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कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए श्रीखंड महादेव यात्रा पर लगाई रोक

हिमाचल प्रदेश में कोरोना वायरस की मार लोगों की आस्था पर भी पड़ी है। कोरोना वायरस के चलते जहां चंबा का मिंजर मेला इस बार स्थगित कर दिया गया है, वहीं, कुल्लू श्रीखंड महादेव यात्रा पर भी रोक लगा दी गई है।

कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए श्रीखंड महादेव यात्रा पर लगाई रोक
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फाइल फोटो

हिमाचल प्रदेश में कोरोना वायरस की मार लोगों की आस्था पर भी पड़ी है। कोरोना वायरस के चलते जहां चंबा का मिंजर मेला इस बार स्थगित कर दिया गया है, वहीं, कुल्लू श्रीखंड महादेव यात्रा पर भी रोक लगा दी गई है। चंबा में मिंजर मेला इस बार नहीं होगा, लेकिन जो मिंजर चढ़ाने और दूसरी धार्मिक रस्में हैं वो पूरी की जाएंगी। इसकी जानकारी चंबा के डीसी ने सोशल मीडिया के जरिये दी है। सोमवार को चंबा में मेला कमेटी की बैठक हुई थी। इस दौरान यह फैसला लिया गया।

वहीं, कुल्लू की जिला दंडाधिकारी डॉ. ऋचा वर्मा ने इस साल श्रीखंड यात्रा को निलंबित कर दिया है। आदेशों के अनुसार, इस साल इस यात्रा के तहत होने वाली तीर्थ यात्रा, पर्वतारोहण और पर्यटन जैसी गतिविधियों पूरे साल नहीं होगी। कोविड-19 के खतरे और श्रीखंड जाने वाले रास्ते में बीते साल हुई भारी बर्फबारी के खतरे को देखते हुए एसडीएम आनी की तरफ से भी यात्रा को निलंबित करने की सिफारिश की गई है। इसके अलावा स्थानीय पंचायतों चायल, भालसी, अरसु, सराहन, नोर, तुनन, निशानी और रहाणु की तरफ से भी इस यात्रा को स्थगित करने करने की अपील की गई है।

डीसी ने आदेशों में इसका जिक्र करते हुए कहा गया है कि आम जनता की सुरक्षा और सरकार के दिशानिर्देशों को ध्यान में रखते हुए यात्रा को निलंबित किया जाता है। ये आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे और आगामी आदेशों तक जारी रहेंगे। यदि कोई भी इन आदेशों का उल्लंधन करते हुए पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि श्रीखंड महादेव यात्रा दुनिया की सबसे कठिनतम धार्मिक यात्रा है, जो कुल्लू जिले के आनी इलाके से शुरू होती है। 32 किमी की पैदल चढ़ाई करने के बाद श्रीखंड महादेव पहुंचा जा सकता है।

चंबा का मिंजर मेला 935 ई. में चंबा के राजा की विजय के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि अपने विजयी राजा की वापसी पर लोगों ने धान और मक्का की मालाओं से उनका अभिवादन किया था। यह मेला समृद्धि और खुशी का प्रतीक है। यह मेला सावन मास के दूसरे रविवार को आयोजित किया जाता है।

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