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15 विधायकों को सरकार का गिफ्ट, बनाए गए संसदीय सचिव, सीएम हाउस में आज शाम लेंगे शपथ

युवा और बड़े नेताओं को हराकर विधानसभा पहुंचने वालों को मिली खास तवज्जो

15 विधायकों को सरकार का गिफ्ट, बनाए गए संसदीय सचिव, सीएम हाउस में आज शाम लेंगे शपथ
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रायपुर. छत्तीसगढ़ में निगम, मंडल, आयोग और प्राधिकरणों में नियुक्तियों के साथ ससंदीय सचिवों की नियुक्तियों को लेकर महीनों से चल रहे विचार-विमर्श का नतीजा आ ही गया। सरकार की तरफ से पहला गिफ्ट 15 विधायकों को मिला। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने हर मंत्री के साथ एक संसदीय सचिव नियुक्त किया है। ये सभी मंगलवार को सीएम हाउस में शपथ लेंगे।

खास बात ये है कि सरकार ने इन नियुक्तियों में सियासी गणित साधा है। ऐसे जिलों में, जहां मंत्री नहीं हैं, वहां से संसदीय सचिव बनाए गए हैं। उन युवा विधायकों को तवज्जो दी गई है, जो पूर्ववर्ती सरकार के बड़े नेताओं को हराकर विधानसभा पहुंचे हैं। क्षेत्रीय व जातीय समीकरणों का भी ध्यान रखा गया है।

मंत्रियों के साथ रहेंगे संसदीय सचिव

प्रदेश में 15 संसदीय सचिवों की नियुक्ति के साथ ही यह भी तय किया गया है कि हर मंत्री के साथ एक संसदीय सचिव होगा, मुख्यमंत्री के साथ संसदीय सचिवों की संख्या 3 हो सकती है। किस मंत्री के साथ कौन संसदीय सचिव होगा। नियुक्तियों के पहले नाम तय करने की प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग स्तरों पर चर्चा हुई। इसके बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सोमवार रात अपने करीबी सहयोगियों के साथ बैठक कर ये तय कर चुके हैं कि संसदीय सचिवों को कौन से विभाग दिए जाएंगे। मंगलवार को कैबिनेट की बैठक के बाद शाम 4 बजे संसदीय सचिवों को मुख्यमंत्री निवास पर शपथ दिलाई जाएगी।

आज शाम 4 बजे लेंगे शपथ

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 14 जुलाई को शाम 4 बजे अपने रायपुर निवास कार्यालय में आयोजित समारोह में 15 संसदीय सचिवों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। शपथ लेने वाले संसदीय सचिवों में द्वारिकाधीश यादव, विनोद सेवनलाल चंद्राकर, चंद्रदेव राय, शकुंतला साहू, विकास उपाध्याय, अंबिका सिंहदेव, चिंतामणि महाराज, यूडी मिंज, पारसनाथ राजवाड़े, इंदरशाह मण्डावी, कुंवरसिंह निषाद, गुरुदयाल सिंह बंजारे, डाॅ. रश्मि आशीष सिंह, शिशुपाल सोरी और रेखचंद जैन शामिल हैं।

संसदीय सचिवों के लिए चयन का समीकरण

संसदीय सचिवों की नियुक्ति का अधिकार मुख्यमंत्री को उसी प्रकार है, जैसा कि अपने मंत्रिमंडल में मंत्रियों की नियुक्ति का होता है, यानी संसदीय सचिव तय करना मुख्यमंत्री के क्षेत्राधिकार की बात है। वैसे भी संसदीय सचिव विधानसभा में मंत्रियों के सहयोगियों के रूप में काम करते हैं। सदन में मंत्री की उपस्थिति या 8शेष पेज 7 पर

अनुपस्थिति में वे मंत्री की ओर से विधायकों के सवालों के जवाब प्रस्तुत करते हैं। जहां तक नियुक्तियों का सवाल है, नाम तय करने में सियासी, क्षेत्रीय, जातिगत समीकरणों का ध्यान रखा गया है। ऐसे जिलों के विधायकों के संसदीय सचिव बनाया गया है, जहां मंत्री नहीं हैं। इसके साथ उन युवा विधायकों को तवज्जो दी गई है, जो पूर्व सरकार के बड़े नेताओं को हराकर आए हैं। 15 संसदीय सचिवों के नाम सामने आए हैं, उनमें एसटी, एससी, ओबीसी व सामान्य वर्ग के विधायक शामिल हैं।

सियासी समीकरण

शपथ लेने वाले संसदीय सचिवों में सामान्य वर्ग से चार

एससी वर्ग से दो

एसटी वर्ग के चार

अन्य पिछड़ा वर्ग से पांच

क्षेत्रीय समीकरण

सरगुजा संभाग- 4

बिलासपुर संभाग-1

रायपुर संभाग - 5

दुर्ग संभाग- 3

बस्तर संभाग- 2

हाईकोर्ट दे चुका है संसदीय सचिवों पर फैसला

छत्तीसगढ़ में पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में संसदीय सचिवों की नियुक्तियों का मामला लंबे समय तक विवादों में रहा है। लंबी सुनवाई के बाद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पिछली सरकार द्वारा की गई संसदीय सचिवों की नियुक्तियों को सही ठहराया था। साथ ही संसदीय सचिवों को मंत्रियों की तरह मिलने वाले अधिकारों को लेकर भी स्थिति साफ की थी। बताया गया है कि ससंदीय सचिवों को मंत्रियों के समान सुविधाएं तो मिल सकती हैं, लेकिन वे मंत्रियों की तरह स्वेच्छानुदान के अधिकार का उपयोग नहीं कर सकते।

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