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कोरोना से प्रभावित हुई अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए जुटे हैं औद्योगिक प्रतिष्ठान

ज्वाइंट वेंचर भी अपनी प्रिंसिपल इंडस्ट्री की मांग को ध्यान में रखकर उत्पादन कर रहे हैं। उत्पादन की मांग कम होने के कारण कुछ ज्वाईंट बैंचरों ने फिर से अपने यहां कुछ दिनों का अवकाश घोषित कर दिया है, ताकि प्रवासी श्रमिक भी आ सकें और उनके उत्पादों की मांग भी बढ़ सके।

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प्रतीकात्मक तस्वीर

गुरुग्राम : कोरोना महामारी के प्रभावित हुई आर्थिक व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए बड़ी औद्योगिक प्रतिष्ठान जुटे हुए हैं। गत सप्ताह इन प्रतिष्ठानों में काम भी शुरू हो गया था। औद्योगिक क्षेत्रों की जानी-मानी मारुति सुजुकी के गुरुग्राम व मानेसर स्थित प्लांटों में भी उत्पादन शुरू हो गया है और उत्पादन मांग के अनुसार किया जा रहा है।

लॉकडाउन के कारण अभी मारुति, होण्डा व हीरो मोटोकॉर्प के शोरुम बंद पड़े हैं। ऐसे में वाहनों की बिक्री भी प्रभावित हुई है। इन बड़े प्रतष्ठिानों को कलपुर्जों की आपूर्ति करने वाले बड़ी संख्या में ज्वाइंट वेंचर भी हैं। कोरोना महामारी के चलते बड़ी संख्या में कुशल व अद्र्धकुशल प्रवासी श्रमिक अपने घरों को लौट गए थे। अभी तक ये लोग वापस गुरुग्राम नहीं आए हैं। उन्हें अभी भी कोरोना महामारी व लॉकडाउन का भय सता रहा है।

ये ज्वाइंट वेंचर भी अपनी प्रिंसिपल इंडस्ट्री की मांग को ध्यान में रखकर उत्पादन कर रहे हैं। उत्पादन की मांग कम होने के कारण कुछ ज्वाइंट बैंचरों ने फिर से अपने यहां कुछ दिनों का अवकाश घोषित कर दिया है, ताकि प्रवासी श्रमिक भी आ सकें और उनके उत्पादों की मांग भी बढ़ सके। जानकारों का कहना है कि कोरोना की पहली लहर की अपेक्षा कोरोना की दूसरी लहर ने औद्योगिक क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को कम ही प्रभावित किया है। प्रतिष्ठान इस कमी को पूरी करने में जुटे हैं और उनका मानना भी है कि इस कमी को उत्पादन बढ़ाकर पूरा करा लिया जाएगा, लेकिन बाजार में उत्पादों की मांग भी होना जरूरी है।

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