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टिकैत बोले - सरकार से सर्दी में खत्म हुई वार्ता सर्दियों में ही होगी शुरू

भाकियू नेता राकेश टिकैत ने कहा कि जिस तरह मेले में मिलता है बिछड़ा हुआ, ऐसे ही सरकार से सर्दी में खत्म हुई वार्ता सर्दियों में ही होगी शुरू।

टिकैत बोले - सरकार से सर्दी में खत्म हुई वार्ता सर्दियों में ही होगी शुरू
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कुंडली बॉर्डर पर पहुंचे भाकियू नेता राकेश टिकैत किसानों को संबोधित करते हुए।

हरिभूमि न्यूज. सोनीपत

तीन कृषि कानूनों के विरोध में कुंडली बॉर्डर पर आंदोलनरत किसानों को संबोधित करते हुए भाकियू नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि संसद एक मंडी है, जिसमें बैठे व्यापारी अपने फायदे के लिए कानून बनाते हैं। राकेश टिकैत शुक्रवार को एक्सप्रेस-वे से गाजीपुर बॉर्डर जाते हुए कुंडली बॉर्डर पर पहुंचे और किसानों से रुबरू होते हुए अपनी बात रखी। भाकियू नेता राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार कह रही है कि किसानों को किसी भी जगह फसल बेचने का हक दिया है। किसान पूरे देश में किसी भी जगह जाकर फसल बेच सकता है। इसलिए अब किसान ट्रैक्टर-ट्रालियों में गेहूं भरकर संसद पर पहुंचेंगे और गेट पर अपना गेहूं बेचेंगे। उन्होंने कहा कि संसद सबसे बड़ा इंसाफ का मंदिर है। जहां किसान इंसाफ के लिए जाएंगे। अगर पुलिस रोकने का प्रयास करेगी तो वहीं टेंट लगाकर बैठ जाएंगे।

राकेश टकैत ने कहा कि आंदोलनरत किसानों ने गर्मी से बचने के लिए पूरा इंतजाम कर लिया है। प्राचीन समय में हमारे पूर्वज जिस प्रकार झोपड़ी बनाकर रहते थे, उसी प्रकार यहां पर झोपड़ियां बनाई गई हैं। उन्होंने कहा कि धरनास्थल भी किसानों के लिए गांव की ही तरह है। सरकार जब तक किसानों की मांगे पूरी नहीं करती, तब तक वे यहां से पीछे नहीं हटेंगे। आंदोलन को मजबूती के साथ आगे बढ़ाते रहेंगे। राकेश टिकैत ने कहा कि आंदोलन के 100 दिन पूरे होने पर शनिवार 6 मार्च को केएमपी जाम किया जाएगा। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि इस अभियान को सफल बनाना है तो किसी तरह का बवाल नहीं होना चाहिए। क्योंकि सरकार पहले भी आंदोलन को बदनाम कर चुकी है और वह लगातार किसानों को बदनाम करने के तरीके ढूंढ रही है। सरकार को कोई मौका नहीं देना है।

सर्दियों में खत्म हुई वार्ता, सर्दियों में ही होगी शुरू

राकेश टिकैत ने कहा कि 22 जनवरी के बाद से सरकार के साथ कोई वार्ता नहीं हुई है। उन्होंने चुटकी लेते हुए एक कहावत बताई कि जिस प्रकार बिछड़ा हुआ मेले में मिलता है। उसी प्रकार सरकार ने सर्दी में बातचीत खत्म की थी तो अब आगे सर्दी में ही बातचीत शुरू होगी। इसलिए यह आंदोलन भी सर्दी तक इसी प्रकार चलेगा। जब तक किसान भी यहां से जाने वाला नहीं है। यहां से दिल्ली की एक-एक कील निकालकर ही किसान वापस जाएंगे।

वैचारिक क्रांति का बन चुका है आंदोलन, नहीं होगा खत्म

भाकियू नेता राकेश टिकैत ने कहा कि वह अन्य किसान नेताओं के साथ 12ा से 14 मार्च तक बंगाल में रहंगे और वहां किसानों के साथ ही आमजन को सरकार की जनविरोधी नीतियों के बारे में अवगत कराएंगे। लोगों को बताया जाएगा कि किस तरह से सरकार उनका हक छीन रही है। साथ ही बताया जाएगा कि एमएसपी नहीं मिल रही है तो गैस, पेट्रोल, डीजल के दाम लगातार बढ़ रहे है। इस दौरान सरकार व सहयोगी दलों का भी विरोध किया जाएगा। राकेश टिकैत ने कहा कि यह वैचारिक क्रांति का आंदोलन बन चुका है और यह अब खत्म नहीं होने वाला है। उन्होंने कहा कि पूरे देश में जाकर पंचायत करेंगे और आंदोलन को आगे बढ़ाएंगे। सरकार का इलाज किए बिना किसान यहां से नहीं जाएगा।


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