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20 लाख के धंधे में कोरोना ग्रहण, नगाड़े वालों का बजा बैंड, आधी कीमत पर भी ग्राहकों का टोटा

कोरोनाकाल में होली उत्सव के कार्यक्रमों पर प्रशासन द्वारा रोक लगाए जाने के बाद अब नगाड़े वालों का बैंड बज गया है। सार्वजनिक होली महोत्सव के साथ डीजे और नगाड़ा बजाने पर प्रतिबंध के आदेश से नगाड़ा लाने वालों को इस होली में सीधे 20 लाख रुपये तक के नुकसान का अनुमान है।

20 लाख के धंधे में कोरोना ग्रहण, नगाड़े वालों का बजा बैंड, आधी कीमत पर भी ग्राहकों का टोटा
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बैंड (प्रतीकात्मक तस्वीर)

कोरोनाकाल में होली उत्सव के कार्यक्रमों पर प्रशासन द्वारा रोक लगाए जाने के बाद अब नगाड़े वालों का बैंड बज गया है। सार्वजनिक होली महोत्सव के साथ डीजे और नगाड़ा बजाने पर प्रतिबंध के आदेश से नगाड़ा लाने वालों को इस होली में सीधे 20 लाख रुपये तक के नुकसान का अनुमान है। खैरागढ़ और डोंगरगढ़ से नगाड़ा बेचने वालों ने पंद्रह दिन पहले ही बल्क में नगाड़ा का स्टॉक रायपुर मंगवा लिया था। नगाड़ा कारोबार के लिए छोटे-छोटे गांवों में यहां से नगाड़ा सप्लाई किया जाता है।

ऐसे में इतने बड़े नुकसान की चिंता ने माथे पर पसीना ला दिया है। हर साल की तरह इस बार भी गंज क्षेत्र और कालीबाड़ी में नगाड़ा बेचने तंबू गड़ाए गए हैं। दो रोज पहले ही जैसे नगाड़ा बजाने पर प्रतिबंध का आदेश जारी हुए कारोबारियों को पसीना छूट गया है। शहर में हर साल खैरागढ़ और डाेंगरगढ़ से लाखों की संख्या में नगाड़ा लाकर बेचा जाता है।

डोंगरगढ़ से आए अशोक कुमार और खैरागढ़ से पहुंचे कि पिछले साल नगाड़ा के बिजनेस में अच्छा खासा घाटा लॉकडाउन में हुआ था। इस बार अनलाॅक के हालात में नगाड़ा बेचने वालों ने उससे भी स्टॉक को डबल करते हुए आर्डर दे दिया। शिवरात्रि को देखते हुए रायपुर में कालीबाड़ी, गंज, टिकरापारा, गुढ़ियारी और दूसरे बाजारों में तंबू लगा लिए। अब लॉकडाउन लगने का हल्ला के बाद प्रशासन की ओर से ऐसा आदेश निकला कि लाखों रुपये का धंधा करने का सपना ही चूर हो गया।

5000 वाले पहुंचे 1200 में

जो नगाड़े साइज में बड़ होते हैं दो साल पहले तक उनकी कीमतें 4 से 5 हजार रुपये तक में थीं। दो दिन पहले ये नगाड़े मंदी को देखते हुए 3 हजार रुपये तक बेचे जा रहे थे लेकिन जैसे ही फरमान जारी हुआ इनकी कीमतें और भी आधी हो गईं। नगाड़ा बेचने वालों ने बताया कि 12 से 13 सौ रुपये तक कीमतों में नगाड़ा बेचने दाम खोले लेकिन उनके पास ग्राहक ही नहीं आ रहे। ग्राहक आ भी रहे तो सिर्फ प्रशासनिक नियमों का हवाला देकर खरीदारी से इनकार कर रहे।

ट्रांसपोर्ट चार्ज ने ही रुला दिया

खैरागढ़ और डाेंगरगढ़ में नगाड़ा बनाया जाता है। वहां से स्टॉक रायपुर लाया गया था। लॉकडाउन खुलने के बाद ईंधन की बढ़ती कीमत की वजह से स्टॉक मंगवाने भारी भरकम भाड़ा देना पड़ा। यहां से छोटे-छोटे आर्डर आने पर गांवों में भी नगाड़ा भेजे। अब हालत ऐसी बन गई कि ट्रांसपोर्ट चार्ज तक वसूल कर पाना मुश्किल लग रहा है। होली के एक हफ्ता पहले बिकने वाले नगाड़े के शोर खामोश हो गए।

नगाड़ा बजा तो झुंड लगना तय

प्रशासनिक आदेश में साफ कर दिया गया है कि कहीं भी नगाड़ा या फिर डीजे साउंड का इस्तेमाल नहीं होगा। अधिकारियों का तर्क है कि अगर कहीं भी धवनि विस्तारक यंत्रों का इस्तेमाल हुआ या फिर नगाड़ा बजाने आयोजन किया गया तो यहां झुंड लगेगा। ऐसे में कोविड का खतरा बढ़ जाएगा।

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