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कोरोना का खौफ: श्मशानघाट से अस्थियां नहीं ले जा रहे परिजन

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में कोरोना की बीमारी का लोगों में खौफ है। यह डर शिमला में कोरोना से हो रही मौतों की वजह से और बढ़ गया है। अब यहां आलम यह है कि लोग कोरोना संक्रमितों की अस्थियां लेने से भी बच रहे हैं।

कोरोना का खौफ, श्मशानघाट से अस्थियां नहीं ले जा रहे परिजन
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प्रतीकात्मक तस्वीर

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में कोरोना की बीमारी का लोगों में खौफ है। यह डर शिमला में कोरोना से हो रही मौतों की वजह से और बढ़ गया है। अब यहां आलम यह है कि लोग कोरोना संक्रमितों की अस्थियां लेने से भी बच रहे हैं। शिमला के श्मशानघाट में कोविड वायरस की वजह से मरने वालों के परिजन मृतक की अस्थियां और राख तक लोग नहीं ले रहे हैं। जबकि हिंदू रीति-रिवाज में अस्थियों का नदियों विसर्जन का एक अलग ही महत्व है।

वहीं शिमला में कोरोना से अब तक 171 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। मृतकों में दूसरे जिलों के भी लोग शामिल हो सकते हैं। लेकिन प्रोटोकोल के हिसाब से शवों का नजदीकी श्मशानघाट में ही संस्कार किया जाता है। ऐसे में शिमला के कनलोग में संस्कार किया जा रहा है। कनलोग मोक्ष धाम के लॉकर में 65 लोगों के अस्थि कलश रखे हुए हैं। जिन्हें परिवार वाले लेने नहीं आ रहे हैं। परिवार वालों को कर्मी बार-बार फोन कर रहें हैं लेकिन अस्थियां लेने कोई नहीं पहुंच रहा। अब सूद सभा ने अस्थियों का सामूहिक विसर्जन करने फैसला लिया है।

पंडित पवन कुमार का कहना है कि कनलोग मोक्ष धाम में रखी अस्थियों को अगर जिला प्रशासन अनुमित देगा तो हम खुद उनको विसर्जन कर देंगे। लोग कोरोना के डर से मोक्ष धाम नहीं आ रहे हैं। जबकि, जब तक अस्थियों को बहाया नहीं जाता है, तब तक उन्हें मोक्ष नहीं मिलता है।

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