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किसानों के समर्थन में सड़कों पर उतरे वकील, सोमवार तक रखेंगे वर्क सस्पेंड

प्रदर्शन के माध्यम से वकीलों ने किसान आंदोलन का समर्थन करते हुए तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने, किसान नेताओं पर बनाए गए झूठे मुकदमों को खारिज करने की मांग की गई। फतेहाबाद में वकील बार प्रधान राजेन्द्र कुकड़ेजा के नेतृत्व में कोर्ट काम्पलैक्स से प्रदर्शन करते हुए शहर के विभिन्न बाजारों में गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

किसानों के समर्थन में सड़कों पर उतरे वकील, सोमवार तक रखेंगे वर्क सस्पेंड
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 रतिया : किसानों के समर्थन में प्रदर्शन करते वकील।

हरिभूमि न्यूज : फतेहाबाद/रतिया

किसान आंदोलन के समर्थन में और गणतंत्र दिवस के दिन लाल किले पर हुई घटना के विरोध में फतेहाबाद व रतिया में वकील सड़कों पर उतरे और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। फतेहाबाद में बार एसोसिएशन के आह्वान पर फतेहाबाद, रतिया व टोहाना में सोमवार तक वर्क सस्पेंड रखने का फैसला लिया गया। प्रदर्शन के माध्यम से वकीलों ने किसान आंदोलन का समर्थन करते हुए तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने, किसान नेताओं पर बनाए गए झूठे मुकदमों को खारिज करने की मांग की गई। फतेहाबाद में वकील बार प्रधान राजेन्द्र कुकड़ेजा के नेतृत्व में कोर्ट कॉम्प्लेक्स से प्रदर्शन करते हुए शहर के विभिन्न बाजारों में गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

रतिया में भी अधिवक्ताओं ने किसानों के समर्थन में केंद्र व राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन के दौरान अधिवक्तओंं ने जहां दिल्ली में शांतिपूर्ण तरीके से चल रहे जनआंदोलन को सरकार द्वारा दमनकारी नीतियों के तहत हथकंडे अपनाएं जाने का खुला विरोध किया वहीं उन्होंने सरकार से तीनों कृषि अध्यादेश कानून वापस लेने की मांग को भी प्रमुखता से उठाया।

अदालत परिसर में एकत्रित हुए बार एसोसिएशन के प्रतिनिधियों में शामिल मोहनलाल बैनीवाल, कृपाल बैनीवाल, कुलविंद्र ढिल्लों, बलवंत दंदीवाल, वेद कंबोज, गुरजीत ढोट, बिक्कर सिंह, बलजीत दंदीवाल, विकास दीप सिंह, हरजीवन सिंह, जगदेव ओलख व अन्य अधिवक्ताओं ने केंद्र सरकार व हरियाणा सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए कहा कि पिछले 2 माह से किसान कृषि कानूनों को रद्द करवाने के लिए शांतिमय ढंग से दिल्ली के बॉर्डर पर ठिठुरती हुई सर्दी में आंदोलन कर रहे हैं लेकिन सरकार अपने हठ के कारण इस काले कानून को वापस नहीं ले रही है बल्कि प्रतिदिन दमनकारी नीतियों को अपनाकर किसानों को आपस में बांटने का काम कर रही है।

उन्होंने दिल्ली के लाल किले पर हुए घटनाक्त्रम की निंदा करते हुए कहा कि सरकार द्वारा इसकी निष्पक्ष जांच करवानी चाहिए क्योंकि साजिश के तहत ही दिल्ली के लाल किले पर किसानों को बदनाम करने के लिए ऐसे घटनाक्रम को अंजाम दिया गया है। उन्होंने किसानों का खुला समर्थन करते हुए कहा कि जब तक सरकार कानून को वापस नहीं लेती, उनका समर्थन किसानों के साथ है और अगर उन्हें दिल्ली जाना पड़ा तो वहां अवश्य जाएंगे और वहां शांतिमय ढंग से आंदोलन कर रहे किसानों का खुला समर्थन भी करेंगे।

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