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श्रीराम मंदिर की पूजा में छत्तीसगढ़ की पवित्रता भी शामिल, नदियों का जल और मिट्टी कोरियर से भेजी गई अयोध्या

5 अगस्त को मंदिर का शिलान्यास किया जाएगा। मंदिर के निर्माण में 51 नदियों व पवित्र तीर्थों से मिट्टी व जल भेजा गया है। इसमें छत्तीसगढ़ की नदियों की पवित्रता भी शामिल हैं। छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, असम, महाराष्ट्र, कर्नाटक व बंगाल से कोरियर के माध्यम से जल व मिट्टी अयोध्या पहुंची है, जिसे ट्रस्ट कार्यालय में सुरक्षित रखा गया है। इसका शिलान्यास के समय उपयोग किया जाएगा। सवा लाख दीप प्रज्ज्वलित होंगे। वहीं, मंदिर शिलान्यास के दिन पूरे अयोध्या नगर में लोगों को देशी घी के लड्डु बांटे जाएंगे।

श्रीराम मंदिर की पूजा में छत्तीसगढ़ की पवित्रता भी शामिल, नदियों का जल और मिट्टी कोरियर से भेजी गई अयोध्या
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अयोध्या/रायपुर. 5 अगस्त को मंदिर का शिलान्यास किया जाएगा। मंदिर के निर्माण में 51 नदियों व पवित्र तीर्थों से मिट्टी व जल भेजा गया है। इसमें छत्तीसगढ़ की नदियों की पवित्रता भी शामिल हैं। छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, असम, महाराष्ट्र, कर्नाटक व बंगाल से कोरियर के माध्यम से जल व मिट्टी अयोध्या पहुंची है, जिसे ट्रस्ट कार्यालय में सुरक्षित रखा गया है। इसका शिलान्यास के समय उपयोग किया जाएगा। सवा लाख दीप प्रज्ज्वलित होंगे। वहीं, मंदिर शिलान्यास के दिन पूरे अयोध्या नगर में लोगों को देशी घी के लड्डु बांटे जाएंगे।

बन रहे एक लाख ग्यारह हजार लड्डू

ट्रस्ट के मुताबिक भूमि पूजन के दिन रामलला को भोग लगाने के लिए अयोध्या की मणिरामदास छावनी में एक लाख 11 हजार लड्डुओं को तैयार किया जा रहा है। इन्हें स्टील के डिब्बों में पैक कर अयोध्या और अन्य तीर्थ क्षेत्रों में वितरण किया जाएगा। लड्डू बनाने का काम देवराहा बाबा (चित्रकूट) स्थल से जुड़े अनुयायी कर रहे हैं।

67 एकड़ जमीन श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को ट्रांसफर

अयोध्या। श्रीरामजन्मभूमि पर राममंदिर के निर्माण की विधिक प्रक्रिया भी तेजी से पूरी का जा रही है। विधिक प्रक्रिया के तहत राम मंदिर के लिए उच्चत्तम न्यायालय के निर्णय के अनुरूप गर्भगृह पर जहां पर मंदिर का निर्माण किया जाना है, उसकी 2.77 एकड़ भूमि का स्थानांतरण राम लला को करने की औपचारिकता पूरी कर दी गई है। इसके साथ ही पूर्व में अधिग्रहीत 67.27 एकड़ भूमि श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र तो स्थानांरित करने की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार दोपहर को फिर अयोध्या पहुंचेंगे और पांच अगस्त के कार्यक्रम की एक-एक कर पूरी तैयारी का जायजा लेंगे। मुख्यमंत्री योगी की अपील पर तीर्थ नगरी मथुरा, काशी, चित्रकूट, प्रयागराज नैमिषारण्य और गोरखपुर में भी 4 और 5 को अखंड रामायण का पाठ और दीपावली मनाई जाएगी।

15 लाख 59 हजार की चांदी की ईंंट

5 अगस्त को भूमि पूजन के बाद पीएम मोदी चांदी की ईंट से मंदिर निर्माण का शिलान्यास करेंगे। यह शुद्ध चांदी की 22.6 किग्रा वजन की ईंट है। इस ईंट की कीमत करीब 15 लाख 59 हजार है। राम मंदिर के भूमिपूजन का मुहूर्त 12 बजकर 15 मिनट 15 सेकेंड से 12 बजकर 15 मिनट 47 सेकेंड तक है। यानी 32 सेकंड में भूमि पूजन होगा।

साढ़े 3 किमी में सज रही अयोध्या

अयोध्या नगर साढ़े 3 किमी तक सजाया जा रहा है। अयोध्या बाइपास पर राम की गाथा का चित्रण किया जाएगा, ताकि वहां से गुजरते ही राम जन्मभूमि का एहसास हो। भगवान श्रीराम के जीवन वृत्तांत का दीवारों पर चित्रण, लैंडस्कैपिंग, हरे-भरे पौधे और वृक्ष, साथ ही साथ फव्वारे और रंग बिरंगी रोशनी की जा रही है।

सोमवार से शुरू होगा उत्सव

अयोध्या में 3 अगस्त से ही उत्सव शुरू हो जाएगा। दीवाली जैसा माहौल बनाया जाएगा। अयोध्यावासी भी मकानों के बाहर दिए जलाएंगे। भूमि पूजन के दिन रामलला हरे रंग के नवरत्न जड़ित वस्त्र पहनेंगे। भूमि पूजन के दिन भगवान राम के अलावा तीनों भाई लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न और हनुमानजी को नई पोशाक पहनाई जाएगी।

सरयू नदी का आरती स्थल

अयोध्या सज रही है। दही, दूब, गो रोचन, फल, फूल और मंगल के मूल नवीन तुलसी दल से। लोग सोने-चांदी से अयोध्या को पाट रहे हैं। इतना सोना चांदी आ रहा है कि ट्रस्ट कह रहा है कि मत भेजिए। भव्य भूमि पूजन की तैयारी चल रही हैं। घर, गलियां सज रही हैं । बिल्कुल वैसे ही जैसे त्रेता युग में भगवान राम लौटे थे अयोध्या। जैसा रामचरित मानस में तुलसीदास ने कहा है-

दधि दुर्बा रोचन फल फूला। नव तुलसी दल मंगल मूला।

भरि भरि हेम थार भामिनी। गावत चलिं सिंधुरगामिनी।

अयोध्या के रास्ते सुंदर बना दिए गए हैं उन्हें अलंकृत कर और सजाकर सब लोगों ने अपने-अपने दरवाजों पर रख लिया। सब लोगों ने मंगल के लिए बंदनवार, ध्वजा लगानी शुरू कर दी हैं। जैसा तुलसीदास जी ने कहा है-

कंचन कलस बिचित्र सँवारे। सबहिं धरे सजि निज निज द्वारे।

बंदनवार पताका केतू। सबन्हि बनाए मंगल हेतू।

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