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राजस्थान में बढ़ती रेप की घटनाओं पर डॉ सतीश पूनिया ने गहलोत सरकार पर साधा निशाना, बोले- प्रदेश में बेलगाम हुआ अपराध

राजस्थान में पिछले कई में लड़कियों के साथ रेप की घटनाएं सामने आ रही हैं। दरिंदे मासूम बच्चियों का अपनी हवस का शिकार बना रहे हैं। हाल ही में कोटा रेप की घटना ने पूरे देश में तूल पकड़ लिया था। उसके बाद भी दुष्कर्म की घटनाओं में कोई कमी नहीं आ रही है।

राजस्थान में बढ़ती रेप की घटनाओं पर पूनियां ने गहलोत सरकार पर साधा निशाना, बोले- प्रदेश में बेलगाम हुआ अपराध
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सतीश पूनिया

जयपुर। राजस्थान में पिछले कई में लड़कियों के साथ रेप की घटनाएं सामने आ रही हैं। दरिंदे मासूम बच्चियों का अपनी हवस का शिकार बना रहे हैं। हाल ही में कोटा रेप की घटना ने पूरे देश में तूल पकड़ लिया था। उसके बाद भी दुष्कर्म की घटनाओं में कोई कमी नहीं आ रही है।

इसी बीच प्रदेश की बिगड़ी कानून व्यवस्था और महिलाओं व नाबालिग बच्चियों के साथ बढ़ती बलात्कार की घटनाओं को लेकर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से अपराधों की समीक्षा करने की मांग की। ज्ञापन देने के बाद पूनियां ने कहा कि प्रदेश में अपराध बेलगाम हो चुके हैं।

मुख्यमंत्री एक बुरे पिता की भूमिका में दिख रहे हैं, क्योंकि वो बच्चियों को न्याय दिलाने में सक्षम दिखाई नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान के इतिहास में पहली बार ऐसी लचर सरकार आई है जिसके पाये इतने कमजोर हैं कि ना तो अपनी पार्टी को संक्रमण से बचा पा रहे हैं और ना ही सरकार को बचा पा रहे हैं। लेकिन उससे भी ज्यादा चिंताजनक बात है कि अपराधों को रोकने में भी सरकार विफल है। पूनियां ने कहा कि राजस्थान क्राइम कैपिटल बनता जा रहा है और सरकार का इकबाल खत्म हो गया है। 20 माह में राज्य सरकार हर मोर्चे पर विफल है। प्रतिनिधिमंडल में नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया, उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़, सांसद जसकौर मीना औऱ विधायक मदन दिलावर भी शामिल थे।

सितंबर महीने में प्रदेश के हर हिस्से से आई दुष्कर्म की खबर

नेता प्रतिपक्ष गुलाबचन्द कटारिया ने अपराध के आंकड़े पेश करते हुए कहा कि सितंबर महीने में प्रदेश के हर हिस्से से दुष्कर्म की घटनाओं की खबर आई है। सिरोही की घटना ने तो हर किसी को दहला दिया। ज्यादातर मामलों में सरकार की लापरवाही देखी गई। मामले में न्याय नहीं मिलने से पीड़ितों ने आत्महत्या भी की है। कई जगह पीड़ित परिवार के मुखिया ने आत्महत्या कर ली।

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