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सरकारी निर्देशों को ठेंगा: एम्बुलेंस नहीं मिली तो आठ वर्षीय बच्ची ने तड़प-तड़पकर तोड़ दिया दम

बिहार सरकार ने सूबे में हर मरीज के लिए फ्री 102 एम्बुलेंस सेवा उपलब्ध कराने के निर्देश जारी किए हैं। बावजूद इसके मुंगेर की बीमार बच्ची को एक सरकारी अस्पताल से दूसरे में पहुंचने के लिए एम्बुलेंस सेवा उपलब्ध नहीं करवाई गई। जिसकी वजह से बच्ची को बेहतर ईलाज मिलने में काफी देरी हो गई व बच्ची ने तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया।

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एंबुलेंस (प्रतीकात्मक तस्वीर)

बिहार सरकार (Government of Bihar) ने सूबे में हर तरह के मरीजों के लिए 102 एम्बुलेंस सेवा (102 Ambulance Service) फ्री उपलब्ध करने का आदेश जारी किया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस संबंध में बिहार राज्य स्वास्थ्य समिति (Bihar State Health Society) की ओर से राज्य में सभी सिविल सर्जन के लिए इस संबंध में निर्देश भी जारी कर दिए हैं। बावजूद इसके प्रदेश में मरजों के लिए मुफ्त एम्बुलेंस सेवा (Free Ambulance Service) उपलब्ध नहीं करवाई जा रही है। ऐसा ही एक ताजा मामला बिहार (Bihar) के मुंगेर (Munger) जिले से सामने आया है। यहां एक आठ वर्षीय बच्ची ने एम्बुलेंस सेवा नहीं मिलने की वजह से तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया है।

मुंगेर जिले के असरगंज थाना इलाके के चोरगांव से यह दर्दनाक घटना सामने आई है। बताया जा रहा है कि यहां के निवासी रामजी ठाकुर की 8 वर्षीय बेटी खुश्‍बू कुमारी सीटी को बजा-बजाकर खेल रही थी। ये सीटी प्‍लास्टिक की थी। खेलने के क्रम में सीटी बच्ची खुश्‍बू कुमारी के गले में फंस गई। जसके बाद खुश्‍बू कुमारी तड़पने लगी। बच्ची ने मुश्किल से इस घटना के बारे में अपनी मां को बताया। इस बात को सुनकर पूरा परिवार घबरा गया। वे तुरंत बच्ची को नजदीकी असरगंज प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र लेकर पहुंचे।

जहां चिकित्सकों ने बच्ची की प्राथमिक स्वास्थ्य जांच की। बच्ची की हालत को नाजुक देखते हुए डॉक्टरों ने उसे मायागंज अस्‍पताल भागलपुर रेफर कर दिया। भागलपुर में बच्ची को स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र प्रभारी चिकित्सक विपिन कुमार ने तुरंत देखा। यहां से भी पीड़ित बच्ची को पटना के लिए रेफर कर दिया गया। लेकिन बच्ची ने पटना जाने के क्रम में तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया।

बच्‍ची के परिवार जनों ने आरोप लगाया कि प्रखंड के अस्पताल प्रभारी ने एम्बुलेंस की

घटना के बाद परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका आरोप है कि प्रखंड स्तर पर जीवन और मौत से झुझती बच्ची को एम्बुलेंस की सेवा उपलब्ध नहीं करवाई गई। जहां से चिकित्सकों (डॉक्टरों) ने बच्ची को अकबरनगर अस्‍पताल भेजा था। यहां से पीड़ित बच्ची को परिजन एक टेम्‍पो की मदद से भागलपुर मायागंज अस्तपताल लेकर पहुंचे थे। वहां के डॉक्‍टरों ने बच्‍ची को अकबरनगर अस्‍पताल भेज दिया। परिजन सरकारी अस्‍पतालों के रवैए से भी तंग आ गए। इसके बाद वो भागलपुर के प्राइवेट अस्‍पतालों में भी बीमार बच्ची को लेकर ईलाज के लिए पहुंचे। लास्ट में परिजन बच्ची को लेकर पटना जा रहे थे। इसी दौरान बच्ची ने रास्‍ते में तड़प-पड़पकर दम तोड़ दिया।

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