Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

Sunday Special: इस हिन्दू राजा ने बसाई थी राजधानी दिल्ली, जानिए क्या है इतिहासकारों की राय

Sunday Special: दिल्ली का इतिहास हिंदू तोमर राजा अनंगपाल के इस क्षेत्र पर अधिकार करने से शुरू होता है। उसने गुड़गांव जिले में अरावली की पहाडि़यों पर सूरजकुंड के समीप अपनी राजधानी अनंगपुर बनायी। लेकिन, कुछ समय बाद अनंगपाल ने इस स्थान को छोड़ वर्तमान कुतुब के समीप लाल कोट किला बनाया।

Sunday Special: इस हिन्दू राजा ने बसाई थी राजधानी दिल्ली, जानिए क्या है इतिहासकारों की राय
X

इस हिन्दू राजा ने बसाई थी राजधानी दिल्ली

दिल्ली का इतिहास अपने आप में विस्तारपूर्ण है। पहले इस शहर को इंद्रप्रस्थ के नाम से जाना जाता था, जहां कभी पांडव रहे थे। समय के साथ-साथ इंद्रप्रस्थ के आसपास आठ शहर लाल कोट, दीनपनाह, किला राय पिथौरा, फिरोजाबाद, जहांपनाह, तुगलकाबाद और शाहजहांनाबाद बसते रहे। ऐतिहासिक दृष्टि से दिल्ली का इतिहास हिंदू तोमर राजा अनंगपाल के इस क्षेत्र पर अधिकार करने से शुरू होता है। उसने गुड़गांव जिले में अरावली की पहाडि़यों पर सूरजकुंड के समीप अपनी राजधानी अनंगपुर बनायी। लेकिन, कुछ समय बाद अनंगपाल ने इस स्थान को छोड़ वर्तमान कुतुब के समीप लाल कोट किला बनाया। लाल कोट यानि लाल रंग का किला, जो कि वर्तमान दिल्ली क्षेत्र का प्रथम निर्मित नगर था। इस शहर को दिल्ली का पहला लालकिला भी कहा जाता है।

ऐतिहासिक शोधों से पता चलता है कि दिल्ली के पहले नगर लालकोट का निर्माण अनंगपाल ने करवाया था। इसके प्राचीन प्राचीर आज भी कुतुबमीनार के समीप देखे जा सकते हैं। उसके उत्तरी भाग को राय पिथौरा का किला और दक्षिणी भाग को लालकोट कहा जाता है। अंग्रेज इतिहासकार अलेक्जेंडर कनिंघम के अनुसार, अनंगपाल ने 1060 ईस्वी में लालकोट का निर्माण कराया। कनिंघम ने दिल्ली में पुराने सात किलों का होने की बात बतलाते हुए लाल कोट (किले) के निर्माण की बात कही है।

लालकोट को बढ़ाकर एक बड़ा किला बनवाया था और उसका नाम रखा था किला राय पिथौरा। यह दिल्ली का तीसरा शहर था जो दक्षिण में था। राय पिथौरा का निर्माण बारहवीं शताब्दी के मध्य या उत्तरार्ध में दिल्ली नामक हिंदू शहर की बाहरी मुस्लिम हमलों से रक्षा के लिए किया गया था। महरौली से प्रेस एन्कलेव तक राय पिथौरा के किले के अवषेष आज भी देखे जा सकते हैं। राय पिथौरा किला अब केवल 2 से 6 मीटर चौड़ी जीर्णशीर्ण दीवार के अवशेष के रूप में दिखाई देता है। राय पिथौरा का किला लाल कोट को तीन छोर से घेरता था। इसका निर्माण आक्रमणकारियों से दिल्ली की रक्षा के लिए किया गया था।

दिल्ली का सर्वाधिक प्राचीन किला लालकोट था जिसे तोमर शासक अनंगपाल द्वितीय ने ग्यारहवीं शताब्दी के मध्य में बनवाया था। इसकी ऊंची दीवारें, विषाल दुर्ग और प्रवेश द्वार सभी ध्वंस्त हो चुके हैं और मलबों से जहां-तहां ढके हुए हैं। इसके प्राचीर की दीवार की परिधि लगभग 3.6 किलोमीटर थी, जो कि 3 से 9 मीटर की असमान मोटाई की थी। दुर्ग का कुल क्षेत्रफल 7,63,875 वर्ग मीटर है। उल्लेखनीय है कि प्राचीन काल में महरौली मिहिरपुरी कहलाती थी। महरौली के पास प्राचीन अवशेषों का एक समूह अनेक मीलों में फैला हुआ है। इसी क्षेत्र में एक लौह स्तंभ भी हैं, जिसे 400 ईस्वीं में ढाला गया था। अनंगपाल ने मौर्य साम्राज्य के संस्थापक सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य के साहसी कारनामों की स्मृति में इस स्तंभ को स्थापित कराया था।लालकोट के भग्नावषेश अब तक वर्तमान है।

यह लाल कोट दिल्ली के लाल किले से 500 साल से भी अधिक समय पहले बनाया गया था। महरौली में इसके अवशेष अभी भी दिखाई देते हैं। लालकोट की दीवारें अभी मौजूद हैं। लाल कोट एक विषम आकृति का आयतकार किला है। इसका व्यास सवा दो मील तक फैला है। कुतुब क्षेत्र में स्थित इसकी दीवारें तुगलकाबाद की तरह विशाल और ऊँची है। किले की प्राचीर 28 से 30 फुट चौड़ी और 60 फुट ऊँची है। किले की दीवारें 1475 फुट चौड़ी थीं और उनमें थोड़ी-थोड़ी दूरी पर बुर्ज थे। किले के चार दरवाजे थे जिनमें से तीन अभी तक है। पश्चिमी दरवाजे को रणजीत द्वार कहा जाता था। विदेशी मुस्लिम आक्रमणकारियों ने इसका नाम गजनी द्वार रख दिया।

Next Story