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Big Breaking : पंडवानी गायिका तीजनबाई प्रोफेशनल काँग्रेस में शामिल, क्षितिज चन्द्राकर ने दिलाई सदस्यता

छत्तीसगढ़ की सियासत और कला जगत से जुड़ी हुई इस वक्त की एक बड़ी खबर यह है कि तीन बार पद्म सम्मानों से नवाजी जा चुकीं प्रख्यात पंडवानी गायिका तीजन बाई कांग्रेस में शामिल हो गई हैं। उन्होंने प्रोफेशनल कांग्रेस की सदस्यता ली है, जो कि कांग्रेस का ही अंग है। पढ़िए पूरी खबर-

Big Breaking : पंडवानी गायिका तीजनबाई प्रोफेशनल काँग्रेस में शामिल,  क्षितिज चन्द्राकर ने दिलाई सदस्यता
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रायपुर/दुर्ग। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के गृह जिले दुर्ग से इस वक्त एक बड़ी खबर यह आई है कि प्रख्यात पंडवानी लोक गायिका तीजन बाई ने आज प्रोफेशनल कांग्रेस की सदस्यता ले ली है। प्रोफेशनल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के दामाद क्षितिज हैं। यह कांग्रेस का ही एक अंग है। गौरतलब है कि तीजन बाई वह शख्सियत हैं, जिन्होंने छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ी की पहचान को न केवल देश में, बल्कि पूरे विश्व में प्रसारित किया है। छत्तीसगढ़ में उनके प्रशंसकों की बड़ी संख्या है। वे छत्तीसगढ़ में पंडवानी की पर्याय मानी जाती हैं। इसीलिए प्रोफेशनल कांग्रेस में उनका शामिल होना छत्तीसगढ़ की राजनीति, कला जगत के अलावा आमजन के लिए भी इस समय चर्चा का विषय बना हुआ है।

तीजनबाई : भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के पंडवानी लोक गीत-नाट्य की पहली महिला कलाकार हैं। देश-विदेश में अपनी कला का प्रदर्शन करने वाली तीजनबाई को बिलासपुर विश्वविद्यालय द्वारा डी लिट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया है। वे सन 1988 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री और 2003 में कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से[1] अलंकृत की गयीं। उन्हें 1905 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार तथा 2007 में नृत्य शिरोमणि से भी सम्मानित किया जा चुका है।

भिलाई के गाँव गनियारी में जन्मी इस कलाकार के पिता का नाम हुनुकलाल परधा और माता का नाम सुखवती था। नन्हीं तीजन अपने नाना ब्रजलाल को महाभारत की कहानियाँ गाते सुनाते देखतीं और धीरे धीरे उन्हें ये कहानियाँ याद होने लगीं। उनकी अद्भुत लगन और प्रतिभा को देखकर उमेद सिंह देशमुख ने उन्हें अनौपचारिक प्रशिक्षण भी दिया। 13 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपना पहला मंच प्रदर्शन किया। उस समय में महिला पंडवानी गायिकाएँ केवल बैठकर गा सकती थीं जिसे वेदमती शैली कहा जाता है। पुरुष खड़े होकर कापालिक शैली में गाते थे। तीजनबाई वे पहली महिला थीं जो जिन्होंने कापालिक शैली में पंडवानी का प्रदर्शन किया। एक दिन ऐसा भी आया जब प्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर ने उन्हें सुना और तबसे तीजनबाई का जीवन बदल गया। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी से लेकर अनेक अतिविशिष्ट लोगों के सामने देश-विदेश में उन्होंने अपनी कला का प्रदर्शन किया।


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