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हरियाणा
डाडम खनन हादसा : चट्टानों में बने छोटे-छोटे छेद खोल रहे बड़े हादसे की पोल, बर्बादी की गवाही दे रहे वाहनों के अस्थि पिंजर, देखें तस्वीरें

पहाड़ से गिरे पत्थर में बने छेद खोल रहे हादसे की पोल।

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डाडम खनन हादसा : चट्टानों में बने छोटे-छोटे छेद खोल रहे बड़े हादसे की पोल, बर्बादी की गवाही दे रहे वाहनों के अस्थि पिंजर, देखें तस्वीरें

Manoj Jangra
|
2 Jan 2022 5:36 PM GMT

गांव डाडम स्थित पहाड़ में स्लाइडिंग होकर बड़े-बड़े पत्थर खानों में गिरने की बाद लोगों को हजम नहीं हो पा रही। चूंकि डाडम ही नहीं तोशाम इलाके के किसी भी बड़े पहाड़ में मिट्टी की जरा सी भी मिलावट नहीं है, बल्कि उक्त पहाड़ पथरीले हैं। जो कि तोड़ने पर ही टूकड़ा या पत्थर टूट सकता है। पर शनिवार अल सुबह डाडम पहाड़ में तो तीन-चार बड़े पत्थर करीब सौ फुट की ऊंचाई से नीचे गिरे हैं।

हरिभूमि न्यूज : भिवानी/तोशाम

गांव डाडम स्थित पहाड़ में स्लाइडिंग होकर बड़े-बड़े पत्थर खानों में गिरने की बाद लोगों को हजम नहीं हो पा रही। चूंकि डाडम ही नहीं तोशाम इलाके के किसी भी बड़े पहाड़ में मिट्टी की जरा सी भी मिलावट नहीं है, बल्कि उक्त पहाड़ पथरीले हैं। जो कि तोड़ने पर ही टूकड़ा या पत्थर टूट सकता है। पर शनिवार अल सुबह डाडम पहाड़ में तो तीन-चार बड़े पत्थर करीब सौ फुट की ऊंचाई से नीचे गिरे हैं। यह पहाड़ों की स्लाईिडंग नहीं बल्कि पहाड़ों से जानकारी जुटाने वाले लोगों का हैवी ब्लास्टिंग से पहाड़ दरकने का तर्क दिया जा रहा है। वह बात दिगर है कि जांच में क्या कुछ निकलकर सामने आएगा, लेकिन फिलहाल हैवी ब्लास्टिंग से बड़े पत्थरों का खिसकना माना जा रहा है।

सूत्र बताते है कि जिन पहाड़ाें पर हरियाली होगी। उन पहाड़ों में थोड़ी बहुत मिट्टी जरूर होगी। चूंकि मिट्टी होने पर ही पहाड़ पर पौधे व घास फुस उग सकते हैं, लेकिन जो पहाड़ पथरीला होगा या उसमें कहीं पर भी मिट्टी का बीच में कोई कण या परत नहीं होगी। वह पत्थर तोड़े बिना नहीं टूट सकता है। अब कहा जा रहा है कि शनिवार को अपने आप पहाड़ का हिस्सा टूटकर गिर गया। पहाड़ों के बारे में जानकारी रखने वाले लोगों का कहना है कि जब तक पथरों के बीच में मिट्टी की परत नहीं होगी, तब तक पहाड़ अपने आप नहीं टूट सकते। वैसे भी तोशाम, खानक व डाडम इलाके के पहाड़ पथरीले हैं। पथरीले होने की वजह से अपने आप नहीं टूटते, कई बार इन पहाड़ों को तोड़ने के लिए सामान्य की बजाए हैवी ब्लास्टिक करनी पड़ती है। हैवी ब्लास्टिग से कई टन पत्थर टूट कर खान में गिर जाते हैं।


कबाड़ बने वाहन।

हैवी ब्लास्टिंग से दूसरे पहाड़ाें में भी आ जाती है दरार

पहाड़ क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों का कहना है कि सामान्य ब्लास्टिंग से ही एक खान से दूसरी खान के पत्थरों में दरार आ जाती है। उनका कहना है कि तोशाम इलाके का पहाड़ पथरीला है। जिसको आसानी से नहीं तोड़ा जा सकता। इसके लिए कई बार हैवी ब्लास्टिंग भी कर देते हैं। जिससे जिस जगह पर होल करके बारूद लगाई गई है। वह पत्थर तो टूट जाएगा। साथ में दूसरे पहाड़ों में भी दरार आना संभव होता है। शनिवार को जो डाडम पहाड़ में घटना हुई है। उससे भी यही लगता है कि किसी वक्त हैवी ब्लास्टिंग की गई होगी और दूसरे पहाड़ या जो पहाड़ा का हिस्सा टूटकर गिरा है। उसमें दरार आ गई होगी और शनिवार को जिस वक्त मशीनों ने खान में काम करना शुरू किया होगा तो वाइब्रेशन होना लाजिमी है। जिसके चलते उपर से पहाड़ का एक टूकड़ा खिसकर गिर गया। दूसरी तरफ जिस पहाड़ में मिट्टी होती है। वह पहाड़ ज्यादातर बारिश या बर्फ गिरने के मौसम में ज्यादा सरकते है। चूंकि बारिश का पानी से पत्थरों के साथ जमा मिटटी बह कर चली जाती है और उसके बाद पत्थर फिर खिसकने लगता है।


