Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

Sunday Special: जानें क्या है जंतर-मंतर का इतिहास, इतने बड़े आंदोलनों का गवाह बना ये स्मारक

देश में शायद ही कोई ऐसा इंसान हो, जिसने जंतर मंतर का नाम न सुना हो। ज्यादातर लोग इसे धरने प्रदर्शन की जगह के तौर पर जानते हैं। हर रोज होने वाले धरने-प्रदर्शनों के कारण यह स्थान धरना स्थल बन गया है। संसद भवन के नजदीक होने की वजह से हर कोई यहां अपनी आवाज बुलंद करना चाहता है, ताकि देश के नीति निर्माताओं तक वह आवाज पहुंच सके। जंतर मंतर आज तक देश के कई बड़े आंदोलन का गवाह बना है।

Sunday Special: जानें क्या है जंतर-मंतर का इतिहास, इतने बड़े आंदोलनों का गवाह बना स्मारक
X

 जानें क्या है जंतर-मंतर का इतिहास, इतने बड़े आंदोलनों का गवाह बना स्मारक

Sunday Special देश में शायद ही कोई ऐसा इंसान हो, जिसने जंतर मंतर (Jantar Mantar) का नाम न सुना हो। ज्यादातर लोग इसे धरने प्रदर्शन (Protest) की जगह के तौर पर जानते हैं। हर रोज होने वाले धरने-प्रदर्शनों के कारण यह स्थान धरना स्थल बन गया है। संसद भवन के नजदीक होने की वजह से हर कोई यहां अपनी आवाज बुलंद करना चाहता है, ताकि देश के नीति निर्माताओं तक वह आवाज पहुंच सके। जंतर मंतर आज तक देश के कई बड़े आंदोलन का गवाह बना है। लेकिन जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वालों के लिए बुरी खबर है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने दिल्ली सरकार को इस सम्बन्ध में निर्देशित करते हुए आदेश दिया है कि, जंतर-मंतर इलाके में चल रहे सभी धरना-प्रदर्शन और लोगों के जमा होने पर शीघ्र रोक लगाई जाये। अब जंतर-मंतर पर आंदोलन पर रोक क्यों लगाई जा रही है। उसे जानने से पहले जंतर मंतर का इतिहास जान लेते है।

जंतर मंतर का इतिहास

जंतर मंतर जिसे आज आंदोलन की जगह बना दिया गया है। पहले वो एक वेधशाला थी , जिसे 1724 ई. में महाराजा जयसिंह ने बनवाया था। जयपुर के महाराजा जयसिंह ने इसी तरह की वेधशाला उज्जैन, वाराणसी और मथुरा में भी बनवाई है। दिल्ली का जंतर-मंतर शकरकंद की वेधशाला से प्रेरित है। मोहम्मद शाह के शासन काल में हिन्दू और मुस्लिम खगोलशास्त्रियों में ग्रहों की स्थिति को लेकर बहस छिड़ गई थी। इसे खत्म करने के लिए सवाई जय सिंह ने जंतर-मंतर का निर्माण करवाया। ग्रहों की गति नापने के लिए यहां विभिन्न प्रकार के उपकरण लगाए गए हैं। सम्राट यंत्र सूर्य की सहायता से वक्त और ग्रहों की स्थिति की जानकारी देता है। मिस्र यंत्र वर्ष के सबसे छोटे और सबसे बड़े दिन को नाप सकता है। राम यंत्र और जय प्रकाश यंत्र खगोलीय पिंडों की गति के बारे में बताता है। अब जानते है कि आखिर जंतर मंतर पर जल्द ही धरना प्रदर्शन पर रोक क्यों लगने वाली है

