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कोविड महामारी के बीच किसी मसीहा से कम नहीं सहारनपुर के ये चार दोस्त, दास्तां सुन आप भी हो जाएंगे मुरीद

सहारनपुर के रहने वाले राहुल झंब, संचित अरोरा, गौरव कक्कर और सोनी शर्मा ने खबरों में सुना और पढ़ा कि कई जगह कोरोना महामारी से मरने वाले लोगों के शव लेने उनके परिजन नहीं पहुंच रहे। इसके बाद इन चारों दोस्तों ने फैसला किया कि ऐसे शवों का अंतिम संस्कार वे कराएंगे। वे अब तक 25 ऐसे लोगों का अंतिम संस्कार करा भी चुके हैं। जानिये समाज के लिए क्या संदेश है इन लोगों का।

कोविड महामारी के बीच किसी मसीहा से कम नहीं सहारनपुर के ये चार दोस्त, दास्तां सुन आप भी हो जाएंगे मुरीद
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सहारनपुर के इन चारों दोस्तों ने पेश की समाजसेवा की अनोखी मिसाल।  

कोरोना महामारी के बीच सहारनपुर के चार दोस्तों ने समाजसेवा का ऐसा बीड़ा उठाया है, जिसके बारे में सुनकर आप भी इनके मुरीद हो जाएंगे। ये चार दोस्त उन लोगों का अंतिम संस्कार कर रहे हैं, जिनकी कोरोना संक्रमण से मौत के बाद उनके अपनो ने या तो शव लेने से इनकार कर दिया या किसी मजबूरी के चलते अकेले अंतिम विदाई देने में असमर्थता जता दी। चारों दोस्त अब तक 25 शवों का अंतिम संस्कार कर चुके हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सहारनपुर के रहने वाले राहुल झंब, संचित अरोरा, गौरव कक्कर और सोनी शर्मा ने खबरों में सुना और पढ़ा कि कई जगह कोरोना महामारी से मरने वाले लोगों के शव लेने उनके परिजन नहीं पहुंच रहे। ये चारों दोस्त उस मंजर को महसूस कर तड़प उठे, जहां कोई परिवार या व्यक्ति चाहकर भी कोरोना संक्रमित अपने प्रियजन की मौत के बाद उसके शव को अंतिम संस्कार नहीं कर पा रहा था।

चारों दोस्तों ने फैसला किया कि वो ऐसे लोगों की मदद करेंगे। साथ ही, उन लोगों का भी अंतिम संस्कार करेंगे, जिनके शव लेने से परिजनों ने इस आशंका के चलते इनकार कर दिया कि कहीं वे भी कोरोना महामारी की चपेट में न आ जाएं। शुरू में यह आइडिया राहुल को आया था, लेकिन जब उन्होंने इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर किया तो वे भी तुरंत तैयार हो गए। ये चारों दोस्त कोरोना से जान गंवाने वाले 25 लोगों का अंतिम संस्कार अब तक कर चुके हैं।

सुरक्षा का रखते हैं पूरा ख्याल

ये चारों दोस्त कोरोना से जान गंवाने वाले लोगों का अंतिम संस्कार करने के दौरान पीपीई किट पहने से लेकर अन्य तमाम तरह की सभी कोरोना गाइडलाइंस का पूरी तरह से पालन करते हैं। चारों दोस्तों का मानना है कि अच्छा काम करने वालों के साथ भगवान कभी बुरा नहीं होने देता। वे लोगों को भी यही मैसेज देना चाहते हैं कि महामारी के दौरान भी अपनों का साथ न छोड़ें। इस मुश्किल वक्त में एक-दूसरे का साथ ही इस महामारी पर जल्द जीत का मार्ग प्रशस्त करेगा।

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