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हिमाचल: खलीनी के सौरभ हाईड्रॉ पोनिक विधि से उगा रहे हैं ताजा सब्जियां

हिमाचल के खलीनी निवासी सौरभ राठौर अपने घर की छत पर हाइड्रोपोनिक विधि द्वारा ताज़ा और पौष्टिक सब्ज़िओं का उत्पादन कर रहे है। हाइड्रोपोनिक एक प्रकार की ऐसी कृषि व्यवस्था है जिसमे हम पौधों को मिटटी में न ऊगा कर पानी में उगाते हैं।

हिमाचल: खलीनी के सौरभ हाईड्रॉ पोनिक विधि से उगा रहे हैं ताजा सब्जियां
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प्रतीकात्मक फोटो

हिमाचल के खलीनी निवासी सौरभ राठौर अपने घर की छत पर हाइड्रोपोनिक विधि द्वारा ताज़ा और पौष्टिक सब्ज़िओं का उत्पादन कर रहे है। हाइड्रोपोनिक एक प्रकार की ऐसी कृषि व्यवस्था है जिसमे हम पौधों को मिटटी में न ऊगा कर पानी में उगाते हैं। हाइड्रोपोनिक शब्द की उत्पत्ति दो ग्रीक शब्दों 'हाइड्रो तथा 'पोनोस से मिलकर हुई है। हाइड्रो का मतलब है पानी, जबकि पोनोस का अर्थ है कार्य। पौधे को उगने और विकसित होने के लिए केवल चार चीजे चाहिए होती हैं। सौरभ ने बताया की हाइड्रोपोनिक विधि का विस्तार भारत मे अभी काफी कम है। हाइड्रोपोनिक विधि के बारे मे जानकारी उन्हें पहली बार 2016 मे मिली जब अपने मित्र के डेरी फार्म पे हरे चारे की समस्या क समाधान के लिए हाइड्रोपोनिक विधि द्वारा हरे चारे का उत्पादन किया गया। इस विधि के फायदों से प्रभावित हो कर सौरभ ने अपना हाइड्रोपोनिक खेती है सफर शुरू किया और आज वह 600 वर्ग मीटर मे वर्टीकल हाइड्रोपोनिक खेती कर रहे है जिसमे से 100 वर्ग मीटर खलीनी मे अपने ही घर की छत पे और 500 वर्ग मीटर ग्रीनहाउस अपने पैतृक निवास जुब्बल में है। सौरभ ने बताया के हाइड्रोपोनिक खेती हिमाचल प्रदेश जैसे राज्य के लिए वरदान साबित हो सकती है। पहाड़ी इलाको मे ज़मीन एवम पानी की कमी होती है और हाइड्रोपोनिक वर्टीकल फार्मिंग इन दोनों समस्याओं का इलाज है। इसके साथ इस विधि मे उत्पादन सुनिश्चित है और पारम्परिक खेती द्वारा किये गए उत्पादन से कई गुना ज्यादा है। हाइड्रोपोनिक खेती एक संरक्षित वातावरण मे की जाती है तभी इसमें केमिकल कीटनाशकों की जरूरत नहीं पड़ती जिस से हमे केमिकल रहित पौष्टिक फल एवम सब्ज़ियां मिलती है। सौरभ ने बताया कि वह हाइड्रोपोनिक खेती को और भी बढ़ावा देना चाहते है।


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