Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

एडमिशन : अभिभावकों ने तिमाही के बजाय एक महीने के हिसाब से ही फीस लेने की मांग उठाई

लॉकडाउन में बिगड़ी अधिकांश लोगों की आर्थिक स्थिति (Economic Condition) अभी तक नहीं सुधरी है। इसी बीच अब स्कूलों में दाखिला प्रक्रिया चल रही है। निजी स्कूल (Private schools) में एडमिशन फीस बहुत ज्यादा है। कई स्कूलों में तिमाही के हिसाब से फीस (Fees) ली जा रही है। तिमाही फीस की यह राशि हजारों में बैठती है, जिसे देने में बहुत से अभिभावकों (Parents) को परेशानी हो रही है।

नलाइन कक्षाएं
X

हरिभूमि न्यूज. बहादुरगढ़

स्कूलों में दाखिला प्रक्रिया (Admission process) जारी है। इसी बीच अभिभावकों ने स्कूल संचालकों से फीस में बढ़ोतरी न करने और तिमाही के बजाय एक महीने के हिसाब से ही फीस लेने की मांग उठाई है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों से भी इस मामले में संज्ञान लेने की गुहार लगाई जा रही है, ताकि अभिभावकों पर आर्थिक बोझ न बढ़े।

दरअसल, पिछला पूरा साल कोरोना से प्रभावित रहा थ। जिस कारण किसी की नौकरी चली गई थी तो किसी का काम बंद हो गया। लॉकडाउन में बिगड़ी अधिकांश लोगों की आर्थिक स्थिति अभी तक नहीं सुधरी है। इसी बीच अब स्कूलों में दाखिला प्रक्रिया चल रही है। निजी स्कूल में एडमिशन फीस बहुत ज्यादा है। कई स्कूलों में तिमाही के हिसाब से फीस ली जा रही है। तिमाही फीस की यह राशि हजारों में बैठती है, जिसे देने में बहुत से अभिभावकों को परेशानी हो रही है।

शहर के निवासी राजीव ने बताया कि लॉकडाउन में आधी सेलरी कट गई थी। अब भी पूरी नहीं मिल रही। स्कूलों में एडमिशन चल रहे हैं। बच्चों की किताबें-ड्रेस लेनी हैं। प्राइवेट नौकरी करने वाले अभिभावकों के सामने बच्चों को पढ़ाना मुश्किलभरा काम हो गया है। ऐसे में तिमाही के हिसाब से वसूली जा रही फीस और ज्यादा परेशानी खड़ी कर रही है। हालातों को देखते हुए स्कूल प्रबंधन को इस ओर ध्यान देना चाहिए। एक तो फीस न बढ़ाई जाए और एक महीने के हिसाब से ही ली जाए। नरेंद्र, विकास आदि ने कहा कि पिछले साल ऑनलाइन पढ़ाई शुरू हुई थी। इस कारण बच्चों को लेपटॉप, मोबाइल लेकर दिए, जिस कारण खर्चा बढ़ गया। काम पहले जैसा रहा नहीं है। आर्थिक हालत ढीली है। इसलिए अभिभावकों की मजबूरी को समझा जाए। जो अभिभावक इकट्ठी फीस नहीं दे सकते, उनसे महीने के हिसाब से ली जाए। ताकि अभिभावकों पर आर्थिक बोझ न बढ़े।

Next Story