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एएनआईटी ने बनाया अनोखा सेनिटाइजेशन उपकरण, डिब्बा बंद खाना, नोट भी कर सकेंगे सेनिटाइज

जालंधर के डॉ. बी. आर. आंबेडकर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी ने टाइमर से लैस एक ऐसा सेनिटाइजेशन उपकरण बनाया है जो पराबैंगनी किरणों की मदद से सूक्ष्मजीवी रोगाणुओं को खत्म कर देता है। इस उपकरण से डिब्बाबंद खाना, क्रेडिट कार्ड और नोट जैसी चीजें भी बड़े आराम से संक्रमणमुक्त की जा सकती हैं।

एएनआईटी ने बनाया अनोखा सेनिटाइजेशन उपकरण, डिब्बा बंद खाना, नोट भी कर सकेंगे सेनिटाइज
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सेनेटाइज उपकरण

चंडीगढ़। जालंधर के डॉ. बी. आर. आंबेडकर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी ने टाइमर से लैस एक ऐसा सेनिटाइजेशन उपकरण बनाया है जो पराबैंगनी किरणों की मदद से सूक्ष्मजीवी रोगाणुओं को खत्म कर देता है। इस उपकरण से डिब्बाबंद खाना, क्रेडिट कार्ड और नोट जैसी चीजें भी बड़े आराम से संक्रमणमुक्त की जा सकती हैं। डिब्बे के आकार के इस उपकरण में ऊपर और नीचे की ओर अल्ट्रा वॉयलेट रोशनी लगी हैं।

एएनआईटी ने एक बयान में कहा कि इस उपकरण की मदद से डिब्बा बंद खाद्य वास्तुओं, नोट, क्रेडिट कार्ड के अलावा अखबार, फाइलें, उपयोग किए जा चुके मास्क और दस्ताने, चाबियां आदि वस्तुएं संक्रमण मुक्त की जा सकेंगी। इसमें बताया गया कि जब किसी भी वस्तु को इसके भीतर रखा जाता है तो यूवी किरणें उसकी सतह पर मौजूद अतिसूक्ष्म रोगाणु मसलन वायरस, बैक्टीरिया और फुफुंद को खत्म कर देती हैं। बयान में कहा गया कि यूवी किरण का इस्तेमाल खाद्य उद्योग में बड़े पैमाने पर होता है क्योंकि यह पूरी तरह सुरक्षित है, इसके अधिक रखरखाव की आवश्यकता नहीं होती और इसमें किसी तरह के रसायन या कीटनाशक की आवश्यकता नहीं होती। इसे एनआईटी के निदेशक डॉ. एल. के. अवस्थी और सहायक प्रोफेसर डॉ. कुलदीप सिंह नागला ने बनाया है। अवस्थी ने कहा कि अन्य उपकरणों के मुकाबले इसका इस्तेमाल ज्यादा आसानी से किया जा सकता है।

नागला ने कहा कि यह उपकरण बहुत सुरक्षित है क्योंकि उपयोगकर्ता यूवी किरण के संपर्क में नहीं आता है।

उन्होंने बताया कि जैसे ही इसे खोला जाता है, इसमें मौजूद यूवी लाइट अपनेआप बंद हो जाती है।

उन्होंने बताया कि उपयोगकर्ता वस्तु और उसके आकार के मुताबिक टाइमर की मदद से समय निर्धारित कर सकता है। अवस्थी ने बताया कि इस उपकरण के पेटेंट के लिए अनुरोध भेजा चुका है और इसके व्यावसायिक उत्पादन के लिए एक निजी कंपनी से एनआइटी की बात चल रही है।

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