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ये हैं हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल, पूरे प्रदेश में 2 हज़ार से ज़्यादा मंदिर, जानें इनके बारे में

प्राचीन समय से हिमाचल को देवताओं का स्थान "देवभूमि" के नाम से जाना जाता था I हिमालय पर्वत की शानदार ऊंचाई, अपनी विहंगम सुन्दरता और आध्यात्मिक शांति की आभा के साथ देवताओं का प्राकृतिक घर के सामान प्रतीत होता है I

हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल, अधिक जानकारी के लिए यहां पढ़े...
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ब्रिजेश्वरी मंदिर

प्राचीन समय से हिमाचल को देवताओं का स्थान "देवभूमि" के नाम से जाना जाता था I हिमालय पर्वत की शानदार ऊंचाई, अपनी विहंगम सुन्दरता और आध्यात्मिक शांति की आभा के साथ देवताओं का प्राकृतिक घर के सामान प्रतीत होता है I पूरे प्रदेश में 2 हज़ार से ज़्यादा मंदिर हैं जो कि इस तथ्य को अपने आप में दोहराते हैं।

उच्च पर्वत मालाओं और पृथक घाटियों का राज्य होने के नाते, मंदिर वास्तुकला की कई अलग-अलग शैलियों का विकास किया और यहाँ पर नक्काशीदार पत्थर शिखर, पैगोड़ाशैली के धार्मिक स्थल, बौद्ध मठों की तरह मंदिर या सिक्ख गुरुद्वारा है I उनमे से तीर्थ यात्रा के महत्वपूर्ण स्थान है और हर साल देश-भर से हज़ारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं I

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ब्रिजेश्वरी मंदिर: काँगड़ा शहर से ठीक बाहर स्थित एक मंदिर माता ब्रिजेश्वरी को समर्पित है I अपने अत्यधिक धन-सम्पदा के लिए जाने जाना वाला यह मंदिर उत्तर से आक्रमणकारियों द्वारा सदैव लूट-पाट का केंद्र रहा I 1905 में काँगड़ा शहर में आए भीषण भूकंप में यह मंदिर पूरी तरह से तहस-नहस हो गया और 1920 में इसे दोबारा तीर्थ यात्रा के लिए तैयार कर दिया गया I

लक्ष्मी नारायण मंदिर: चंबा का लक्ष्मी नारायण मंदिर जो कि मंदिरों का समूह है पुरातन शैली को दर्शाता है I 8वीं शताब्दी में बने मंदिरों में से 6 मंदिर भगवान शिव और विष्णु जी को समर्पित है I इन मंदिरों में लक्ष्मी नारायण मंदिर सबसे पुराना है I बाकि के मंदिर चंबा शहर के चारों ओर स्थापित हैं जो की हरिराय, चम्पावती, बन्सिगोपाल, रामचंद्र, ब्रिजेश्वरी, चामुंडा और नरसिंह जी को समर्पित हैं I

चौरासी मंदिर: भरमौर में स्थित, 9वीं शताब्दी के मंदिर चंबा घाटी में सबसे मह्त्वपूर्ण प्रारम्भिक हिन्दू मंदिरों में से एक है I पौराणिक कथा के अनुसार राजा साहिल वर्मन की राजधानी भरमौर में 84 (चौरासी) योगियों ने दौरा किया I उन्होंने राजा की विनम्रता और आदर सत्कार से खुश हो कर उन्हें 10 पुत्रों और 1 पुत्री (चम्पावती) का आशीर्वाद दिया I यहाँ के मंदिर का प्रांगन सभी तरह की गतिविधियों का मुख्य केंद्र है I

नयना देवी मंदिर: बिलासपुर और किरतपुर (34 कि.मी.) के नजदीक एक शिखर पर बना मंदिर माता नयना देवी को समर्पित है I हर साल जुलाई-अगस्त में श्रावण अष्टमी को रंगारंग मेलों का आयोजन किया जाता है I

चिंतपूर्णी मंदिर: एक घुमावदार रास्ता माँ छिन्नमस्तिका या चिंतपूर्णी माँ के मंदिर को जाता है यहाँ माता सभी की इच्छाओं को पूरा करती है I यह प्रसिद्ध तीर्थ स्थल ऊना शहर से 75 कि.मी.और जालन्धर से 100 कि.मी. की दूरी पर स्थित है I

चामुंडा मंदिर: काँगड़ा से थोड़ी दूरी पर माँ चामुंडा का एक मंदिर है I यह करामाती स्थान अपने साथ शानदार पहाड़ों, बनेर खड्ड, सुन्दर पत्थर और जंगलों से घिरा है I

रिवालसर: प्राकृतिक झील जो की एक टापू की तरह प्रतीक होती है, के किनारे पर - एक भगवान शिव का मंदिर, लोमश ऋषि का मंदिर, गुरु गोविन्द सिंह का गुरुद्वारा और गुरु पद्मसम्भव जी का बौद्ध मट्ठ समर्पित है I यह एक ऐसा स्थल है जहाँ तीनो धर्मों के लोगों की आस्था बनी हुई है I

पराशर मंदिर: 14वीं शताब्दी में निर्मित यह मंदिर है जहाँ पर मंदिर जिले के शाशकों द्वारा पूजा की जाती थी I पैगोड़ा शैली से निर्मित यह मंदिर अपने चारों ओर हरियाली भरा मैदान लिये पंडोह के किनारे पर स्थित है I यहाँ से पहाड़ों का नज़ारा बहुत ही विहंगम है I

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