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कहर बरपाते कोरोना वायरस पर पटना हाईकोर्ट ने सख्त रूख अपनाया, सरकार को दिए 3 खास निर्देश

बिहार में कहर बरपा रहे कोरोना वायरस पर पटना हाईकोर्ट ने सुनवाई की। इस दौरान पटना हाईकोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि बिहार में कोरोना मरीजों के इलाज के लिए पूरी व्यवस्था की जाए।

Patna High Court gives 3 instructions for Bihar government to deal with Corona Coronavirus news in hindi
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प्रतीकात्मक तस्वीर

बिहार (Bihar) में कहर बरपा रही कोरोना महामारी (Corona Epidemic) को लेकर पटना हाईकोर्ट (Patna High Court) ने सुनवाई के दौरान सख्त रुख अपनाया। पटना हाईकोर्ट में जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ ने जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि कोरोना मरीजों के इलाज (Corona Patients Treatment) के लिए बिहार में व्यवस्थाएं पूर्ण की जाए।

हाईकोर्ट ने पटना के आईजीआईएमएस (IGIMS) अस्पताल को कोविड अस्पताल (Covid Hospital) बनाने के लिए तेजी से कार्रवाई करने का निर्देश दिया। साथ ही हाईकोर्ट ने राज्य सरकार (state government) को दो महीने में आईजीआईएमएस के अंदर ऑक्सीजन प्लांट (Oxygen plant) लगाने का भी निर्देश दिया। इस दौरान हाईकोर्ट ने पटना स्थित बिहटा के ईएसआई अस्पताल की व्यवस्था को पूरी तरह से ठीक करने के लिए भी कहा, जिससे एक सप्ताह के अंदर अस्पताल में तीन सौ बेड तैयार हो जाए।

हाईकोर्ट ने शनिवार को बिहार सरकार से कहा कि सोमवार तक पटना स्थित बिहटा ईएसआईसी में कम से कम 150 बेड की शुरुआत हो जानी चाहिए। साथ ही आईजीआईएमएस (IGIMS) में निर्बाध ऑक्सीजन सप्लाई के लिए क्रायोजेनिक टंकी स्थापित की जाए। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि आईजीआईएमएस अस्पताल परिसर में ही नियमित ऑक्सीजन सप्लाई के लिए दो महीने के भीतर क्रायोजेनिक टंकी स्थापित करें।

इसके अलावा अदालत ने पटना हाईकोर्ट परिसर में बने शताब्दी भवन को कोविड अस्पताल बनाए जाने की बात कही है, लेकिन इसको लेकर अधिवक्ता संघ व राज्य बार काउंसिल ने सहमति नहीं दी। इन्होंने अदालत को बताया कि पीएमसीएच, पटना में कोविड के कम मरीजों का इलाज होता, लेकिन ऑक्सीजन की खपत ज्यादा है। जबकि एनएमसीएच, पटना में कोविड मरीजों का इलाज ज्यादा होता है, पर ऑक्सीजन की खपत कम है। हाईकोर्ट ने कमेटी से इस मामले को भी देखने के लिए कहा।

हाईकोर्ट को महसूस हुआ कि एनएमसीएच (NMCH) की तुलना में पीएमसीएच (PMCH) में प्रतिदिन ऑक्सीजन खपत ज्यादा क्यों हो रही है। इसपर हाईकोर्ट को शक हुआ कि कहीं पीएमसीएच में ऑक्सीजन की कालाबाजारी तो नहीं हो रही है। अदालत ने इस मामले की जांच तीन सदस्यीय एक्सपर्ट कमिटी से कराने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि पीएमसीएच से ऑक्सीजन की कालाबाजारी होने के आशंका की जांच करें। हाईकोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 3 मई को होगी।

याद रहे हाल में ही पटना उच्च न्यायालय ने राज्य के अस्पतालों में ऑक्सीजन की आपूर्ति में अनियमितता की खबरों व सरकार के जवाब से अंसतुष्ट होकर निर्देश दिया था कि कौन से अस्पताल को कितनी ऑक्सीजन की आपूर्ति की जा रही, वहीं कौन से अस्पताल में बेड की संख्या कितनी है। इसके अलावा अदालत ने रोजाना की दवाओं की उपलब्धता की स्थिति के बारे में पूछा।

साथ ही हाईकोर्ट ने कोविड अस्पतालों में ऑक्सीजन, बेड व दवाओं तथा कोविड जांच की मॉनीटरिंग के लिए पटना एम्स के चिकित्सक की अगुवाई में 3 सदस्यीय एक्सपर्ट कमेटी गठित करते हुए स्वास्थ्य विभाग को इस कमेटी के मांगने पर सही आंकड़ा सौंपने का निर्देश दिया था। इसको लेकर पटना एम्स के प्रोफेसर डॉ. उमेश भदानी कमेटी के अध्यक्ष, सीजीएचएस पटना के क्षेत्रीय पदाधिकारी डॉ. रवि शंकर सिंह और पटना एम्स के प्रोफेसर डॉ. रवि कीर्ति सदस्य बनाए गए थे।

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