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नक्सलियों को कारतूस सप्लाई मामले में ASI और एक जवान भी शामिल ! मोबाइल ट्रेसिंग के जरिये मिले सुराग

700 जिंदा कारतूस के साथ चार सप्लायर को सुकमा पुलिस ने किया था गिरफ्तार। पढ़िए पूरी खबर-

नक्सलियों को कारतूस सप्लाई मामले में ASI और एक जवान भी शामिल ! मोबाइल ट्रेसिंग के जरिये मिले सुराग
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सुकमा। सुकमा जिले में बीते शनिवार को पुलिस ने शहरी नेटवर्क का खुलासा करते हुए 700 जिंदा कारतूस के साथ चार सप्लायरों को गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में पुलिस के 1 जवान व एएसआई की संलिप्तता का मामला सामने आया है। इस पूरे मामले में एएसआई और आरमोरर को भी हिरासत में लिया गया है और उनसे भी पूछताछ की जा रही है। नक्सलियों के सप्लाई चैन में इनकी अहम भूमिका होने की बात कही जा रही है।

पहले भी एएसआई और आरमोरर द्वारा नक्सलियों को कारतूस व अन्य जरूरी सामग्री सप्लाई किया गया है। हालांकि पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने नक्सलियों को कारतूस की सप्लाई करने में जवानों की भूमिका से इंकार किया है। पुलिस अधीक्षक सुकमा शलभ सिन्हा ने इस मामले पर कहा इस मामले में एसआईटी गठित की गई है। जवानों की संलिप्ता पर अभी कुछ भी कह पाना मुश्किल है। जांच टीम को अहम सुराग हाथ लगे हैं। कई बिंदुओं पर जांच की जा रही है। नक्सलियों के सप्लाई चैन में शामिल और भी लोगों के नामों का खुलासा जल्द किया जायेगा।

कांकेर जिले में नक्सल मामलों में हुए खुलासे में शहरी नेटवर्क के तार सुकमा से जुड़ते मिले हैं। मोबाइल ट्रेसिंग के जरिये पुलिस ऐसे पुलिसकर्मियों पर नजर रखने लगी थी। इसी बीच गुप्त सूचना मिली थी कि नक्सलियों को गोलियों की सप्लाई होने वाली है। इसके मद्देनजर एक विशेष टीम का गठन किया गया। जिसकी कमान स्वयं पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा ने संभाल रखी थी। 3—4 जून को एएसआई और सप्लायरों के बीच कारतूस सप्लाई की योजना बनी। सप्लायर लगातार एएसआई के संपर्क में थे। पुलिस की विशेष टीम ने सप्लायारों को घेराबंदी कर धरदबोचा। इसके बाद कारतूस का बैग लेकर पहुंचे एएसआई को भी पुलिस ने पकड़ लिया। पुलिस ने मौके से दो सप्लायर और एक एएसआई को हिरासत में लिया और आरमोरर को इंदिरा कॉलोनी स्थित उसके घर उठाया।

जवानों पर पुलिस लगातार नजर बनाए हुए थी

लगातार पुलिस की कार्रवाई में शहरी नेटवर्क का खुलासा हुआ है। कांकेर में कुछ माह पहले सप्लायरों से पूछताछ में सुकमा के कुछ पुलिसकर्मियों के शामिल होने की जानकारी मिली। इसके बाद से सुकमा पुलिस एएसआई पर नजर बनाये हुई थी। एएसआई की संदिग्ध गतिविधियों के कारण पुलिस का शक यकीन में बदल गया। एएसआई का फोन ट्रेस किया गया, जिसमें एएसआई लगातार नक्सल सप्लायरों के संपर्क में था। कारतूस का बड़ा खेप आरमोरर के सहयोग से सप्लायारों तक पहुंचा रहा था।

पूर्व में सबक लिया होता तो नहीं होती सेंधमारी

नक्सलियों तक बड़ी मात्रा में असलहा बारूद की सप्लाई का एक बड़ा स्त्रोत पुलिस जवान रहे हैं। दक्षिण बस्तर में पूर्व के कुछ मामलो पर प्रकाश डालें तो वर्दी वाले ही सरकारी कारतूस और हथियार सप्लाई करते पकड़े गये हैं। सुकमा जिले में पुलिस जवानों द्वारा नक्सलियों को कारतूस सप्लाई करने का यह नया मामला नहीं है। पहले भी कई मामले सामने आये हैं, जिसे विभागीय स्तर पर दबा दिया गया।

जानकारी के अनुसार साल 2013 में नक्सली से पुलिस में शामिल हुए आरक्षक द्वारा नक्सलियों को हथियार व कारतूस सप्लाई करते पकड़ा गया था। पूछताछ कर उसे माफ कर दिया।

इसके बाद साल 2016 में डीआरजी के कुछ जवानों पर भी नक्सलियों को कारतूस सप्लाई करने का आरोप लगा था।

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