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मध्यप्रदेश में अब ई-इन्वेस्टिगेशन का ट्रायल रन, पुलिस की जांच में नहीं बदल सकेंगे तथ्य

- इस एप में एक बार बयान दर्ज हो गए तो वे लॉक हो जाएंगे। इसी एप से केस डायरी आनलाइन कोर्ट में पेश की जाएगी। अगर गवाह या फरियादी व आरोपी अपने कथन अदालत में बदलते हैं तो वे बुरे फंस सकते हैं। खास बात ये है कि ई-विवेचना एप एक वैज्ञानिक साक्ष्य आधार रहेगा, जो पुलिसिंग की ओर एक ठोस कदम है।

मध्यप्रदेश में अब ई-इन्वेस्टिगेशन का ट्रायल रन, पुलिस की जांच में नहीं बदल सकेंगे तथ्य
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ई- इन्वेस्टिगेशन एप की जानकारी देते हुए मध्यप्रदेश स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के एडीजी चंचल शेखर

विनोद त्रिपाठी . भोपाल

मध्यप्रदेश में शुक्रवार से ई-विवेचना एप शुरु हो गया है। पुलिस मुख्यालय भोपाल में इसके ट्रायल रन का शुभारंभ डीजीपी विवेक जौहरी ने किया। साथ ही यहां स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के एडीजी चंचल शेखर ने इस एप के बारे में पत्रकारों से चर्चा में विस्तृत जानकारी दी। जिसमें बताया कि इस एप में एक बार बयान दर्ज हो गए तो वे लॉक हो जाएंगे। फिर वे बदले नहीं जा सकेंगे। इसी एप से केस डायरी आॅनलाइन कोर्ट में पेश की जाएगी। यानी अदालत के पोर्टल पर रखी जाएगी। अगर गवाह या फरियादी व आरोपी अपने कथन अदालत में बदलते हैं तो वे फंस सकते हैं। खास बात ये है कि ई-विवेचना एप एक वैज्ञानिक साक्ष्य आधार रहेगा, जो पुलिसिंग की ओर एक ठोस कदम है।

पुलिस महानिदेशक जौहरी ने शुक्रवार को पुलिस मुख्यालय में मध्यप्रदेश पुलिस की ई-विवेचना ऐप का ट्रायल रन का शुभारंभ करते वक्त स्पष्ट किया कि इस एप को एससीआरबी व मेप-आईटी के द्वारा मिलकर विकसित किया गया है। इस एप के उपयोग से अपराधों की विवेचना पुलिस द्वारा मौके पर त्वरित व सरल तरीके से संपन्न हो सकेगी।

572 थानों में 1800 टेबलेट वितरित :

इस अवसर पर एससीआरबी के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक चंचल शेखर बताया कि इस एप के माध्यम से भविष्य में न्यायालय के पोर्टल पर जानकारी भेजी जा सकेगी। ई-विवेचना एप का ट्रायल रन करने के लिए मध्यप्रदेश के समस्त जिलों के चिन्हित 572 थानों में 1800 टेबलेट वितरित किए जा रहे हैं। इस टेब में ई-विवेचना एप, एमपी ई कॉप व सीसीटीएनएस इत्यादि को अपलोड कर विवेचक को दिया गया है। शुक्रवार को भोपाल और इन्दौर जिलों के विवेचको को इसकी ट्रेनिंग दी गयी और उनको टेबलेट वितरित किये गये।

भोपाल-इंदौर के 92 विवेचकों ने ली ई-इन्वेस्टिगेशन एप की ट्रेनिंग :-

ई-इन्वेस्टिगेशन एप के ट्रायल रन के शुभारंभ के अवसर पर स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के एडीजी व विषय विशेषज्ञों ने इस एप संबंधी प्रशिक्षण भोपाल व इंदौर के 92 विवेचकों को दिया। इनमें एसपी से लेकर एएसपी, डीएसपी व इंस्पेक्टर्स समेत सब इंस्पेक्टर भी शामिल रहे। जिसमें उन्हें इस एप के उपयोग के तरीके समझाए गए।

यह भी समझाया विवेचकों को :

एडीजी शेखर ने विवेचकों को समझाया कि ई-विवेचना एप के विकसित होने से अपराध अनुसंधान के महत्वपूर्ण इवेंट्स व साक्ष्यों की स्टंपिंग और जीओ स्टंपिंग स्वत: हो सकेगी। जो भविष्य में बदले नहीं जा सकेंगे। इससे आरोपियों को संदेह का लाभ नहीं मिलेगा। जिससे पुलिस की आम जनता में विश्वसनीयता बढेÞगी व विवेचना में पारदर्शिता रहेगी। घटनास्थल पर ही मौके की कार्यवाही के फोटो व वीडियो, एप के माध्यम से तत्काल अपलोड किए जा सकेंगे।

एप से पुलिस को भी लाभ होगा :

एडीजी शेखर ने बताया कि ई-विवेचना एप से पुलिस को भी लाभ होगा। टेब के उपयोग से विवेचक द्वारा मौके पर ही कार्यवाही सम्पन्न की जाएगी, घटना स्थल की फोटो एवं वीडियो ग्राफी एवं अन्य साक्ष्य संरक्षित तरीके से केस डायरी में शामिल की जा सकेगी। विवेचक की सुविधा के लिए इसमें स्पीच टू टेक्स्ट से भी केस डायरी लिखी जाएगी जिससे केस डायरी लिखने की गति बढ़ जाएगी।

अपराध दोष सिद्धि का प्रतिशत बढ़ेगा :

एडीजी ने बताया कि इस एप में विवेचक न केवल मध्यप्रदेश बल्कि अन्य प्रदेशों में जब विवेचना के दौरान जाता है तो अपने थाने में टेब के माध्यम वहां की गयी विवेचना को सीसीटीएनएस में डाल सकता है। वैज्ञानिक अनुसंधान के प्रयोगों से अपराध दोष सिद्धि का प्रतिशत बढ़ेगा। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा जन सेवा की दिशा में की गई इस पहल से न केवल पुलिस कार्यवाही सहज, सरल एवं पारदर्शी होगी अपितु आम जनता का पुलिस कार्यवाही में विश्वास बढ़ेगा।

इन अधिकारियों की मेहनत :

एडीजी ने बताया कि इस एप को विकसित व इसका क्रियान्वयन करने में पुलिस महानिरीक्षक मकरंद देउस्कर, सहायक पुलिस महानिरीक्षक हेमंत चौहान, एआईजी संदीप मिश्रा, एआईजी प्रांजलि शुक्ला व मेप आईटी के राहुल सक्सेना समेत उनकी टीम का योगदान रहा है। पत्रकारों से चर्चा में इस मौके पर पीएचक्यू के पीआरओ आशीष शर्मा भी मौजूद रहे।

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