में बेचा जाएगा। जो स्वसहायता समूह इस काम में लगेंगे, उन्हें भी खाद बिक्री में लाभांश दिया जाएगा। किसानों को यह खाद सहकारी बैंक, सहकारी समितियों द्वारा वस्तु ऋण के रूप में उपलब्ध कराई जाएगी।

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