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किसान ने खेती की तस्वीर के साथ अपनी तकदीर भी बदल डाली, एक एकड़ जमीन से कमाए 4 लाख रुपये, जानिए तरीका

किसान जहां पहले परम्परागत खेती में लागत से अधिक होने से आमदनी नहीं ले पाता था, मगर अब खेती की नई विधि से एक वर्ष में प्रति एकड़ में साढ़े तीन लाख से भी अधिक मुनाफा ले रहा है।

किसान ने खेती की तस्वीर के साथ अपनी तकदीर भी बदल डाली, एक एकड़ जमीन से कमाए 4 लाख रुपये, जानिए तरीका
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 फसल की पैदावार दिखाते किसान प्रमोद लांबा

दलबीर सिंह : भूना ( फतेहाबाद )

गांव हसंगा में एक ऐसा किसान भी है, जो खेती में कामयाबी की कहानी लिख रहा है। जिसने परम्परागत खेती को छोड़कर एक नई तकनीक का इस्तेमाल करके खेती की शुरुआत की है। इस नई तकनीक से खेती की न सिर्फ तस्वीर बदली है बल्कि किसान की तकदीर भी बदल गई है। किसान जहां पहले परम्परागत खेती में लागत से अधिक होने से आमदनी नहीं ले पाता था, मगर अब खेती की नई विधि से एक वर्ष में प्रति एकड़ में साढ़े तीन लाख से भी अधिक मुनाफा ले रहा है।

गांव हसंगा का निवासी किसान प्रमोद लांबा अपनी 12 एकड़ जमीन में गेहूं एवं धान की पैदावार लेने तक सीमित था। पिछले कई वर्षों से परम्परागत खेती से ही जुड़ा रहा। किसान को उपरोक्त फसल में खर्चा अधिक हो जाता और आमदनी नाममात्र ही हासिल होती थी। किसान प्रमोद लांबा ने एक दिन भूथन खुर्द के प्रगतिशील किसान से खेती से सम्बंधित अपने विचार सांझा किए तो उन्होंने खेती की नई तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित किया। किसान ने धान की पैदावार लगने के बाद अक्टूबर महीने में ट्रायल के तौर पर सवा एकड़ में आलू की बिजाई कर दी।

एक वर्ष में तीन फसल लेकर चार लाख रुपए कमाए

आलू की पैदावार लेने के बाद फरवरी महीने में गाजर का बीज पैदा करने के लिए बिजाई किया, इससे किसान ने एक वर्ष में तीन फसल लेकर करीब चार लाख रुपए कमाए। किसान को धान व गाजर से दो लाख तथा आलू की पैदावार में डेढ़ लाख रुपए की आमदनी हुई जबकि किसान को लहसुन की फसल में भी लाखों रुपए का सीधा फायदा हुआ। किसान प्रमोद लांबा ने नई तकनीक से खेती करके लाखों रुपए की आय बढ़ाई और दर्जनों मजदूरों को भी रोजगार दिया। आलू व लहसुन की खुदाई में तीन दर्जन से अधिक मजदूरों को कई दिनों तक निर्धारित दिहाड़ी पर काम मिल जाता है, इसलिए परंपरागत खेती को छोड़कर किसान जहां आर्थिक रूप से संपन्न हुआ वहीं मजदूरों को भी हजारों रुपये की दिहाड़ी मिली।

वर्ष 2019 में आधा-आधा एकड़ में लगाया था लहसुन व आलू

किसान प्रमोद लांबा ने बताया कि वर्ष 2019 में खेती की नई तकनीक को अपनाया था। उसने अपने 12 एकड़ जमीन में से ट्रायल के तौर पर आधा एकड़ में आलू तथा आधा एकड़ में लहसुन की बिजाई की थी। पहले ही साल में उसे भरपूर फायदा हुआ, इसलिए वर्ष 2021-22 में 2 एकड़ में लहसुन की खेती व सवा 2 एकड़ में आलू की खेती तथा सवा एकड़ में गाजर का बीज लगाया हुआ है। आलू की पैदावार ली जा चुकी है, जिसमें प्रति एकड़ एक लाख से अधिक आमदनी हुई है।

अगर लहसुन का बाजार भाव अच्छा मिला तो एक एकड़ में तीन लाख से लेकर पांच लाख रुपए तक का फायदा हो सकता है। किसान ने बताया कि गाजर के बीज से भी प्रति एकड़ एक लाख रुपए से अधिक की कमाई हो सकती है। किसान ने बताया कि अगर लहसुन व आलू की खेती में अगर थोड़ी सी ज्यादा मेहनत कर ली जाए तो बंपर पैदावार भी ली जा सकती है, क्योंकि बिजाई के बाद से लहसुन व आलू में खरपतवार पैदा नहीं होनी चाहिए। खरपतवार को नष्ट करने के लिए रासायनिक कीटनाशक छिड़काव बहुत नुकसानदायक है इसलिए फसल में खरपतवार को हाथों से नष्ट करना चाहिए।

डीएपी एवं यूरिया मुक्त फसल की ज्यादा डिमांड

किसान प्रमोद लांबा ने बताया कि आलू व लहसुन की फसल में जैविक एवं गोबर खाद का अधिक इस्तेमाल होने से आकार बड़ा होने के साथ-साथ क्वालिटी की चमक भी ज्यादा होगी। जिनके खाने में प्रकृतिक खुशबू एवं स्वादिष्टता भी मिलेगी, वहीं बाजार में भाव भी ऊंचे मिलेंगे। खेत में खरपतवार को नष्ट करने के लिए कीटनाशक छिड़काव का इस्तेमाल नहीं किया बल्कि मजदूरों ने हाथों से खरपतवार को फसलों से नष्ट किया।

डीएपी व यूरिया खाद का भी नाममात्र इस्तेमाल किया

डीएपी व यूरिया खाद का भी नाममात्र इस्तेमाल किया गया है। किसान ने बताया कि आलू व लहसुन का बीज भी खुद अपना तैयार करते हैं। किसान प्रमोद लांबा ने बताया कि अगले वर्ष 5 एकड़ में आलू व 3 एकड़ में लहसुन तथा 2 एकड़ में गाजर का बीज लगाने के लिए योजना बनाई है, इसलिए बीज भी अपना ही तैयार किया है। उन्होंने बताया कि बाजार से खरीदे गए बीज की तसल्ली नहीं होती और दामों में भी ऊंचा मिलता है, इसलिए उन्होंने अपने खेत में हुई पैदावार में से छोटे आलू व लहसुन का बीज बनाकर रख लिया है। किसान ने नई तकनीक को अपनाकर खेती के मायने बदलने के लिए दूसरे किसानों को प्रेरित किया है।

खेती की नई तकनीक अपनाएं किसान

किसानों को खेती की नई तकनीक को अपनाकर प्रगतिशील किसान बनना चाहिए। क्योंकि परंपरागत खेती में आमदनी कम हो रही है इसलिए किसानों को सब्जियां, फूल, चना, दाल व बागवानी फसलों के प्रति रुझान बढ़ाना चाहिए। किसानों को कम खर्च में अधिक आय बढ़ानी चाहिए। - सुभाष चंद्र, उपनिदेशक बागवानी विभाग हरियाणा

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