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बहुचर्चित महम कांड में फैसला सोमवार को

कोर्ट में दोनों पक्षों की बहस पूरी हाे गई है।मामले के अनुसार, 27 फरवरी 1990 को महम विधानसभा का उप चुनाव था। इस दौरान वहां पर फायरिंग हो गई थी। जिसमें खरक जाटान गांव निवासी रामफल के भाई हरिसिंह की मौत हो गई थी।

बहुचर्चित महम कांड में फैसला सोमवार को
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हरिभूमि न्यूज : रोहतक

एडीएसजे रितू वाईके बहल की कोर्ट में शुक्रवार को महम कांड को लेकर सुनवाई हुई। कोर्ट में दोनों पक्षों की बहस पूरी हाे गई है। अब कोर्ट सोमवार को मामले में फैसला सुनाएगी कि केस आगे चलेगा या नहीं। इसके साथ ही शिकायत पक्ष ने केस में पुलिस द्वारा अब तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट देने के लिए कोर्ट में अर्जी लगाई है। जिस पर सोमवार को ही निर्णय लिया जाएगा।

मामले के अनुसार, 27 फरवरी 1990 को महम विधानसभा का उप चुनाव था। इस दौरान वहां पर फायरिंग हो गई थी। जिसमें खरक जाटान गांव निवासी रामफल के भाई हरिसिंह की मौत हो गई थी। मृतक के परिजनों ने कई जगह शिकायत दी लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद शिकायतकर्ता ने इनेलो नेता अभय चौटाला, पूर्व डीआईजी शमशेर सिंह अहलावत, करनाल के पूर्व एएसपी सुरेश चंद्र, भिवानी के डीएसपी रहे सुखदेव राज राणा समेत कई के खिलाफ नवम्बर 2016 में एसपी को शिकायत दी।

पुलिस द्वारा उपयुक्त कार्रवाई न होने पर पीड़ित ने महम कोर्ट में 2017 में याचिका दायर की थी। 2018 में कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। इसके बाद अगस्त 2018 में रिविजन फाइल की। जिस पर कोर्ट में सुुनवाई चल रही है। कोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस सुुनने के बाद फैसले के लिए सोमवार का दिन फैसले के लिए तय किया है। शिकायतकर्ता रामफल की तरफ से कोर्ट में पेश हुए अधिवक्ता जितेंद्र हुड्डा ने कोर्ट में अर्जी लगाई कि मामले में पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई की रिपोर्ट उन्हें मुहैया करवाई जाए। यह रिकार्ड पुलिस की वीआरके ब्रांच में रखा गया है। उन्होंने आरटीआई लगाई तो रिकार्ड उपलब्ध नहीं करवाया गया था। उन्होंने बताया कि इससे पहले भी पुलिस को शिकायत की गई थी।

मौके पर नहीं थे अभय चौटाला

अभय चौटाला की तरफ से कोर्ट में पेश हुए अधिवक्ता विनोद अहलावत ने दलील दी कि 27 साल तक शिकायत क्यों नहीं की गई। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उदाहरण पेश किया कि इतने लम्बे समय बाद शिकायत करना संदेह के दायरे में आता है। उन्होंने कहा कि इस केस की जांच सरकार द्वारा पहले ही गठित की गई एसआईटी कर चुकी है, जिसमें गवाहों का कहना है कि अभय सिंह चौटाला मौके पर नहीं थे। केस की अनट्रेस रिपोर्ट जमा हो चुकी है। उस समय शिकायकर्ता कार्रवाई से संतुष्ट था।

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