जानें क्यों है जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने पर बैन

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने दिल्ली सरकार को आदेश देते हुए कहा कि जंतर-मंतर इलाके में चल रहे सभी धरने-प्रदर्शन और लोगों का जमा होना तुरंत रोका जाए। न्यायमूर्ति आरएस राठौर की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने नई दिल्ली नगरपालिका परिषद पीठ ने कहा कि दिल्ली सरकार, एनडीएमसी और दिल्ली के पुलिस आयुक्त जंतर-मंतर पर धरना, प्रदर्शन, आंदोलनों, लोगों के इकट्टा होने, लाउडस्पीकरों के इस्तेमाल आदि को तुरन्त रोकें। इसके आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को शांतिपूर्ण और आरामदायक ढंग से रहने का अधिकार है और उनके आवासों पर प्रदूषण मुक्त वातावरण होना चाहिए। इसी जगह पर अब लोग रामलीला मैदान में प्रदर्शन करना शुरू करेंगे। दरअसल अधिकरण ने प्रदर्शनकारियों, आंदोलनकारियों और धरने पर बैठे लोगों को वैकल्पिक स्थल के रूप में अजमेरी गेट में स्थित रामलीला मैदान में तुरंत स्थानांतरित करने के अधिकारियों को निर्देश दिए। चलिए जानते हैं कुछ ऐसे ही बडे आंदोलन को जो जंतर मंतर पर हुआ है....इन जन आंदोलनों का गवाह रहा है जंतर मंतर

1. जस्टिस फॉर निर्भया, उमड़ा था जन सैलाब

16 दिसंबर 2012...इस दिन या ये कहें रात दिल्ली के दामन पर एक ऐसा दाग जो शायद कभी नहीं धुल पाएगा। इसी दिन 6 दरिंदों ने एक लड़की को अपनी हवस का शिकार बनाया था। जिसके न्याय के लिए लोगों ने यही इस जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया था। उस रेप पीड़िता को आम लोगों ने निर्भया नाम दिया। इस रेप केस ने पूरी दिल्ली और पूरे भारत को हिला कर रख दिया था। जब ये मामला मीडिया में आया उसके बाद लोगो कई महीनों तक जंतर मंतर पर निर्भया के लिए लड़ते रहे और उसकी याद में कैंडल मार्च निकालते रहे। लोगों के इस गुस्से की वजह से रेप के आरोपियों पर फास्ट ट्रैक कोर्ट के तहत मुकदमा चला था, इस केस में निर्भया को इंसाफ तो मिला लेकिन उसकी मौत के सात साल बाद।

2. अन्ना का जनलोकपाल आंदोलन

देश से भ्रष्टाचार के खात्मे के लिए जनलोकपाल कानून बनाने की डिमांड को लेकर साल 2011 में जंतर मंतर पर आंदोलन हुआ था। यह आंदोलन समाजसेवी अन्ना हजारे ने किया था। इसे जनता को भरपूर समर्थन मिला और इसके बाद जनलोकपाल के समर्थन में देश के कोने कोने से आवाजें उठने लगीं। इसके बाद ये आंदोलन रामलीला मैदान में भी आंदोलन हुआ, जहां हजारों लोग एकजुट हुए। हालांकि टीम अन्ना टूटने की वजह से यह आंदोलन ठंडा पड गया।

3. वन रैंक वन पेंशन के लिए आंदोलन

वन रैंक वन पेंशन के मुद्दे पर जून, 2015 में पूर्व सैनिकों ने आंदोलन शुरू किया था। सैनिकों ने अपने मैडल तक वापस देने को तैयार थे। यहीं सैनिक भूख हड़ताल पर बैठे, जंतर पर आंदोलन शुरू करने के बाद देश के कोने कोने में पूर्व सैनिकों ने आवाज बुलंद की। इससे सरकार को सैनिकों की मांगें मानने पर मजबूर होना पडा।

4. रामसेतु बचाने का आंदोलन

भारत और श्रीलंका के बीच की जगह जिसे एडम ब्रिज का नाम दिया गया। इस ब्रिज को हटाने के फैसले के आने के बाद देश में रामसेतु आंदोलन हुआ है। साल 2007 में ये आंदोलन जंतर मंतर पर भी हुआ, इसमें हजारों की तादाद में लोग इकट्ठे हुए। यूपीए सरकार से बीजेपी और हिंदू संगठनों ने इसे न तोडने की डिमांड की गई। यह आंदोलन देश के कोने कोने तक गया था।

Next Story