पत्थरों से टूटी मशीन के बिखरे पुर्जे और डम्पर का टूटा हिस्सा।

जड़ कुरेदी तो पत्थरों का गिरना शुरू

ग्रामीण बताते है कि डाडम पहाड़ से पत्थर गिरने का दूसरा कारण अधिक गहराई तक पहाड़ को तोड़ना भी माना जा रहा है। पहाड़ से जुडे़ लोगों का कहना है कि जिस इलाके में पत्थर गिरने की घटना हुई है। उस इलाके में पहाड़ की तलहटी में भी खुदाई की हुई और वहां से भी भारी मात्रा में पत्थर निकाला गया है। कई इलाकों में तो पहाड़ की तलहटी में 15 से 20 फुट तक भूमिगत पानी जमा है। पहाड़ों की जड़ कुरेदी गई तो उक्त पहाड़ से पत्थर गिरने लाजिमी थे। खैर मामले से पर्दा तो तब उठेगा। जब मौके पर पहुंची एंजेसियों की जांच रिपोर्ट उजागर हो पाएगी।


सूचना के बाद मौके पर पहुंचे सेना के जवान।

ब्लास्टिंग के वक्त लोग घरों में हो जाते हैं कैद

ग्रामीणों की बात पर यकीन करे तो जिस वक्त तोशाम इलाके के पहाड़ों में ब्लास्टिंग की जाती है। उस वक्त लोग घरों के अंदर चले जाते है। करीब दो घंटे तक लोग अपने घरों में ही रहते है। चूंकि दोपहर एक बजे से लेकर तीन बजे तक ब्लास्टिंग की वजह से छोटे पत्थर व कंकर दूर.दूर तक लोगों के घरों तक पहुंच जाते है। कई बार इन पत्थरों की वजह से लोगों के घरों को भी नुकसान हो जाता है। कई बार तो पहाड़ के पास रोड पर गुजर रहे वाहनों तक पत्थर के छोटे टूकड़े पहुंच रहे है।


उस जगह को दिखाते हुए,जहां से पत्थर गिरा था।

स्क्रैप लायक भी नहीं बचे सैकड़ों टन वजन उठाने वाले वाहन

डाडम पहाड़ में एनडीआरएफ, गाजियाबाद से खनन विभाग व मधुबन से टीमें पहुंचने के बाद राहत एवं बचाव कार्य में तेजी आई है। हालांकि कल के बाद रविवार दोपहर तक किसी व्यक्ति का शव नहीं निकला,लेकिन सौ फुट उपर से गिरे पत्थर से जो खानों में खड़े वाहनों का हालत हुई है। वह देखकर हर किसी की रूह कांप उठती है। अगर इन वाहनों में कोई व्यक्ति रहा होगा तो उसके शरीर का क्या बना होगा। यह दृश्य एकदम डाडम पहाड़ के पत्थरों के बीच से निकाले गए करोड़ों रुपये की मशीनों के पुर्जों को देखकर सोंचने पर मजबूर कर दिया। चूंकि सैंकड़ांे टन वजन उठाने वाली मशीन भी भारीभरकम पत्थर के नीचे बेबस नजर आई।

भारी व उपर से गति से गिरने की वजह से उक्त मशीनों के अस्थिपिंजर बिखर गए। अभी कुछ कहा नहीं जा सकता कि कितनी मशीने थी,लेकिन अभी तक जो मशीनों का सामान निकला है। उसमें करीब एक दर्जन पोपलेंड, जेसीबी व डम्पर शामिल है। खान से सभी पत्थर हटने के बाद ही पता चल पाएगा कि कितने वाहनों का कबाड़ बाहर निकल पाया है। यहां यह बताते चले कि पत्थरों के गिरने से वाहन पूरी तरह से चकनाचूर हो गए। उन वाहनांे से निकलने वाले पुर्जे भी टूट चुके है। जिनको किसी दूसरे वाहन में जोड़ने के काम नहीं लिया जा सकता,केवल इन वाहनों के लौहे को फिर से गलाकर फिर से किसी दूसरे काम में लिया जा सकता है।

हिसार से पहुंची सेना की टूकड़ी

डाडम पहाड़ में करीब सौ फुट उपर से गिरे पत्थरों को हटाए न जाने के बाद हिसार से एक सेना की टूकड़ी भी पहुंच गई है। सेना के पहुंचने से पहले उक्त इलाके में एनडीआरएफ की टीम, गाजियाबाद से पहुंची खनन टीम व मधुबन से पहुंची टीम रेस्क्यू अभियान चलाए हुए है। अब सेना ने भी वहां पहुंचकर उक्त टीमांे से योजना बनानी शुरू कर दी है। फिलहाल अभी तक रेस्क्यू अभियान चला रही टीमों को कोई खास उपलब्धि हासिल नहीं हो पाई है,लेकिन चारों टीमें मिलकर अभियान में ओर तेजी लाने का प्रयास कर रही है। एनडीआरएफ टीम के इंचार्ज बेगराज मीणा ने बताया कि उनकी टीम रेस्क्यू अभियान चलाए हुए है। एक पत्थर भारी है। वह हटाया नहीं जा सकता। उस पत्थर को ब्लास्टिंग के जरिए तोड़कर मौके से हटाया जाएगा। साथ में दो ओर पत्थर गिरे है। उनको भी हटाया जाएगा। तब पता चल पाएगा कि कितनी जनहानि हुई है।

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