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पक्षियों की चहचाहट पर ग्रहण लगा रहे फ्लाईओवर के नीचे लगे पोस्टर, कई पक्षियों की हुई मौत

गुढ़ा फ्लाईओवर के नीचे वायु संचार के लिए बनाए गए वैंटीलेशन में कुछ पक्षियों ने अपने घोंसले बना लिए हैं। उनके बनाए गए घोंसलाें पर आजकल विभिन्न शिक्षण संस्थाओं के पोस्टर चस्पा दिए गए हैं। बाहर निकलने का रास्ता न मिलने के कारण ये बेजुबान पक्षी अपने घौसलाें में कैद होकर दम तोड़ रहे है।

पक्षियों की चहचाहट पर ग्रहण लगा रहे फ्लाईओवर के नीचे लगे पोस्टर, कई पक्षियों की हुई मौत
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झज्जर : गुढ़ा गांव के फ्लाईओवर के नीचे मृत पड़ा पक्षी, गुढ़ा गांव के फ्लाईओवर के नीचे बनाए गए पक्षियों के घौंसलों पर चस्पा किए गए पोस्टर।

हरिभूमि न्यूज : झज्जर

चल उड़ जा रे पंछी कि अब ये देश हुआ बेगाना...। हिंदी फिल्म का यह मशहूर गीत आजकल बस स्टैंड के नजदीक स्थित गुढ़ा बाईपास फ्लाईओवर के नीचे अपना आशियाना बनाने वाले पंछियों पर फिट बैठ रहा है। गुढ़ा फ्लाईओवर के नीचे वायु संचार के लिए बनाए गए वैंटीलेशन में कुछ पक्षियों ने अपने घौसलें बना लिए हैं। उनके बनाए गए घोंसलाों पर आजकल विभिन्न शिक्षण संस्थाओं के पोस्टर चस्पा दिए गए हैं। बाहर निकलने का रास्ता न मिलने के कारण ये बेजुबान पक्षी अपने घोंसलाें में कैद होकर दम तोड़ रहे है। चाहे अनजाने में ही सही लेकिन पोस्टर चस्पा करने वाले लोग उनके घौसलों को इन पक्षियों की मौत को अंजाम देने पर तुले हैं।


हालांकि कुछ पक्षी प्रेमियों ने आकर अधिकांश छेद खोल दिए लेकिन तब तक भी कई पक्षी काल का ग्रास बन चुके थे। पक्षी प्रेमियों ने फ्लाईओवर के नीचे कुंडी में दाना-पानी की व्यवस्था भी की है। लेकिन लोगों का कहना है कि पोस्टर लगाने वाले यह भी नहीं देखते कि इन पोस्टरों के कारण किसी बेजुबान की जान भी जा सकती है। ऐसे में पक्षी प्रेमियोंं में रोष व्याप्त है।

हर रोज पक्षियों को दाना-पानी की व्यवस्था करने जाने वाले पक्षी प्रेमी रमेश सोनी का कहना है कि पहले जैसी पंछियों की चहचाहट अब कहीं देखने को नहीं मिलती। इसके चलते शहर में इक्का-दुक्का स्थान ही बचे हैं जहां पंछियों का कलरव सुनाई देता हो। उन्होंने बताया कि सुबह जब आकर देखा तो इन घोंसलाें के बाहर पोस्टर चस्पा हुए थे। जब उन्हें फाड़ा गया तो कई पक्षी मृत पाए गए। जिसके चलते उन्हें बहुत दुख हुआ। उन्होंने जिला प्रशासन से पोस्टर चस्पा करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।


लोगों के घरों में चहचाहट करने वाली चिडि़यां जहां आजकल गुम सी हो गई हैं वहीं अब अधिकांश संख्या शहर में काबर पक्षी की ही दिखाई देती है। गुढ़ा फ्लाईओवर के नीचे भी कोयल, काबर के नाम से जानी जाने वाली कॉमन मैना, तोते सहित कई प्रकार के पक्षियों ने अपना घोंसला बनाया हुआ है। यदि इन पक्षियों के साथ ऐसा ही चलता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब ये पक्षी यहां से नदारद हो जाएंगे।


करीब एक दशक पहले सुबह के चार बजे ही पक्षियों का कलरव लोगों को गुड मार्निंग का संदेश देता था। जो अब महज गांवों में सुनाई देता है। ऐसे में पोस्टर चस्पाने से उनकी चहचाहट से भी महरूम हो जाएंगे। यह कहने में कोई अतिश्योक्ति नहीं कि फ्लाईओवर के नीचे चस्पा किए गए पोस्टर पंछियों की चहचाहट पर ग्रहण लगा रहे हैं।

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