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दिल्ली पुलिस ने HC में उमर खालिद के खिलाफ दाखिल किया हलफनामा, कोर्ट ने दी ये दलीलें

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (Jawaharlal Nehru University) के पूर्व छात्र उमर खालिद (Umar Khalid) की जमानत याचिका पर एक बार फिर पेच फस गया है। अब पुलिस ने दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) में खालिद की जमानत याचिका का विरोध करते हुए एक हलफनामा दाखिल किया है।

दिल्ली पुलिस ने HC में उमर खालिद के खिलाफ दाखिल किया हलफनामा, कोर्ट ने दी ये दलीलें
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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (Jawaharlal Nehru University) के पूर्व छात्र उमर खालिद (Umar Khalid) की जमानत याचिका पर एक बार फिर पेच फस गया है। अब पुलिस ने दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) में खालिद की जमानत याचिका का विरोध करते हुए एक हलफनामा दाखिल किया है। याचिका पर न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल (Siddharth Mridul) और न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर (Rajneesh Bhatnagar) की पीठ सुनवाई करेगी।

खालिद की ओर से वरिष्ठ वकील त्रिदीप पेस पेश हुए। एसपीपी अमित प्रसाद ने बताया कि दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने उमर खालिद की जमानत याचिका के खिलाफ हाई कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है. पुलिस ने सीलबंद लिफाफे में हलफनामा दाखिल किया। खालिद के वकील त्रिदीप पेस ने अदालत में कहा कि, पिछली सुनवाई में मुझे कथित आपत्तिजनक भाषण पढ़ने के लिए कहा गया था, जो मैंने अदालत में पेश किया था और जब मुझे रोका गया तो मैं आधा भाषण पढ़ चुका था.

मामले की सुनवाई कर रही पीठ ने कहा कि भाषण वहीं से शुरू किया जाए जहां से इसे रोका गया था। त्रिदीप पेस ने कहा कि प्राथमिकी (FIR) में कहा गया है कि खालिद अमेरिकी राष्ट्रपति (US President) डोनाल्ड ट्रंप की यात्रा के दौरान लोगों से सड़क जाम करने की अपील कर रहे थे. प्राथमिकी का आधार यह है कि जेएनयू (JNU) के एक छात्र ने अमेरिकी राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान लोगों को सड़क पर आने का आह्वान करते हुए भाषण दिया।

वकील पेस ने कहा कि यह प्राथमिकी वास्तविक तथ्यों पर आधारित नहीं है। यह यूएपीए का इस्तेमाल कर सीएए के प्रमुख विरोधियों को सलाखों के पीछे डालने के लिए है। पेस ने अदालत को बताया कि प्राथमिकी 6 मार्च को दर्ज की गई थी। इसमें आईपीसी 147,148, 149 और 120बी के तहत अपराध हैं। ये सभी जमानती अपराध हैं। इसमें तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है. जिसके बाद उन्हें 13 तारीख को मजिस्ट्रेट (Magistrate) के सामने पेश किया गया और उसी दिन मजिस्ट्रेट द्वारा रिहा कर दिया गया। यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्राथमिकी है जिसमें गैर-जमानती अपराध भी नहीं थे।

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