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हरियाणा में सोसायटी अधीन पॉलिटेक्निक कॉलेजों को किया जाएगा मर्ज

इस काम में कोई लीगल अड़चन नहीं आए, इसके लिए विधिवत हरियाणा के एडवोकेट जनरल से भी लीगल राय ली गई है, इतना ही नहीं इस काम के लिए तीन सदस्यों वाली एक कमेटी का गठन किया गया था। इस तरह के संस्थानों में की जा रही मनमानी को लेकर लगातार शिकायतें सीधे ही मंत्री के पास में आ रही थी।

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योगेंद्र शर्मा. चंडीगढ

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा कांग्रेस सरकार के शासनकाल के वक्त लिए गए फैसले के बाद से सोसायटी के तहत चलाए जाने वाले पॉलिटेक्निक कॉलेजों को अब हरियाणा राज्य तकनीकी शिक्षा विभाग के अंतर्गत मर्ज करने की तैयारी कर ली गई है। इस काम में कोई लीगल अड़चन नहीं आए, इसके लिए विधिवत हरियाणा के एडवोकेट जनरल से भी लीगल राय ली गई है, इतना ही नहीं इस काम के लिए तीन सदस्यों वाली एक कमेटी का गठन किया गया था। इस तरह के संस्थानों में की जा रही मनमानी को लेकर लगातार शिकायतें सीधे ही मंत्री के पास में आ रही थी।

सूत्रों का कहना है कि कईं संस्थानों के अंदर जिस ट्रेड में एक भी विद्यार्थी नहीं है, वहां पर लंबे अर्से से शिक्षक वेतन ले रहे हैं। जिनको लेकर भी तकनीकी शिक्षा मंत्री विज ने विस्तार से रिपोर्ट ली थी। हरियाणा के गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के पास यह महकमा है। कईं बार सोसायटी के नाम पर चल रहे गोलमाल और पूर्व में हुई अनियमितताओं को देखते हुए पूरे मामले में अनिल विज ने अफसरों के साथ मीटिंग लेकर इनमें चल रही मनमानी और अनियमितताओं पर रोक लगाने के लिए इन्हें मर्ज करने का फार्मूला निकाला था।

इस संबंध में हरियाणा तकनीकी शिक्षा विभाग के अधिकारियों को विज ने साफ कर दिया था कि वर्तमान सरकार में पुराने समय वाला गोलमाल नहीं चलने दिया जाएगा। सारे हालात पर मंथन के बाद मंत्री विज ने इन कालेजों को मर्ज करने के लिए लीगल अड़चन नहीं आए, इस बारे में फाइल पर हरियाणा की एजी एडवोकेट जनरल से राय लेने के लिए कहा था। इतना ही नहीं पूरे मामले में उन्होंने कमेटी का गठन कर दिया था। प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी है, फैसले को सैद्धांतिक मंजूरी भी दी जा चुकी है। कमेटी में तकनीकी शिक्षा विभाग के अतिरिक्त निदेशक प्रशासक के अलावा सरकारी कॉलेजों का प्रतिनिधित्व करने वाले कुणालजीत और सोसाइटी पॉलिटेक्निक कॉलेज की ओर से सुनील कुमार शामिल हैं। उक्त कमेटी को समयबद्ध तरीके से अपनी रिपोर्ट देने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है। यह समय सीमा भी जल्द ही समाप्त होने जा रही है। रिपोर्ट आने के बाद में उसके आधार पर सोसाइटी के रूप में चलाए जा रहे हैं, पॉलिटेक्निक कॉलेजों को तकनीकी शिक्षा विभाग के अंदर मर्ज कर दिया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि हरियाणा में पॉलिटेक्निक कॉलेजों की संख्या 37 और इनमें से 26 सरकारी पॉलिटेक्निक कालेज है। जिसमें से 11 सोसाइटी के रूप में चलाए जा रहे हैं। अहम पहलू यह है कि इन सभी का खर्च हरियाणा सरकार की ओर से उठाया जाता है। संबंधित विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को भी सरकार की ओर से इस प्रक्रिया को जल्द पूरा करने का निर्देश दिया गया है। मामले में किसी प्रकार का कोई कानूनी अड़चन नहीं हो इसके लिए एडवोकेट जनरल से राय मांगी थी। पूर्व की हुड्डा सरकार के दौरान सोसाइटी कॉलेजों का फार्मूला निकाला था, जिसमें कॉलेज का प्रबंधन और सारा कुछ इन पदाधिकारियों की मनमर्जी से चला करता था। वर्तमान में सोसाइटी के तहत चलने वाले कॉलेजों में गोलमाल और मनमाने फैसलों को लेकर शिकायतें मंत्री के पास आ रही थीं, इतना ही नहीं सोसाइटी के स्टाफ की पदोन्नति के मामलों को लेकर भी कॉफी शिकायतें प्रदेश स्तर पर की गई। कुल मिलाकर सोसाइटी मोड पर कॉलेजों में चल रहे खेल को समाप्त करने के लिए सरकार की ओर से तकनीकी शिक्षा मंत्री अनिल विज ने कमेटी गठित की और इसकी रिपोर्ट आते ही मर्ज करने की तैयारी कर ली गई है। उन्होंने स्वीकार किया कि सोसाइटी के तहत चलने वाले कॉलेजों का प्रबंधन मनमाने ढंग से किया जा रहा था।

मिल रहीं काफी शिकायतें-विज

तकनीकी सिक्षा मंत्री अनिल विज का कहना है कि सरकारी संस्थान का संचालन सरकार की ओर से जारी नियमों के मुताबिक ही होगा सोसाइटी के माध्यम से चल रहे कालेजों को लेकर मेरे पास लगातार शिकायतें आ रही हैं। हम एक पारदर्शी और बेहतर व्यवस्था चाहते हैं, भाई-भतीजावाद की व्यवस्था नहीं चलेगी। इन संस्थानों पर जितना पैसा सरकार द्वारा खर्च किया जा रहा है, उसका फायदा प्रदेश के विद्यार्थियों को होना चाहिए।

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