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राजस्थान में सियासी समीकरण बदले, गहलोत सरकार से बीटीपी के दो विधायकों ने वापस लिया समर्थन

बीटीपी ने राजस्थान की कांग्रेस सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया है। जिसके बाद राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार के सामने संकट पैदा हो गया है। बीटीपी के ये दोनों विधायक लगातार गहलोत सरकार का समर्थन करते आ रहे थे।

two btp mla withdraw support from ashok gehlot government in rajasthan
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अशोक गहलोत 

राजस्थान में कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार को बड़ा झटका लगा है। जानकारी मिल रही है कि पंचायत चुनाव में कांग्रेस को मिली हार के बाद राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार के सामने नया संकट पैदा हो गया है। जानकारी के अनुसार बीटीपी (भारतीय ट्राइबल पार्टी) ने राजस्थान में कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया है। बताया जाता है कि बीटीपी के ये दोनों एमएलए बीते काफी समय से लगातार कांग्रेस सरकार को समर्थन देते आ रहे थे। जानकारी के मुताबिक बीटीपी के इन दोनों विधायकों ने इस वर्ष की शुरुआत में भी विधानसभा में अशोक गहलोत सरकार को अपना समर्थन दिया है। इस दौरान गहलोत सरकार ने विधानसभा में जब अपना बहुमत साबित किया था।

बीटीपी कांग्रेस से थी नाराज

अशोक गहलोत सरकार से बीटीपी के दो एमएलए रामप्रसाद व राजकुमार रोत ने पार्टी अध्यक्ष एवं गुजरात के विधायक महेश वसावा से समर्थन वापसी लेने की बात कही थी। इनकी बात पर पर अमल करते हुए महेश वसावा ने अपना निर्णय ले लिया है। इसके अलावा बीटीपी के इन विधायकों ने सचिन पायलट के बगावत ही नहीं, बल्कि राज्यसभा चुनाव के दौरान भी कांग्रेस प्रत्याशी केसी वेणुगोपाल व नीरज डांगी के पक्ष में मतदान किया था। पर जिला परिषद का चुनाव कांग्रेस से नाता तोड़ने के लिए उन्हें मजबूर कर दिया। कांग्रेस को हाल में हुये राज्य पंचायत समिति के चुनाव में कई सीटों पर नुकसान हुआ है। बीटीपी विधायकों का आरोप है कि चुनावों में कांग्रेस ने उसका साथ नहीं दिया व उन्हें धोखा दिया है। राज्य पंचायत समिति के चुनावों में 1833 सीटों पर भाजपा ने जीत हासिल की है। वहीं कांग्रेस को 1713 सीटों पर जीत हासिल करने में कामयाब हुई है। इसके अतिरिक्त भाजपा का जिला प्रमुख के चुनावों में भी प्रदर्शन कांग्रेस से काफी बेहतर प्रदर्शन रहा है।

याद रहे, आदिवासी डूंगरपुर जिले में जिला परिषद सदस्यों के चुनाव में बीटीपी को सबसे ज्यादा सीटें हासिल हुई थी। पर कांग्रेस व भाजपा के हाथ मिलाने के चलते बीटीपी का जिला प्रमुख नहीं बन सका। वहीं, डूंगरपुर में भाजपा ने अपना जिला प्रमुख बना लिया। सियासी समीकरणों पर ध्यान दिया जाये तो बीटीपी के दो विधायकों के समर्थन वापस ले लिये जाने से राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है। क्योंकि अब कांग्रेस सरकार के पास राजस्थान विधानसभा में बहुमत है। पर राजस्थान में कुछ विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना है। राजस्थान में कुल विधानसभा की कुल 200 सीटें हैं। जिनमें से अभी गहलोत सरकार के पास 118 हैं। वैसे तो गहलोत सरकार को समर्थन देने वालों में कई निर्दलीय विधायक भी शामिल हैं।

बीते दिनों सीएम गहलोत ने जाहिर की थी चिंता

सीएम अशोक गहलोत ने बीते दिनों पहले चिंता जताई थी कि राज्य में फिर एक बार हमारी सरकार गिराने की हलचल शुरू हो गई है। गहलोत की ओर से यह दावा पार्टी के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए किया था। उनकी आशंका के अनुसार, भाजपा एक बार फिर से राजस्थान व महाराष्ट्र में सरकार बनाने की कोशिश कर सकती है। याद रहे, इस वर्ष की शुरुआत में ही राजस्थान कांग्रेस दो गुटो में बंट गई थी। उस दौरान विधायक सचिन पायलट खफा होकर अपने समर्थक विधायकों के साथ अलग हो गए थे। राजस्थान में यह सियासी ड्रामा लंबे वक्त तक चला जिसके बाद सचिन पायलट माने व वापस आए। पर तब से अबतक सचिन पायलट को राजस्थान सरकार में कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं मिली है।

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