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फोन टैप संबंधी झूठी खबर चलाने के आरोप में पत्रकार सहित दो लोगों के खिलाफ मामला दर्ज

राजस्थान पुलिस ने एक वरिष्ठ पत्रकार सहित दो लोगों के खिलाफ विधायकों के फोन टैप करने संबंधी झूठी खबर चलाने के आरोप में मामला दर्ज किया है। आरोप है कि इन लोगों ने अगस्त महीने में राज्य में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच चली राजनीतिक खींचतान के दौरान एक जगह रुके कांग्रेस विधायकों व मंत्रियों के फोन टैप करने संबंधी झूठी खबर चलाई।

फोन टैप संबंधी झूठी खबर चलाने के आरोप में पत्रकार सहित दो लोगों के खिलाफ मामला दर्ज
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फेक न्यूज मामला

जयपुर। राजस्थान पुलिस ने एक वरिष्ठ पत्रकार सहित दो लोगों के खिलाफ विधायकों के फोन टैप करने संबंधी झूठी खबर चलाने के आरोप में मामला दर्ज किया है। आरोप है कि इन लोगों ने अगस्त महीने में राज्य में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच चली राजनीतिक खींचतान के दौरान एक जगह रुके कांग्रेस विधायकों व मंत्रियों के फोन टैप करने संबंधी झूठी खबर चलाई। जयपुर के विधायकपुरी थाने में एक अक्टूबर को दर्ज इस मामले में राजस्थान तक के शरत कुमार व एक्सवाईजेड न्यूज एजेंसी के लोकेंद्र सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।

उल्लेखनीय है कि लोकेंद्र सिंह सचिन पायलट का मीडिया का काम भी देखते हैं। हालांकि पायलट ने इस ताजा घटनाक्रम पर टिप्पणी से इनकार किया है। गहलोत व पायलट खेमे के बीच राजनीतिक खींचतान के दौरान गहलोत खेमे के विधायक अगस्त महीने में जैसलमेर के एक निजी होटल में रुके थे। प्राथमिकी के अनुसार इस बारे में एक परिवाद सात अगस्त को उपनिरीक्षक सत्यपाल सिंह ने दिया कि होटल में रुके विधायकों व मंत्रियों की फोन टैपिंग के बारे में भ्रामक समाचार सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है। प्राथमिकी के अनुसार साइबर थाने की जांच में प्रथम दृष्टया इस बारे में भ्रामक व तथ्यहीन समाचार एक्सवाईजेड न्यूज एजेंसी के लोकेंद्र सिंह व राजस्थान तक (आजतक) के शरत कुमार द्वारा तैयार किया जाना सामने आया है। इस बारे में जब सचिन पायलट से संपर्क किया गया तो उन्होंने टिप्पणी से इनकार किया जबकि लोकेंद्र सिंह ने इस प्रकरण को 'राजनीति से प्रेरित' बताया। उधर, भाजपा ने इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनियां ने ट्वीट किया कि लोकतंत्र पर खतरे की बड़ी-बड़ी बातें करने वाले अशोक गहलोत लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के दमन पर उतर आए हैं, कारण है विगत दिनों पत्रकारों ने वंचितों और अबलाओं की रक्षा के लिए आवाज बुलंद की है। सरकार का यह कृत्य तो 'विनाश काले विपरीत बुद्धि' जैसा ही होगा।

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