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आखिर कहां थे अधिकारी, यहां तो नगर परिषद की कई एकड़ जमीन में बस गई पूरी बस्ती

अब जब मामला मीडिया के माध्यम से उजागर हुआ तो प्रशासन के कान खड़े हुए और नगर परिषद ने अपनी जमीन की सुध ली। मौके पर जाकर देखा तो नजारा हैरान करने वाला था। नगर परिषद के स्वामित्व वाली करीब सौ एकड़ से अधिक इस जमीन के एक भाग पर एक पूरी बस्ती बस गई है। जिसको देखते ही नप के अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को मौके पर माइक से घोषणा करवाई कि जिन भी लोगों ने यहां अवैध कब्जा करके मकान बना लिए है वो तुरंत अपने आप कब्जा हटा लें अन्यथा नगर परिषद इनको हटाएगी और इसके लिए जो भी जानमाल का नुकसान होगा, उसके लिए अवैध कब्जाधारी खुद जिम्मेदार होगा।

आखिर कहां थे अधिकारी, यहां तो नगर परिषद की कई एकड़ जमीन में बस गई पूरी बस्ती
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नारनौल : गांव रघुनाथपुरा की पहाड़ी पर स्थित नप की जमीन पर बने मकान, माइक से घोषणा करती नप की गाड़ी। फोटो: हरिभूमि

हरिभूमि न्यूज : नारनौल

शहर के साथ लगते गांव रघुनाथपुरा की पहाड़ी और उसकी तलहटी पर स्थित नप की सैकड़ों एकड भूमि के एक भाग पर अवैध कब्जाकर पक्के मकान बनाकर पूरी बस्ती बस गई, लेकिन नगर परिषद के किसी अधिकारी का इस तरफ ध्यान नहीं गया। अब जब मामला मीडिया के माध्यम से उजागर हुआ तो प्रशासन के कान खड़े हुए और नगर परिषद ने अपनी जमीन की सुध ली। मौके पर जाकर देखा तो नजारा हैरान करने वाला था। नगर परिषद के स्वामित्व वाली करीब सौ एकड़ से अधिक इस जमीन के एक भाग पर एक पूरी बस्ती बस गई है। जिसको देखते ही नप के अधिकारियों ने मौके पर माइक से घोषणा करवाई कि जिन भी लोगों ने यहां अवैध कब्जा करके मकान बना लिए है वो तुरंत अपने आप कब्जा हटा लें अन्यथा नगर परिषद इनको हटाएगी और इसके लिए जो भी जानमाल का नुकसान होगा, उसके लिए अवैध कब्जाधारी खुद जिम्मेदार होगा।

नगर परिषद के सूत्रों के अनुसार खसरा नंबर 211, 204 तथा 214 आदि नंबरों की भूमि रघुनाथपुरा की पहाड़ी और इसके आसपास पड़ती है। इन खसरा नंबरों का कुल रकबा सौ एकड़ से भी अधिक बनता है और मालिक नगर परिषद है। इस जमीन पर अवैध कब्जा करके मकान बना लेने की सूचना पर आज मौके पर जाकर मुनादी करवा दी गई है। करीब 40 से 50 मकान मौके पर बने हुए हैं। अनेक मकानों पर पक्की छत है तो कइयों पर पक्की दीवार करके टीनशेड आदि डाले हुए हैं।

अब सवाल यह खड़ा होता है कि नगर परिषद की कई एकड़ भूमि पर 40 से 50 मकान बनकर एक पूरी बस्ती बस जाती है। जिस जगह पर अवैध कब्जा हुआ है वो शहर और नगर परिषद से महज तीन-चार किलामीटर की दूरी पर ऐसे स्थान पर स्थित हैं। जहां आ दिन नगर परिषद के अधिकारियों व प्रशासनिक अधिकारियों का आना-जाना लगा रहता है। इसी के बिल्कुल पास नगर परिषद की नंदी गौशाला बनी हुई है। जहां पर नप अधिकारी और कर्मचारी आते जाते रहते हैं, फिर भी किसी का ध्यान इस पर क्यों नहीं गया। दूसरा बड़ा सवाल इतनी बड़ी संख्या मेंं मकान एक-दो दिन या महीनों में नहीं बन सकते है। कई सालों से यह कारनामा चल रहा था तो आखिर नगर परिषद आंख मूंदकर क्यों बैठे रही। मामला सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद अब शहर में चर्चाओं का बाजार गर्म हो चुका है। लोगों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में नगर परिषद की सरकारी भूमि पर मकान बन जाना बिना मिलीभगत के संभव नहीं है। इस मामले की उच्च स्तरीय करके इसका खुलासा करना चाहिए।

हटाये जाएंगे अवैध कब्जा व निर्माण: ईओ

इस बारे में नगर परिषद के ईओ अभय सिंह यादव ने कहा कि कब्जा स्थल पर माइक से नप ने घोषणा करवा दी है। शीघ्र ही गांव रघुनाथपुरा की पहाड़ी के पास स्थित नगर परिषद की जमीन से अवैध कब्जे व निर्माण को हटाया जाएगा।

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